बिना मानदेय के कैसे गुजारा करें ग्राम रोजगार सेवक ?

बिना मानदेय के कैसे गुजारा करें ग्राम रोजगार सेवक ?हाल में ग्राम रोजगार सेवकों ने मानदेय को लेकर किया था प्रदर्शन। फोटो साभार: इंटरनेट

लखनऊ। “प्रदेश में लगभग 80 फीसदी ग्राम रोजगार सेवकों को 15 माह से लेकर 24 माह तक का मानदेय नहीं मिला है, साथ ही रोजगार सेवकों का न तो ईपीएफ़ कटता है, न ही बीमा की सुविधा दी जाती है। आकस्मिक स्थितियों में अगर किसी ग्राम रोजगार सेवक की मौत हो जाती है तो उसका परिवार सड़क पर आ जाता है। पिछले 11 वर्षों में तमाम ग्राम रोजगार सेवक हमारे बीच नहीं रहे और उनके परिवारों को कोई सहायता भी नहीं दी गई।” ग्राम रोजगार सेवकों की यह पीड़ा ग्राम रोजगार सेवक संगठन के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने बताई।

पंचायत में चाहे विधवा, वृद्धावस्था पेंशन दिलवाना हो या मनरेगा के श्रमिकों को भुगतान दिलाना हो, ग्राम पंचायत के सोशल ऑडिट से लेकर ग्राम पंचायत की बैठक तक, परिवार रजिस्टर, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, राज्य लोकसभा चुनाव में ड्यूटी, ये सारे काम ग्राम पंचायत में ग्राम रोजगार के जिम्मे ही आता है। इसके बावजूद रोजगार सेवक आर्थिक तंगी में जी रहे हैं।

ग्राम रोजगार सेवकों को हटाया गया

प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह आगे बताते हैं, “बहुत सी ग्राम पंचायतें नगरीय क्षेत्र में आ गई हैं, वहां से ग्राम रोजगार सेवकों का काम खत्म किया जा रहा है, जो ग्राम रोजगार सेवक 11 वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर काम कर रहा है, अचानक नौकरी खत्म होने पर कहां जाए। प्रदेश में बहुत सी ग्राम पंचायत ऐसी हैं, जो रिक्त हैं, वहां इन ग्राम रोजगार सेवकों को समायोजित किया जा सकता है। इन सब मुद्दों को लेकर कई बार ग्राम्य विकास मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्होंने जल्द निराकरण करने का आश्वासन भी दिया, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।"

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सत्ता बदली तो ग्राम रोजगार सेवक हुए शिकार

करीब 11 वर्ष पहले समाजवादी पार्टी की सरकार में ग्राम पंचायत मित्रों की भर्ती की गई थी। सत्ता परिवर्तन होने के बाद बसपा सरकार में इनका पदनाम बदलकर ग्राम रोजगार सेवक कर दिया गया। फिर से सत्ता बदली तो सत्ता परिवर्तन के दौर में एक बार फिर से ग्राम रोजगार सेवक इसकी चपेट में आ गए।

ग्राम रोजगार सेवकों ने कई बार किए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन। फोटो साभार: इंटरनेट

जौनपुर में 21 ब्लॉक हैं, जिसमें 1100 ग्राम रोज़गार सेवक कार्य कर रहे हैं। जनपद के ग्राम सेवकों का लगभग आठ करोड़ रुपए मानदेय बकाया है।
लक्ष्मी नारायण चौरसिया, जिलाध्यक्ष, ग्राम रोजगार सेवक संघ, जौनपुर, उत्तर प्रदेश

कहीं 7 करोड़, तो कहीं 8 करोड रुपए मानदेय लटका

आजमगढ़ के ग्राम रोज़गार सेवक संघ के जनपद अध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह, जो कि ग्राम ककरही के ग्राम रोज़गार सेवक हैं, बताते हैं, “आजमगढ़ में कुल 22 ब्लॉक हैं और इनमें 1039 ग्राम रोजगार सेवक कार्य कर रहे हैं। इन सबका दिसम्बर 2017 तक का सात करोड़ रुपए मानदेय लटका हुआ है।” वहीं, जनपद जौनपुर के ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष सेवक लक्ष्मी नारायण चौरसिया ने बताया, “जौनपुर में 21 ब्लॉक हैं, जिसमें 1100 ग्राम रोज़गार सेवक कार्य कर रहे हैं। जनपद के ग्राम सेवकों का लगभग आठ करोड़ रुपए मानदेय बकाया है।”

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इन जिलों में नहीं मिला मानदेय

उत्तर प्रदेश के हाथरस, कानपुर, श्रावस्ती, रायबरेली, बहराइच, उन्नाव, ललितपुर, सुल्तानपुर, सहारनपुर, कासगंज, औरैया, गोंडा, मुरादाबाद, आगरा, कन्नौज, इटावा, बिजनौर, पीलीभीत, आजमगढ़, कुशीनगर में ग्राम रोजगार सेवकों व जिला समन्वय अधिकारी से बात करने पर ज्ञात हुआ कि इन जनपदों में भी ग्राम रोजगार सेवकों के 15 से 23 माह तक का मानदेय बकाया है।

चंदा लेकर पीड़ित परिवार की मदद की

ग्राम रोजगार सेवक सतीश चंद्र गौतम की मौत के बाद लोगों ने चंदा एकत्र कर पीड़ित परिवार की मदद की।

कुछ दिनों पहले जनपद उन्नाव के ब्लॉक हिलौली के ग्राम कुदरा के ग्राम रोजगार सेवक सतीश चंन्द्र गौतम की मौत हो गई थी। पास के ग्राम सलौली के ग्राम रोजगार सेवक संदीप ने बताया, “सतीश को टीबी की बीमारी थी और परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। परिवार में मृतक सतीश की पत्नी सरोजनी, बेटी आरती (12 वर्ष), अर्चना (8 वर्ष), अंजली (6 वर्ष), अर्पिता (4 वर्ष) व पुत्र आयुष (एक वर्ष) है। परिवार की गरीबी को देखते हुए ब्लॉक हिलौली के ग्राम रोजगार सेवकों ने एक-एक हजार चन्दा लगाकर पीड़ित परिवार की मदद की।

डॉ. महेंद्र सिंह, मंत्री ग्राम्य विकास विभाग, यूपी सरकार

प्रदेश के कुछ जिलों में ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय बकाया है। मनरेगा के तहत इनकी नियुक्ति होती है। मैंने बात कर ली है और जल्द ही बजट रिलीज हो जाएगा। ग्राम रोजगार सेवकों को बकाया मानदेय का भुगतान जल्द करा दिया जाएगा।
डॉ. महेंद्र सिंह, मंत्री ग्राम्य विकास विभाग, यूपी सरकार

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