किसी ने गहने गिरवीं रख तो किसी ने भैंस बेचकर बोई थी फसल, बारिश ने किया बर्बाद लेकिन मुआवजे की गुंजाइश नहीं

यूपी में अतिवृष्टि ने हजारों किसानों को बर्बाद किया है। कन्नौज में भी किसानों की फसलों का भारी नुकसान हुआ लेकिन प्रशासन का कहना है कि नुकसान 33 फीसदी से कम है, इसलिए मुआवजे की गुंजाइश नहीं है।

Ajay MishraAjay Mishra   27 Sep 2021 2:04 PM GMT

कन्नौज (उत्तर प्रदेश)। नन्हेलाल ने भैंस बेचकर 15 दिन पहले अगेती आलू की बुवाई की थी। लेकिन भारी बारिश में सब सड़ गया। उनका करीब 20 हजार का नुकसान हुआ है। बारिश में घर भी गिर गया है। महिला किसान मंजू देवी ने सुनार के यहां से 10 रुपए सैकड़ा पर 40 हजार रुपए लेकर मक्का और गोभी बोई थी लेकिन सभी फसलें बर्बाद हो गईं।

"10-12 दिन से रोज बारिश हो रही है। 8 बीघा (2 एकड़ से कम) मकई नाले में बह गई। एक बीघा गोभी और मूंगफली भी बेकार हो गई। ब्याज पर रुपया लिया था। सुनार के पास जेवर रखा था।" पानी में डूबे अपने मक्के के खेत के बाहर खड़ी मंजू देवी (40 वर्ष) बताती हैं।

लोन कैसे चुकाएंगी? इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं? आप खुद खेत देख लो और फिर बताओ कैसे चुकाएंगे, कोई अधिकारी तो देखने आया नहीं है।"

भारी बारिश के बाद पानी में डूबी मक्के की फसल से बालियां निकालती महिला। फोटो- अजय मिश्रा

मंजू देवी उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के तिघरा गांव में रहती हैं। ये गांव तिर्वा ब्लॉक में आता है। कन्नौज में 16-17 सितंबर की 30-32 घंटे की लगातार बारिश के बाद इधर पिछले 10-12 दिनों से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। जिसमें बची खुची फसलें भी जा रही हैं। किसानों के मुताबिक अगेती आलू, मक्का, धान, मूंगफली और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार ने नुकसान का आंकलन कर फसल बीमा या मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। लेकिन इन्हें मुआवजा मिलने की गुंजाइश काफी कम हैं, क्योंकि सरकारी आंकड़ों में यहां नुकसान "उतना" नहीं है। भारतीय मौसम विभाग के आंकडों के अनुसार 1 सितंबर से 27 सितंबर तक कन्नौज जिले में 148.4 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 312.4 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य से 110 फीसदी ज्यादा है।

16-17 सितंबर में प्रदेश में हुई भीषण बारिश के दौरान कन्नौज में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया था। उस दौरान यहां करीब 32 घंटे लगातार बारिश हुई थी। प्रदेश के कई दूसरे हिस्सों में नुकसान के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने सभी जिलों में नुकसान के आंकलन के आदेश दिए थे।

33 फीसदी से कम नुकसान पर नहीं मिलता मुआवजा- प्रशासन

कन्नौज के एडीएम गजेंद्र कुमार गांव कनेक्शन को बताते हैं, "शासन से आंकलन के लिए आदेश आया था। रिपोर्ट जल्द भेज दी जाएगी। वास्तव में मुआवजा वहां अनुमान्य होता है जहां 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान है। इससे कम में नहीं मिलता है। अपने यहां नुकसान नहीं है। अगर किसी इलाके में ज्यादा बारिश आपको नजर आएगी तो हम जांच कराएंगे।"

जिला कृषि उपनिदेशक आरएन सिंह गांव कनेक्शन को बताते हैं, "हमारे यहां (कन्नौज) ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। हमारे पास अभी तक किसी किसान ने शिकायत नहीं की है कि उनके यहां ज्यादा नुकसान हुआ और बीमा दिलाया जाए। अगर किसी किसान के यहां नुकसान हुआ है तो वो 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी या कृषि निदेशक कार्यालय में संपर्क करे।"

