गन्ना किसानों के घर टली शादियां, नहीं करा पा रहे इलाज, कब होगा भुगतान ?

गन्ना किसानों के घर टली शादियां, नहीं करा पा रहे इलाज, कब होगा भुगतान ?पैसा न मिलने से परेशान हैं यूपी के किसान। फोटो अभिषेक वर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट लखीमपुर खीरी के गुलरिया गाँव के किसान मेंहदी ने गोविंद शुगर मिल, ऐरा को जनवरी में दो ट्राली गन्ना दिया था, जिसकी कीमत करीब 50,550 रुपए है। अचानक मेंहदी की तबियत खराब हो गई, गन्ना भुगतान के संबंध में उन्होंने चीनी मिल को प्रार्थना पत्र भी दिया कि भुगतान हो जाए जिससे इलाज हो जाए। लेकिन किसान को भुगतान नहीं हो पाया, परिजन उन्हें लेकर ट्रामा सेंटर लखनऊ ले गए जहां पर 25 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

लखीमपुर जिले के ही किसान सुभ्रांत शुक्ला ने अब तक चीनी मिल को आठ से नौ हजार कुंतल गन्ना दे दिया है, जिसका उन्हें मिल 24-25 लाख रुपए का भुगतान करेगी, लेकिन 27 दिसम्बर से उनको पेमेंट ही नहीं हुआ।

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ये तो बस उदाहरण है, एेसे ही हजारों किसान हैं, जिन्होंंने चीनी मिलों को गन्ना तो दिया, लेकिन दो-तीन महीने बीत जाने के बाद भी भुुगतान नहीं हो पाया, एेसे में कोई किसान अपनी बेटी की शादी की डेट आगे बढ़ा रहा है, तो कोई अपना इलाज नहीं करा पा रहा है।

उत्तर प्रदेश में 33 लाख गन्ना किसान हैं।

शुभ्रांत शुक्ला बताते हैं, "ज्यादातर चीनी मिलों का यही हाल है, सरकार ने अपने घोषणा पत्र में लिखा था कि 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन चार महीने बीत गए लेकिन हमें भुगतान नहीं किया गया। पिछली सरकार में अलग-अलग नियम थे, बसपा की सरकार थी तो चीनी मिल के खिलाफ एफआईआर तक हो जाता था, नहीं तो मिल की चीनी सीज कर दी जाती थी। सपा सरकार में भी यही था अगर गन्ने का दाम 290 रुपए है तो 240 रुपए मिल जाते थे, बाकी का बाद में मिलता था।"

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किसानों का पैसा दबाने वाली शुगर मिलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी को चेतावनी दी गई है। ताकि किसानों को पैसा मिल सके।
सुरेश राणा, गन्ना मंत्री, उत्तर प्रदेश

मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में पश्चिमी यूपी को गन्ने का गढ माना जाता है। यहां के किसान अपनी कुल जमीन के 80 फीसदी भूभाग पर गन्ने की खेती करते हैं। गन्ना किसानों के यहां हर आयोजन गन्ने के पैमेंट पर निर्भर रहता है। सरकार की घोषणाओं के चलते इस बार किसानों ने गन्ने की खेती में 20 फीसदी तक इजाफा किया था, लेकिन मिलों ने सभी अरमानों पर पानी फेर दिया। ये सिर्फ लखीमपुर ज़िले के किसानों की परेशानी नहीं है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का भी यही हाल है।

प्रदेश में कुल 119 चीनी मिले हैं, पिछले सत्र की तुलना में लगभग 20 दिन पहले पेराई शुरू हो गई, जिसका फायदा शुगर मिलों ने तो जमकर उठाया, लेकिन बेचारा किसान अब ऐसा ही है जैसा अन्य सरकारों में था। पिछले सत्र में मिल प्रबंधन भुगतान को लेकर लेट सत्र शुरू होने का बहाना करता रहता थाए लेकिन इस बार जहां अगेती प्रजाति से चीनी उत्पादन अच्छा मिल रहा है, वहीं बाजार में चीनी के दाम भी अच्छे हैं। इसके अलावा सरकार ने भी 14 दिन में किसानों के खाते में पैसा देने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद भी किसानों का पैसा समय से नहीं मिल रहा है।

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मेरठ ज़िले के गाँव सीकरी के किसान जोगिन्द्र बताते हैं, "मिल चले एक माह बीत गया। पहले दिन से ही मैं पर्ची डाल रहा हूं, शुरूआती दौर में तो 14 दिन में पेमेंट हुआ, लेकिन अब तो पिछले दो माह से कोई पैसा ही नहीं आया, जिसके चलते बहन की शादी भी अगले साल करने का मन बनाया है।"

