वाराणसी में डेंगू का कहर: बीएचयू के आसपास का इलाका बना डेंजर जोन, कई डॉक्टर भी बीमार

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम जनित बीमारियां लोगों को डरा रही हैं। वाराणसी, फिरोजाबाद में डेंगू तो सोनभद्र में डायरिया का प्रकोप है।

ShashwatShashwat   31 Aug 2021 6:46 AM GMT

वाराणसी में डेंगू का कहर: बीएचयू के आसपास का इलाका बना डेंजर जोन, कई डॉक्टर भी बीमार

वाराणसी की करीब 3 दर्जन कॉलोनियों में डेंगू का प्रकोप दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में डेंगू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की कतारे लगी हैं। फोटो- शाश्वत उपाध्याय

वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। "हमारा तो जवान लड़का था, देखते-देखते चला गया। किसको दोष दें, अस्पताल में भर्ती कराने भी ले गए तो वैसी ही स्थिति थी। तीन दिन भर्ती कराने में लगा। फिर भी जान नहीं बचा सके। ये कहते-कहते सुमंत के चाचा रमेश (40 वर्ष) भावुक होकर चुप हो गए। सुमंत 24 वर्ष के नौजवान थे और मल्लाह बस्ती, अस्सी के रहने वाले थे। डेंगू से पीड़ित होने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बीते 24 अगस्त को उनकी मृत्यु हो गई। सुमंत की मौत अस्पताल से निकलने के बाद घर पर हुई थी। और उनका एलाइजा टेस्ट भी नहीं हुआ था।

वाराणसी के जिला मलेरिया अधिकारी के मुताबिक जिले में 30 अगस्त तक डेंगू के 74 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती थे। उन्होंने डेंगू से किसी की मौत से इनकार किया।

जिला मलेरिया अधिकारी एससी पांडेय ने गांव कनेक्शन को बताया, "डेंगू से जिले में अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है। सरकारी आंकड़ों में जिनका एलाइजा टेस्ट होता है, उन्हें ही दर्ज किया जाता है। जिले में फिलहाल डेंगू के 74 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।" स्थानीय लोगों के मुताबिक डेंगू पीड़ितों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा होगा क्योंकि बहुत सारे लोग घरों और निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। शहर की 35 कॉलोनियां-मुहल्ले डेंगू से प्रभावित हैं। हालत ये है कि बुधवार 25 अगस्त को बीएचयू के माइक्रोबॉयोलाजी विभाग से 30 लोगों की एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट आई, जिसमें 21 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी।

मल्लाह कॉलोनी में स्थित सुमंत का घर।

मलेरिया अधिकारी के मुताबिक डेंगू से बचाव के लिए जिले भर में लार्वा सर्चिंग अभियान चल रहा है। शहर के कुल 728 मोहल्लों और कॉलोनियों में एंटीलार्वा का छिड़काव किया जा चुका है। 1668 घरों में पाइरेथ्रम का इंडोर स्प्रे, 50 घरों में मिले लार्वा के स्रोत को नष्ट किया गया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी बनारस में डेंगू की पहली स्टेज चल रही है, जिस पर दवा के छिड़काव और साफ-सफाई करके ही नियंत्रण पाया जा सकता है। मगर, जैसे ही यह दूसरे और तीसरे स्टेज में पहुंचेगा, तो अस्पतालों को प्लेटलेट्स और इंजेक्शन की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

वाराणसी में बाढ़ के बाद पानी तो ज्यादातर इलाकों से उतर गया है लेकिन अब जलजमाव के कारण डेंगू ने आतंक मचा दिया है।

भर्ती मरीज़ों में छ: से अधिक बीएचयू के छात्र, तीन मेडिकल के स्टूडेंट

डेंगू की चपेट में सिर्फ आम लोग नहीं हैं, कई मेडिकल स्टूडेंट और डॉक्टर भी हैं। सोनी कुमारी बीएचयू से ही नर्सिंग की पढ़ाई करती हैं और आखिरी वर्ष की छात्रा हैं, मेडिसिन वार्ड में तीन दिन से भर्ती हैं। वो बताती हैं, "मैं पहले इमरजेंसी वार्ड में छह दिन थी, फिर यहां आई। मैं ड्यूटी पर थी तभी तबियत खराब हुई।" यहां बीएचयू में पढ़ रहे 6 छात्र भर्ती हैं जिनमें से तीन नर्सिंग के हैं और इलाज के दौरान ही संक्रमित हुए हैं।"

