वन विभाग गंगा किनारे के किसानों को जैविक खेती के लिए करेगा प्रेरित 

वन विभाग गंगा किनारे के किसानों को जैविक खेती के लिए करेगा प्रेरित गंगा तट होगा हरा-भरा

अब गंगा नदी के तटों पर अभियान चलाकर पौधा रोपण कराया जाएगा। वन विभाग ने गंगा नदी को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। अभियान में विभाग सामाजिक संस्थाओं और स्वयं सेवी संस्थाओं का भी सहयोग लेगा। इसके लिए वन अफसरों ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि तटों पर पौधे लगाए जाने से जहां एक और पर्यावरण शुद्ध होगा, वहीं नदी के किनारे बसने वाले गाँवों को भी शुद्ध हवा मिल सकेगी।

ये भी पढ़ें- जैविक तरीके से गंगा को साफ करने की तैयारी, तालाब के पानी टेस्ट सफल

मेरठ की डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं, "नदी के तटों पर बड़े पैमाने पर पौधा रोपण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें पर्यावरण बचाओ जितनी भी संस्था हैं, वन विभाग उनका पूरा सहयोग करेगा। इसके अलावा केन्द्र सरकार के नमामी गंगे प्रोजेक्ट में भी गंगा तटों को हरा-भरा बनाने के लिए प्रावधान किया गया है। वो आगे बताती हैं कि विभाग तो अपने स्तर से अभियान को अभी शुरू कर देगा, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि नए वित्तीय वर्ष में सरकार इसके लिए अलग से बजट का आवंटन भी किया है।

ये भी पढ़ें- राष्‍ट्रीय गंगा सफाई मिशन के लिए 4,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मिली मंजूरी

इस समय गंगा नदी वन विभाग की प्राथमिकताओं में है। गंगा के सभी तटों को हरा भरा बनाया जाएगा। ताकि प्रर्यावरण शुद्ध हो सके।
मुकेश कुमार, मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन

ये भी पढ़ें- इंटरव्यू : जैविक खेती को बढ़ावा देने का मलतब एक और बाजार खड़ा करना तो नहीं 

उगाई जाएंगी जैविक सब्जियां

मुख्य संरक्षक मुकेश कुमार बताते हैं कि इसके लिए गंगा किनारे जैविक सब्जियों की खेती भी कराने की योजना है। गंगा खादर में करीब 50 गाँव गंगा किनारे हैं, सभी गाँवों के किसानों को कृषि विभाग की और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा। ताकि पर्यावरण के साथ ही किसानों को आर्थिक फायदा भी हो। इससे सरकार की मंसा है कि यदि गंगा किनारे जैविक खेती कराई जाए तो किटनाशक व केमिकल युक्त पानी गंगा में नहीं जाएगा। साथ ही किसान मुनाफा भी कमा सकेंगे। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत सराकर ने 1500 से ज्यादा गाँव चिंहित किए हैं जहां जैविक खेती कराने की योजना है।

ये भी पढ़ें- गोबर खेत से गायब है कैसे होगी जैविक खेती

Share it
Top