यूपी के सैकड़ों प्राथमिक स्कूल हुए अंग्रेजी माध्यम

यूपी के सैकड़ों प्राथमिक स्कूल हुए अंग्रेजी माध्यमपीएस दंदाैराखुर्द में बच्चों को मिलती है अंग्रेजी की शिक्षा।

कन्नौज/बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के सैकड़ों प्राथमिक स्कूलों में अब पूरी तरह से अंग्रेजी की शिक्षा दी जाएगी। प्रधानाध्यापकों की तैनाती हो चुकी है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों की तैनाती भी हो रही है।
पहली अप्रैल 2018 से शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र से यूपी के हर विकास खंड क्षेत्र से ऐसे पांच-पांच प्राथमिक विद्यालयों का चयन किया जा चुका है, जहां अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा मिलेगी। सारी सुविधाएं भी नि:शुल्क मिलेगी।
यूपी की राजधानी लखनऊ से करीब 170 किमी दूर कन्नौज जिले के तहसील तिर्वा क्षेत्र के झबरा निवासी 45 साल के छविनाथ राजपूत बताते हैं, ‘‘मेरे गांव के आसपास कोई ऐसा स्कूल नहीं था, अब गांव के स्कूल में ही अंग्रेजी में पढ़ाई होगी तो मेरा बच्चा भी अच्छे से पढ़ पाएगा। पहले तिर्वा जाता था, जो 5 किलोमीटर दूर था।”
ब्लाॅक उमर्दा क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल झबरा के प्रधानाध्यापक मिथलेश राजपूत ने बताया कि ‘‘बच्चों में पढ़ने की ललक बहुत है। शुरू से ही अंग्रेजी पैटर्न में तैयार करता था। विद्यालय में बच्चे अच्छे हैं। मुझे बहुत खुशी है कि मेरा विद्यालय भी अंग्रेजी मीडियम में चयनित हुआ है।’’
प्रधानाध्यापक ने आगे बताया कि ‘‘जो भी सुविधाएं होंगी वह बहुत अच्छी होंगी। पांच टीचर रहेंगे, वह भी अंग्रेजी मीडियम के। बच्चे और अभिभावक भी बहुत खुष हैं। हम लोग मिलकर अच्छा करेंगे। बहुत सारे बच्चे अंग्रेजी मीडियम स्कूल से वापस आ रहे हैं। उनके पैसे भी जा रहे थे और पढ़ाई भी नहीं होती थी। अभिभावक पूर्णतया संतुष्ट हैं उन्होंने तारीफ भी की है।’’


झबरा गांव की ही निवासी 40 साल की नीलम बताती हैं ‘‘मेरी एक बेटी शुभी राजपूत को तिर्वा अंग्रेजी मीडियम में भेजा था। फीस की वजह से नहीं पढ़ा पाए। गांव के ही सरकारी अंग्रेजी मीडियम स्कूल में एडमीशन कराया है।’’
कक्षा चार की छात्रा प्रांशी ने बताया कि ‘‘मुझे बहुत खुशी है कि मेरा स्कूल अंग्रेजी मीडियम हो गया है। मैं भी अंग्रेजी पढूंगी।’’
प्राथमिक विद्यालय दंदौरा खुर्द के प्रधानाध्यापक अमित मिश्र ने बताया कि ‘‘कन्नौज सदर ब्लाॅक क्षेत्र में पांच विद्यालयों का चयन किया गया है। हर विद्यालय में हेडटीचर होगा। फोर असिस्टेंट टीचर रहेंगे। जिन विद्यालयों में शिक्षामित्र है वो बने रहेंगे। जिन विद्यालयों के टीचर ने अप्लाई किया है और अंग्रेजी मीडियम में आ गए हैं वह बने रहेंगे। जिन्होंने अप्लाई नहीं किया या नहीं आए उनको अंग्रेजी मीडियम स्कूल से हटना पड़ेगा। डायट में ट्रेनिंग भी हो चुकी है, अप्वाइंटमेंट लेटर भी मिल गए हैं।’’

ये सरकारी स्कूल बन गया है अंग्रेजी मीडियम


रसोइया कुंती बताती हैं कि ‘‘मेरा एक बच्चा पढ़ रहा है। हमारे बच्चे अच्छे से पढेंगे। बच्चे आगे बढेंगे। हमारे सर भी अच्छे हैं। स्कूल उन्नत करेगा। हमको बहुत अच्छा लग रहा।’’ कक्षा पांच के छात्र दीप सिंह ने बताया कि ‘‘हमारे यहां अंग्रेजी तो पढ़ाई जाती थी लेकिन अब और अच्छी पढ़ाई जाएगी। अंग्रेजी में शिक्षा पाकर मैं पुलिस बनना चाहता हूं।

बाराबंकी जिले के विकास खंड हरख स्थित इग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल गुलरिहा के प्रधानाध्यापक सुशील कुमार बताते हैं, ‘‘सुविधाएं वही मिलेंगी जो पहले थीं, माध्यम अंग्रेजी हो जाएगा। हमारे यहां 140 बच्चों का नामांकन है, आगे भी चलता रहेगा। गरीब बच्चे जो अंग्रेजी मीडियम स्कूल में नहीं जा सकते थे, उनको फायदा होगा। साथ ही अच्छे घरों के बच्चे जो प्राइवेट में जाते हैं, उनको भी फीस नहीं खर्च करनी पडे़गी।

‘‘जिले में 45 परिषदीय स्कूलों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए चयनित किया गया है। सभी में प्रधानाध्यापक भेजे जा चुके हैं। कुछ अध्यापक भी भेजे जा चुके हैं। ग्रामीण परिवेश के बच्चे कक्षा एक से अंग्रेजी पढे़ंगे। आगे चलकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा रिजल्ट देंगे। काफी बच्चों को लाभ मिलेगा।’’
रवीन्द्र कुमार, जिलाधिकारी- कन्नौज

फ्री में अंग्रेजी की बुकें भी मिलेंगी।’’ बीएसए बाराबंकी पीएन सिंह बताते हैं कि ‘‘जिले में 80 विद्यालयों का चयन हो चुका है। प्रवेष की कोई लिमिट नहीं है, जो भी बच्चा आएगा उसका प्रवेश लिया जाएगा। बहुत ही अच्छी और सार्थक पहल है। 158 शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। कुछ शिक्षक बचे हैं, उसकी विज्ञप्ति भी प्रकाषित की जा चुकी है।’’
उन्होंने आगे बताया कि ‘‘दूरदराज इलाकों में प्राइवेट स्कूल भी नहीं हैं, ऐसे में ग्रामीण बच्चों को भी अच्छा लाभ मिलेगा।’’

अच्छा करने वाले शिक्षकों ने लगाया स्टाल।

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