बेड नंबर 15 पर मध्य प्रदेश के रहने वाले बीएचयू में नर्सिंग ऑफिसर अशोक भर्ती हैं। अशोक को भी डेंगू के मरीज़ों के इलाज के दौरान ही संक्रमण हुआ।

मेडिसिन वार्ड के नर्सिंग ऑफिसर प्रदीप ने गांव कनेक्शन से बातचीत में बताया कि इस बार मरीज़ पिछले कई सालों की तुलना में काफी ज्यादा हैं। उन्होंने कहा, "स्टाफ पर तो हम कमेंट नहीं कर सकते हैं, लेकिन दवाइयां वगैरह भी जो हॉस्पिटल से उपलब्ध कराई जाती थीं, वो नहीं हो पा रही हैं।"

इसके अलावा आईएमएस बीएचयू के रेजिडेंट भी इसकी चपेट में आ गए हैं। दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के करीब दस से अधिक रेजिडेंट डेंगू के चपेट में हैं और अपना इलाज करा रहे हैं। रेजिंडेट्स ने प्रभारी कुलपति को संकाय में बढ़े मच्छरों को लेकर पत्र लिखा था।

प्रदेश में बढ़ते संचारी रोगों को देखते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त को लखनऊ में इस संबंध में बैठक की और अधिकारियों को ग्रामीण और शहरी इलाकों में साफ-सफाई और फॉगिंग और सैनिटाइजेश के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने इस बैठक में जलजमाव को रोके जाने और संबंधित विभागों से आपसी सामजस्य बनाकर कार्य करने को कहा है। सीएम ने मथुरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद के जिलों में कुछ लोगों के डेंगू आदि से बीमार होने मामले में संज्ञान लेते हुए टीमें भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 अगस्त को फिरोजाबाद के स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचकर डेंगू से पीड़ित बच्चों से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल बुखार के कारणों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए लखनऊ के पीजीआई भेजे जाएं।

सीएम ने कहा, "किसी भी मरीज की प्लेटलेट्स कम होने पर तुरंत आवश्यकतानुसार ब्लड चढ़ाया जाए और इलाज में कोई कोताई न बरती जाए।"

फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल पीड़ित मरीजों से मुलाकात करते सीएम योगी आदित्यनाथ।

वॉटर लॉगिंग की समस्या खत्म करने की बैठक, मगर बीएचयू अस्पताल में लगा है पानी

वाराणसी में भयावह होते हालातों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, नगर-निगम, क्षेत्रिय विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह और सौरभ श्रीवास्तव, बीएचयू अस्पताल प्रशासन और जलकल विभाग की बैठक बुलाई गई, जिसमें पूरे शहर में एंटी लार्वा छिड़काव की बात पर सहमति बनी।

बैठक में यह भी फैसला हुआ कि वाटर लॉगिंग यानि कि जहां-जहां भी जलजमाव है उसे निकालने के लिए नगर-निगम कोई ठोस उपाय करे और तत्काल ऐसे स्थानों को चिन्हित कर पानी हटवाएं। इस बैठक के अगले ही दिन इलाके के सबसे बड़े चिकित्सालय सर सुंदर लाल चिकित्सालय, बीएचयू के इन-आउट गेट से मुख्य द्वार तक पानी लग गया था।

रविवार 29 अगस्त को पानी लगने के तीसरे दिन 100 बेड के मेडिसिन वार्ड में डेंगू के कुल 20 की संख्या में भर्ती थे वहीं इमरजेंसी में डेंगू जैसे लक्षणों वाले 40 के करीब मरीज अपनी टेस्ट रिपोर्ट अथवा बेड के इंतजार में थे।

बनारस में सामने घाट, लंका, भगवानपुर, छित्तूपुर, नगवां, बीएलडब्ल्यू, राजेंद्र विहार कॉलोनी, अस्सी, भदैनी, कबीरचौरा, शिवाला, खोजवा, फुलवरिया, सुंदरपुर, रवींद्रपुरी, नरिया, सेंट्रल जेल, दुर्गाकुंड, सीर गोवर्धन समेत कुल 35 एरिया सबसे ज्यादा डेंगू से प्रभावित हैं। बनारस के अन्य सरकारी अस्पतालों की हालत भी दयनीय

