यूपी : अब मृदा स्वास्थ्य कार्ड देखकर गन्ना किसानों को मिलेगा उर्वरक   

यूपी : अब मृदा स्वास्थ्य कार्ड देखकर गन्ना किसानों को मिलेगा उर्वरक   फरवरी से मार्च तक गन्ना बुवाई के लिए सही समय होता है।

लखनऊ। प्रदेश में गन्ने की खेती की लागत में कमी और उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग में कमी लाने के लिए अब विभाग किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देखकर उर्वरक देगा। ऐसे में पोषक तत्वों के ज्यादा मात्रा में उपयोग पर रोक लगेगी।

गन्ना आयुक्त, यूपी संजय आर. भूसरेड्डी ने गन्ना विभाग में संचालित विकास योजनाओं के एनपीके वितरण को मृदा स्वास्थ्य कार्ड से लिंक किया जाना आवश्यक कर दिया है।

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आयुक्त ने इस बारे में समस्त क्षेत्रीय उप गन्ना आयुक्तों और जिला गन्ना अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड की रिपोर्ट के आधार पर ही आवश्यक तत्वों की मात्रा के अनुपात में गन्ना किसानों को पोषक तत्वों का वितरण सुनिश्चित किया जाए और एनपीके का अनावश्यक रूप से वितरण पर संबंधित अधिकारी का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा और संबंधित के विरूद्व कार्रवाई भी अमल में लायी जायेगी।

उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल 2.17 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में बोई जाती है, जो कि अखिल भारतीय गन्ने की खेती का 43.79 प्रतिशत हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश को चीनी और गुड़ खिलाने वाले उत्तर प्रदेश में 33 लाख गन्ना किसान हैं।

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भूसरेड्डी ने बताया, "अब विभाग में गन्ना समितियों/गन्ना विकास परिषदों के माध्यम से वितरित होने वाले एनपीके के वितरण को स्वायल हेल्थ कार्ड से लिंक किये जाने से न सिर्फ गन्ना किसानों की खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि गन्ने की उत्पादकता के साथ चीनी परता में भी वृद्धि होगी।"

उन्होंने आगे कहा कि इस उद्देश्य के लिये प्रदेश की सहकारी और निजी क्षेत्र की चीनी मिलों में स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिये प्रतिदिन मृदा परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है और इस महत्वपूर्ण काम में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर की शाहजहांपुर व कुशीनगर इकाई की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को भी शामिल किया गया है।

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उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर की इकाईयों और चीनी मिलों में स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिये मृदा परीक्षण का दैनिक लक्ष्य 50 से 60 नियत किया गया है, इन प्रयोगशालाओं के लिए मृदा परीक्षण का मासिक लक्ष्य 1500 से 1800 तक और वार्षिक लक्ष्य 18000 से 21600 तक निर्धारित है।

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