"कहीं कुचला जा रहा है गाड़ी के नीचे, कहीं खाद के लिए इस तरह मर रहा है किसान" बुंदेलखंड में प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार को घेरा

खाद संकट और खाद के लिए किसानों की मौत के बाद सियासत गरम है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 29 अक्टूबर को ललितपुर पहुंची और मृतक किसान के परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने यूपी सरकार पर निशाना भी साधा।

Arvind Singh ParmarArvind Singh Parmar   29 Oct 2021 12:29 PM GMT

ललितपुर (बुंदेलखंड)। डीएपी, एनपीके जैसी रासायनिक खादों की किल्लत और खाद के चलते किसानों की मौत को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका ने कहा कि 4 में से इसमें से दो लोगों ने आत्महत्या की है, दो लोगों की दिन में खड़े-खड़े मृत्यु हुई है।" कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ललितपुर में कहा कि किसान कहीं गाड़ी के नीचे कुचला जा रहा है कहीं वो खाद के लिए लाइन में लगे-लगे मर रहा है।"

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 27 अक्टूबर को खाद के लिए जान गंवाने वाले किसान बल्लू पाल (45वर्ष) के परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए खाद संकट को लेकर सरकार और अधिकारियों को घेरा। उन्होंने कहा किसान बिना खाए पिए दिन-दिनभर लाइन में लग रहे हैं।

प्रियंका गांधी शुक्रवार सुबह ट्रेन से ललितपुर पहुंची थीं। जनपद मुख्यालय के सरकारी गेस्ट हाऊस में कुछ देर रुकने के बाद वो मृतक किसान बल्लू पाल के गांव पाली पहुंची। पाली गांव जनपद मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर है। प्रियंका करीब एक घंटे तक पीड़ित परिवार के साथ रहीं। इस दौरान वो उन 3 अन्य किसानों के परिजन भी यहीं पहुंचे थे, जिनकी मौत खाद के चलते हुए है।

प्रियंका से बात करते हुए बल्लू पाल की बेटी सविता बेसुध हो गई। प्रियंका गांधी ने न सिर्फ उसे पानी पिलाया बल्कि परिवार को ढांढस भी बंधाया। सविता ने बताया कि उनके परिवार पर 3 लाख रुपए का कर्ज़ है। प्रियंका गांधी ने उसे कांग्रेस पार्टी से आर्थिक मदद देने का भरोसा दिलाया है।

ललितपुर के पाली गांव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी।

बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में पिछले करीब 10-11 दिन से खाद के लिए संकट है। बारिश के बाद किसान जल्द से जल्द अपना खेत बोना चाहते हैं लेकिन डीएपी, एनपीके नहीं मिला पा रही है। खाद के लिए अब तक जिले में 4 लोगों की जान जा चुकी है। सहकारी समितियों से लेकर निजी दुकानों तक लंबी-लंबी लाइन लग रही है। हंगामा हो रहा है। ललितपुर में खाद संकट का मामला सबसे पहले 22 अक्टूबर को उस वक्त सुर्खियों में आया जब 2 दिन से कतार में खड़े किसान भोगीलाल (55वर्ष) बेहोश होकर गिए गए। आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इससे पहले 25 अक्टूबर को खाद की लाइन में लगे-लगे एक और किसान महेश बुनकर के साथ भी ऐसा ही चुका है। 26 अक्टूबर को ही मैलवारा गांव के किसान सोनी अहिरवार (40वर्ष) ने फांसी लगाकर जान दे दी। वहीं बल्लू पाल ने ने फांसी लगा ली। हालांकि जिला प्रशासन ने सोनी अहिरवार के फांसी लगाने के कारण को खाद नहीं माना था।

अब तक 4 किसानों की मौत

1-नया गांव के किसान भोगीपाल (55वर्ष) की 22 अक्टूबर को मौत, लाइन में लगे लगे बेहोश हुए थे, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

2-कोतवाली सदर क्षेत्र के मैलवारा खुर्द निवासी सोनी अहिरवार (40) ने 25 अक्टूबर को फांसी लगाई, प्रशासन ने आत्महत्या की वजह खाद नहीं माना

3-थाना नाराहट के ग्राम बनयाना निवासी महेश बुनकर (30वर्ष) की 26 अक्टूबर को मौत, लाइन में लगे रहने के बेहोश होकर गिरे थे।

4-वहीं पाली के किसान बल्लू पाल ने 26 तारीख की रात में फांसी लगाकर जान दे दी, 4 दिन में लाइन मेंल गे थे।

पीड़ित परिवारों से मुलाकात करती प्रियंका गांधी।

सरकार के मुताबिक पर्याप्त खाद

रबी सीजन की बुवाई से पहले खाद की किल्लत और उपलब्धता को लेकर कहा कि प्रदेश में पर्याप्त खाद है। जिन जिलों में पर्याप्त खाद है वहां तुरंत उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा, 27 अक्टूबर तक प्रदेश में रबी सीजन 2021 के लिए 3.36 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 1.91 लाख मीट्रिक टन एनपीके और कुल 5.27 लाख मीट्रिक टन फास्फेट खाद की उपलब्ध है। आगामी 10 नवम्बर, 2021 तक 3 लाख मीट्रिक डीएपी एवं 0.50 लाख मीट्रिक टन एनपीके की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया गया है।

खाद की किल्लत को देखते हुए ललितपुर में टोकन सिस्टम जारी किया गया है। बावजूद इसके किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। किसान कालाबाजारी से भी परेशान हैं। प्रियंका ने इसे अधिकारी और नेताओं की साठगांठ बताय़ा।

लखीमपुर हिंसा लेकर प्रियंका गांधी ने कहा, "आप जानते हैं किसान सड़क पर आ गया हैं महीनों से सड़क पर हैं कहीं भी इसकी सुनवाई नहीं हैं। कहीं कुचला जा रहा हैं गाड़ी के नीचे कहीं इस तरह की मर रहा है।"

ललितपुर में 18 अक्टूबर को हुई बारिश को किसान रबी सीजन के लिए वरदान मान रहे थे, क्योंकि उन्हें बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं मिल रही थी, खेत का पलेवा करने की जरुरत नहीं, डीजल और बिजली बचेगी। लेकिन खाद की किल्लत से किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। प्रियंका ने कहा कि किसान कह रहे हैं भगवान की देन थी कि हमारे खेतों में पानी आया। उसके बाद कम से कम हमें खाद तो दिलवा देते। सब कर्ज में हैं, बेचारों खाद नहीं मिल रही हैं। ललितपुर की यात्रा के दौरान प्रियंका ने आते जाते सैकड़ों छुट्टा पशु सड़क पर देखे। जिस पर कहा कि आप किसान बता रहे थे कि वो पूरी-पूरी रात खेतों में बैठे रहते है।

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