बनारस के अन्य अस्पतालों के हाल भी कमोबेश ऐसे ही हैं। मंडलीय अस्पताल कबीर-चौरा में दस बेड का डेंगू वार्ड बना दिया गया है। प्रोटोकॉल के हिसाब से मरीजों को बेड पर मच्छरदानी लगाने को कहा गया है। वहीं बनारस रेल इंजन कारखाना के अस्पताल में बुधवार को डेंग्यू के 24 मरीज भर्ती किए गए हैं। इसमें महिलाएं, बच्चे भी शामिल हैं।

बरेका के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया, "हमारे 10 कर्मचारी, छह बच्चे और अन्य परिवार के सदस्य डेंगू से पीड़ित हैं। इसके अलावा लगभग 14 मरीज़ नए आए हैं। यह पिछले कई सालों की तुलना में अधिक है।"

बीएचयू के आसपास की कॉलोनियों में गंदगी।

वाराणसी में पूर्वाचल के अलावा बिहार से भी आते हैं मरीज

बीएचयू अस्पताल में वाराणसी, आसपास के जिलों के अलावा बड़ी संख्या में बिहार से भी लोग आते हैं। वैसे तो इमरजेंसी के सभी वार्ड मरीजों से भरे पड़े हैं, लेकिन 29 अगस्त को हालात काफी दयनीय दिखे। अस्पताल परिसर में पानी लगा है। इसके अलावा मात्र 40 स्ट्रेचर के सहारे चल रहे इस अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में ही कम से कम 15 मरीज़ स्ट्रेचर पर दिखाई दिए। यहां के मेडिसिन वार्ड में तैनात डॉ. अमर बताते हैं कि इस बार केसेज़ ज्यादा हैं मगर हम लोग लगातार 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं।

डॉ. अमर बताते हैं, "बनारस में बाढ़ के कारण यह हालत बिगड़ी है। यहां जो इलाके सेंसिटीव हैं, वहां बाढ़ और बरसात का पानी रुका हुआ है। अस्पताल में हमारी वार्ड में जो मरीज़ आ रहे हैं, वो चार से पांच दिन में ठीक हो जा रहे हैं। इसके अलावा रुके हुए पानी और जरूरी एहतियात पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है वर्ना स्थिति और बिग़ड़ सकती है।"

सुंदर लाल अस्पताल में लिफ्ट तीन महीने से खराब

छह मंजिल के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में मरीज़ और उनके परिजनों के लिए तीन लिफ्ट हैं, बीते तीन माह से लगभग तीनों खराब हैं। एक लिफ्ट चलती है मगर बहुत ठहर-ठहर के। खबर लिखने के दौरान ही लगभग 40 मिनट तक लिफ्ट खराब थी। स्ट्रेचर और इमरजेंसी के मरीज़ परेशान रहे। इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर पर मरीज़ों को रखकर ईलाज किया जा रहा है जिसकी वजह से पूरे अस्पताल में स्ट्रेचर कम पड़ गए हैं।

सर सुंदर लाल चिकित्सालय इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ. ने बताया, ''हमारे यहां कुल 40 स्ट्रेचर हैं लेकिन जब मरीज़ बढ़ते हैं तो हालत काबू से बाहर हो जाती है। हमारी प्राथमिकता इलाज है, हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं।"

जिला मलेरिया अधिकारी के मुताबिक हालात को देखते हुए सारे प्रयास जारी हैं। 26 अगस्त को डीएलडब्ल्यू (DLWU) सभागार में दो क्षेत्रिय विधायकों, कमिश्नर, स्वास्थ्य अधिकारी, जलकल विभाग, बीएचयू जिला प्रशासन और सर्वाधिक प्रभावित गांवों के सभी ग्राम प्रधानों के साथ बैठक की गई है और विधिवत स्ट्रेजेजी बनाई गई है।

गांव कनेक्शन से बातचीत में उन्होंने बताया, 'स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नगरीय क्षेत्र में 18 और ग्रामीण क्षेत्र में कुल 21 फिल्ड वर्कर लगे हैं। इनके साथ नगर निगम के 84 और डूडा से 22 फील्ड वर्कर्स को भी दवाओं और एंटीलार्वा छिड़काव के काम में लगाया गया है।'

डेंगू कैसे होता है?

डेंगू मादा एडीज मच्छर काटने से फैलता है। पीड़ित व्यक्ति को तेज बुखार के साथ उल्टी, जिल मिचलना, त्वचा पर दाने और जोड़ों मांस पेशियों में दर्द के साथ सिरदर्द प्रमुख लक्षण है। इससे बचने का सबसे आसान उपाय है घर के आसपास पानी जमा न हो पाए और मच्छर दानी का प्रयोग करें।

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