ऐसा क्या हुआ कि फेरों से पहले मंडप से रफूचक्कर हो गईं कई दुल्हनें

ऐसा क्या हुआ कि फेरों से पहले मंडप से रफूचक्कर हो गईं कई दुल्हनेंसामूहिक विवाह कराते आचार्य 

अजय मिश्र/मोहम्मद परवेज

तिर्वा (कन्नौज)। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत करीब एक सैकड़ा जोड़ों को राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में बुलाया गया था। कई दुल्हनियां फेरे लेने से पहले ही खिसक लीं। उनके परिजनों ने बताया कि बोर्ड परीक्षा देने गई हैं। जब ‘गांव कनेक्शन’ टीम ने संबंधित परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर पड़ताल की तो पता चला कि उस नाम की कोई भी छात्रा पेपर देने नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 160 किमी दूर कन्नौज जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब 16 किमी दूर तहसील तिर्वा क्षेत्र के बद्धापुर्वा निवासी करन का विवाह हरिहरपुर गांव की श्रीदेवी से हुआ। यहां के मंडप पर दूल्हा करन मौजूद था। जब पूछा गया कि होने वाली दुल्हन कहां है तो बताया कि महेंद्र नीलम जनता इंटर कॉलेज तिर्वा में अंग्रेजी का पेपर देने गई है। पेपर शाम सवा पांच बजे खत्म होगा।

मुस्लिमों का विवाह कराते हाफिज जी

इसी तरह मंडप नंबर 82 पर रिया संग आर्यन के विवाह की पट्टिका लगी थी। त्रिलोकपुर निवासी ओमप्रकाश ने बताया, “मेरी बेटी रिया इंटर की छात्रा है। जिसकी भूड़ नगरिया फर्रूखाबाद के आर्यन से शादी हो चुकी है। अब एके रहमानियां इंटर कॉलेज तिर्वा में परीक्षा देने गई है।”

वहीं ग्राम पंचायत सचिव जेपी राजपूत ने बताया, “पंडाल नंबर 36 और 55 की छात्राएं भी बोर्ड परीक्षा में शामिल हैं। एक पहली पाली में परीक्षा दे आई है और दूसरी देने जाएगी।” जबकि उधर, महेंद्र नीलम जनता इंटर कॉलेज तिर्वा में पहुंचने पर केंद्र व्यवस्थापक वीरेंद्र सिंह राठौर ने बताया, ‘‘सिर्फ दो छात्राएं परीक्षा दे रही हैं, जो सेठ वैजनाथ गुप्ता इंटर कॉलेज अहेर की हैं। श्रीदेवी नाम की कोई लड़की परीक्षा नहीं दे रही है।’’

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पैरों में रंग लगातीं ये वधु

एसएसपी इंटर कॉलेज (बाबा दौलेश्वर मंदिर मार्ग) तिर्वा के केंद्र व्यवस्थापक ज्ञानेंद्र कुमार बताते हैं, ‘‘आज हमारे यहां कोई लड़की पेपर नहीं दे रही है। सब लड़के ही पेपर देने आए हैं।’’ बताते चलें कि इस केंद्र पर माधुरी नाम की युवती के परीक्षा देने की बात परिजनों ने कही थी। जो शादी के मंडप पर नहीं थीं।

कार्यक्रम में डीएम रवीन्द्र कुमार, विधायक कैलाश राजपूत, सीडीओ अवधेश बहादुर सिंह, एसडीएम डॉ. अरूण कुमार सिंह और बीडीओ रामआसरे ने भी शिरकत की। ब्लॉक प्रमुख उमर्दा अजय वर्मा ने मोबाइल व अन्य उपहार जोड़ों को दिए। जिला समाज कल्याण अधिकारी संतोश पाठक बताती हैं, ‘‘तीन नगर पंचायत तिर्वागंज और 99 जोड़े उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र के हैं। इनकी ही शादियां हो रही हैं।’’ संचालन श्याम स्वरूप चतुर्वेदी ने किया।

मुस्लिम जोड़े को उपहार देते विधायक, साथ में एसडीएम और ब्लाॅक प्रमुख।

‘कभी नहीं सोचा था, जिस दिन पेपर उसी दिन शादी’