जिला प्रशासन के आंकड़ों और नुकसान के पैरामीटर में कन्नौज के किसान भले मुआवजे के हकदार न हो लेकिन पहले अतिवृष्टि फिर 10-11 दिनों से जारी रिमझिम बारिश के सिलसिले से हजारों किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। कहीं फसल डूब गई है तो कहीं सड़ रही हैं। मवेशी बिक्री कर, ब्याज पर रुपए लेकर और गहने गिरवीं रखकर फसल बोई थी, जो मिट्टी में ही मिल गई।

48 साल के किसान नन्हेलाल का बरसात से घर गिर गया है। 15 दिन पहले आलू बोए थे वो खेत में उगने से पहले सड़ गए। नन्हेलाल बताते हैं, "आलू में करीब 20 हजार का नुकसान हुआ है। भैंस बेचकर आलू बोए थे। हमारे गांव में करीब 33 फीसदी किसानों ने आलू बो दिया था, किसी की फसल बचेगी नहीं।"

नन्हें के मुताबिक लेखपाल को फोन किया था, एक दो दिन में आने को बोला है। नन्हें बाहर काम करते हैं लेकिन अब वो जा भी नहीं पाएंगे।

लगातार बारिश के चलते कई गांवों में लोगों के कच्चे मकान भी गिर गए हैं।

कन्नौज से 18 किलोमीटर दूर मनीपुरवा के राजीव कुमार परिवार के साथ पानी में डूबी मक्के की फसल से एक एक भुट्टा निकालकर बाहर रख रहे थे। वो बताते हैं, "लगातार भारी बारिश हो रही है। धान की फसल डूब गई है। मक्का पहले हरा थी लेकिन पानी के चलते सूख कर गिर गया है। अब किसी तरह इसे निकाल रहे हैं। बहुत नुकसान हो गया है।"

कन्नौज को आलू का गढ़ कहा जाता है। यहां करीब 48 हजार से 50 हजार हेक्टेयर रकबे में आलू की पैदावार होती है। अगेती व पक्की दोनों ही तरह की फसल होती हैं। जिला उद्यान अधिकारी के मुताबिक खरीफ सीजन में जनपद में करीब 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का और 22 हजार हेक्टेयर रकबा में धान की फसल है।

मक्के की फसल

बुवाई के इंतजार में घर में सड़ रहा आलू

बहुत सारे किसान आलू बुवाई के लिए कोल्ड स्टोरेज से आलू निकाल लाए थे लेकिन खराब मौसम के चलते बुवाई का मौका नहीं मिल रहा है। पहले बोया गया आलू तो खेत में सड़ा तो बुवाई के इंतजार में रखा आलू घर में सड़ रहा है।

39 वर्षीय किसान राकेश कुमार बताते हैं, "बरसात दमभर हो रही है। गोभी सब खराब हो गई है। खेतों में खड़े मक्का के पौधों में पानी भरने की वजह से गिर गई है। करीब 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।'

वो आगे बताते हैं, "आगे आलू बोने की सोच रहे हैं, लेकिन मौसम न खुलने की वजह से बीज भी खराब हो रहा है।'

तिघरा गांव की किसान सुषमा की चार बेटियां और एक बेटा है। शनिवार को हुई बारिश में उनका घर गिर गया। सुषमा कहती हैं, "खेती का एक दाना भी नहीं बचा। मूंगफली डेढ़ बीघा में खड़ी थी, जो बरसात में चली गई। खेती में करीब 50 हजार का नुकसान हुआ है। गेहूं बिक्री कर फसल बोई थी। आलू रखे हैं गाढ़ने (बुवाई) को लेकिन खाद-बीज का रुपया नहीं है। करीब 40 पैकेट आलू का बीज काफी दिनों से रखा है।'

किसान भजनलाल एक और गंभीर समस्या की तरफ इशारा करते हैं। सिर्फ हम लोगों को ही नहीं लगातार बारिश से जानवरों के लिए चारा और बांधने की दिक्कत हो रही है। खेत खाली पड़े हैं लेकिन आलू बो नहीं पा रहे हैं। बराबर बारिश से बहुत नुकसान हुआ है।"

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