ज्यादातर चीनी मिलों का यही हाल है, सरकार ने अपने घोषणा पत्र में लिखा था कि 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन चार महीने बीत गए लेकिन हमें भुगतान नहीं किया गया।
शुभ्रांत शुक्ला, किसान, लखीमपुर

2015-16 के अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, क्योंकि यह अनुमानित 145.39 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन करता है, जो अखिल भारतीय उत्पादन का 41.28 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल 2.17 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में बोई जाती है, जो कि अखिल भारतीय गन्ने की खेती का 43.79 प्रतिशत हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश को चीनी और गुड़ खिलाने वाले उत्तर प्रदेश में 33 लाख गन्ना किसान हैं।

सुभ्रांत शुक्ला आगे बताते हैं, "अभी पिछले दिनों लखीमपुर की प्रभारी मंत्री गुलाबो देवी आयी तो किसानों ने उनसे भुगतान की बात की तो उन्होंने कहा मुझे ऐसी जानकारी नहीं है। योगी जी को जो दिखाया जाता है वो अधिकारियों की नजर से दिखाया जाता है, किसानों तक तो वो पहुंच ही नहीं पाते हैं। हम लोग जो लोन लेते हैं अगर पेमेंट आ जाता है तो उसी में से लोन भी कट जाता है, बुवाई, कटाई, छिलाई की मजदूरी भी उसी से दी जाती है। कितने लोगों को उसी पैसे से अपनी बेटी की शादी करनी है, बीमारी का इलाज कराना है, बच्चों की फीस देनी है। सरकार के क्या किसानों की आत्महत्या करने का इंतजार कर रही है।

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मिल्स प्रबंधन को एस्क्रो एकाउंट में चीनी से मिलने वाला पैसा जमा करने के लिए कहा गया है। इसके लिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों को सर्कुलर के माध्यम से सूचित कर दिया गया है। जिस भी मिल पर ज्यादा पैसा है, एस्क्रो एकाउंट के माध्यम से किसानों को पैसा दिलाया जाएगा। साथ ही सभी सरकारी मिल टाइम पर भुगतान कर रही हैं।
संजय आर. भुसरेड्डी, गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश

दौसा गाँव के बले सिंह (57 वर्ष) बताते हैं, "नई सरकार आने से एक आस जगी थी कि अब मिल जल्दी भुगतान कर देंगी। इसी आस के चलते काम फिक्स किए थे, लेकिन मिल से फिर से पुराने रवैया अपना रही हैं। जिससे शादी, मकान सहित अन्य काम पेंडिग हो गए हैं।

यूपी में ये किसानों के बकाए का आंकड़ा 3400 करोड़ के पार है। सहकारी मिलों पर यह आंकड़ा 373 करोड़ है। चीनी मिलों के संगठन इस्मा के मुताबिक देश में चीनी उत्पादन अब तक के रिकार्ड स्तर 2.99 करोड़ टन तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा 15 अप्रैल तक का है। गन्ना उत्पादन बढ़ने से यह स्थिति बनी है, जिससे की गन्ना किसानों का बकाया 20000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

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ट्वीट के जरिए ने गिनाई गन्ना विभाग की उपलब्धियां

सत्र 2017-18 में गन्ना खरीद के बारे में सीएमओ ने एक ट्वीट किया है, जिसके अनुसार अब 97.80 करोड़ कुंतल गन्ने की खरीद हुई है, जिसमें से 97.73 करोड़ कुंतल गन्ने की हुई पेराई। प्रदेश में कुल 119 चीनी हैं। प्रदेश में 43 चीनी मिलों ने अब तक एक करोड़ कुंतल गन्ने की पेराई कर चुकी है। 14 चीनी मिलों ने पेराई सत्र का समापन कर लिया है, 105 चीनी मिलें अभी भी पेराई कर रही हैं।

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गन्ना भुगतान न मिलने से एक किसान की इलाज के आभाव से मौत

लखीमपुर खीरी के गुलरिया गाँव के किसान मेंहदी ने गोविंद शुगर मिल ऐरा को जनवरी में दो ट्राली गन्ना दिया था, जिसकी कीमत 50,550 रुपए है। अचानक मेंहदी की तबियत खराब हो गई, गन्ना भुगतान के संबंध में उन्होंने चीनी मिल को प्रार्थना पत्र भी दिया कि भुगतान हो जाए जिससे इलाज हो जाए। लेकिन किसान को भुगतान नहीं हो पाया, परिजन उन्हें लेकर ट्रामा सेंटर लखनऊ ले गए जहां पर 25 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

इलाज के लिए किसान ने लिखा था प्रार्थना पत्र

मेंहदी के भाई बब्बू कहते हैं, "हम लोगों ने जब गन्ना मिल को प्रार्थना पत्र दिया तो उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ शादियों के लिए पैसे दिए जाते हैं, पैसे होने से मेरे भाई की मौत हो गई।"

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