उमर्दा के पछायेपुर्वा निवासी सुभाष की पुत्री माधुरी (द्वितीय) बताती हैं, ‘‘आज सुबह सात बजे मेरा पेपर कला का पेपर था। श्रीराम बिट्टन देवी इंटर कॉलेज में सेंटर गया है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। सुबह पेपर देंगे और दोपहर को शादी होगी।’’ माधुरी आगे बताती हैं, ‘‘मैं पेपपर दे रही थी लेकिन ध्यान शादी की तरफ था। शादी रिंकू के साथ हो रही है।’’

शादी तो बाद में होगी, यहां आ गए

ठठिया क्षेत्र के दन्नापुर्वा निवासी करीब 62 वर्शीय बाबूराम बताते हैं, ‘‘मैं बेटी की तरफ से हूं। शादी तो मई में होगी पर यहां आ गए हैं। पंडित ने शादी का मुहूर्त बाद में निकला है।’’

कन्नौज के तिर्वा ब्लॉक कलसान निवासी आचार्य हरिओम शुक्ल बताते हैं, ‘‘होलाष्टक में शादियां नहीं होती हैं। यह होली से पहले अष्टमी को लगती है। 24 फरवरी तक लग्न थी, अब छह मार्च को लग्न है। बीडीओ साहब ने बुलाया था, तो षादी करा रहे हैं। अभी कोई मुहुर्त नहीं है। कुछ लोग बाद में भी शादी करेंगे। दोबारा फेरे नहीं लिए जाते हैं।’’

पंडाल में मौजूद जोड़े

मुस्लिम बोले, 20 हजार की योजना में चढ़ावा चढ़ाना पड़ता था

तिर्वा के मोहल्ला आजादनगर निवासी हाफिज मोहम्मद अफसर रजा बताते हैं, ‘‘सरकार गरीबों के लिए अच्छा कर रही है। पांच मुस्लिम जोड़ों का निकाह होना है, तीन आए हैं। जो मेरा शरीर है वह दूसरों का है। हिन्दू मंदिर जाते हैं हम लोग मस्जिद जाते हैं। गवर्मेंट से फायदा मिल रहा है। शादियां और निकाह कराना पुण्य का काम है।’’ एक ही पंडाल में गंगा-जमुनी तहजीब पर हिंदुओं की शादी और मुस्लिमों के निकाह के सवाल पर हाफिज बताते हैं, ‘‘ताकतवर इंसान सबको फायदा देता है। हम अपना काम कर रहे हैं और वह अपना काम कर रहे हैं।’’

रामपुर मझिला से आए सलीम बताते हैं, ‘‘मेरी छोटी बहन आरजू बानो की शादी कानपुर देहात के नार खुर्द निवासी मोहम्मद फारूख से हो रही है। देषश में रहने वाले हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई की तरह रहते हैं।’’

सलीम आगे कहते हैं कि ‘‘यह योजना 20 हजार की योजना से अच्छी है। पहले पैसा भी नहीं मिलता था, चढ़़ावा भी चढ़ता था। अब शादी तो हो रही है इंसाल्लाह। सरकार के ही सब बच्चे हैं अपना पराया नहीं, तभी तो एक ही जगह शादी और निकाह दोनों हो रहे हैं।’’

शादी में देने के लिए रखे सामान

दिन सब भगवान के बनाए

खानपुर मवइया के ज्ञानसिंह पुत्र मेघनाथ बताते हैं, ‘‘मेरी शादी लाडली निवासी फकरपुर बरेवा के साथ हो रही है। दिन सब भगवान के द्वारा बनाए हुए हैं। उसमें ही सब हो रहा है। बस दंपति जीवन सही चलना चाहिए। हम गृह-नक्षत्र नहीं मानते हैं। जो लोग कोर्ट में शादी करते हैं वह तो तारीख और दिन-नक्षत्र नहीं देखते हैं उनका जीवन भी अच्छा चलता है।’’

नंवदंपति को तोहफे देते ब्लाॅक प्रमुख और बीडीओ उमर्दा।

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