बाज़ार भाव आंककर किसान उगाएंगे फसलें

बाज़ार भाव आंककर किसान उगाएंगे फसलें

सीतापुर। किसान को अगर अपने उत्पाद का सही मंडी भाव पता चल जाए तो उसकी काफी दिक्कतें अपने आप खत्म हो सकती हैं। किसान को बाज़ार में अच्छा भाव दिलाने के उद्देश्य से सीतापुर के कृषि विज्ञान केंद्र में किसान को बाज़ार भाव आंकने की ट्रेनिंग दी गई। 

ट्रेनिंग में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ शैलेंद्र सिंह ने किसानों को बाजार में अपने उत्पादन की मांग और आपूर्ति को भांपने के गुर सिखाए। ''अगर किसान यह भांप सके कि किस समय बाजार में मौजूद उत्पाद का दाम बढ़ा हुआ है तो ऐसे समय में वे अपना उत्पादन बाज़ार में ले जाकर अच्छा दाम पा सकते हैं", डॉ सिंह ने बताया। 

ट्रेनिंग का आयोजन सीतापुर कृषि विज्ञान केद्र, कृषि उत्पादों के बाज़ार पर नज़र रखने वाली राष्ट्रीय संस्था मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और फ्लोरा एडं फ्रेगरेंस डेवलपमेंट के सहयोग से किया गया। 

ठीक इसी अवधारण को राष्ट्रीय स्वरूप देते हुए केंद्र सरकार ने एक ऑनलाइन कृषि बाज़ार की स्थापना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। इस योजना के तहत अगले तीन वर्षों में देश की लगभग 600 मण्डियों को ऑनलाइन किया जाएगा, ताकि किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर भाव पता चल सके। इस योजना के साकार होने के बाद किसान अपने उत्पाद को अन्य राज्यों की मण्डियों में भी बेचने को स्वतंत्र होगा।

फूलगोभी का उदाहरण देते हुए डॉ सिंह ने किसानों को समझाया, ''जब गोभी का सीजन शुरू होता है तो छोटी गोभी की कीमत किसान को 20 रुपए मिल जाती है, लेकिन जब सीजन पीक पर होता है तो बड़े आकार की गोभी के भी पांच-दस रुपए से ज्यादा नहीं मिलते। जब बाज़ार में मांग ज्यादा होती है तो उत्पादक को अच्छा भाव मिलता है।"

अभी किसान अपना उत्पाद लेकर सीधे गल्ला या खुली मंडियों में जाते हैं, जहां आढ़तियों के तय भाव पर किसान अपना उत्पाद बेचने को मजबूर होते हैं। सीतापुर जि़ले के परसेंडी ब्लॉक में बसे भवाना गाँव के किसान अजय सिंह यादव (49 वर्ष) प्रशिक्षण सत्र में शामिल हुए, उन्होंने कहा, ''अकसर हमारे साथ यही होता है कि हमें अगली फसल के लिए पैसे की ज़रुरत होती है लेकिन बाजार में कम भाव मिलने से पैसा पूरा ही नहीं पड़ता।"

ट्रेनिंग में बताया गया कि अगर किसान अपनी फसल को सीज़न की शुरुआत या खत्म होने पर बाजार में लाता है तो उसे कुछ ज्यादा भाव मिल सकता है। इस बारे में कार्यक्रम के आयोजक शिव शुक्ला ने बताया, ''हम चाहते हैं कि किसान इस तरह की जानकारियों से अपने उत्पाद का दाम बाजार से सामान्य से 50 से 100 रुपए प्रति कुंतल ज्यादा कमा ले। यह सुनने में शायद ज्यादा न लगे लेकिन इससे उसकी कई मुश्किलें आसान हो जाएंगी।"

देश में पहले भी कई ऐसे प्रयास किए जा चुके हैं, जिनसे किसान और खरीदार को आमने-सामने लाया जा सके। इन प्रयासों में ई-मंडी और एगमार्कनेट जैसे पोर्टल शामिल हैं। लेकिन इनसे किसान को कुछ खास फायदा नहीं मिल पाया है। 

बाज़ार भाव के मूल्य का पता चलने के बाद किसान अपनी फसल की खेती या तो तय समय से पहले या देरी से करके अपना उत्पाद बाजार में सीजन के शुरूआत या आखिर में उतारने का बेहतर प्रबंधन कर सकता है।

''ज्यादातर छोटे और मंझोले किसानों को अत:फसली खेती और कई फसलों की एक साथ खेती करने की जरुरत है। ताकि वह किसी एक फसल के बिकने के इंतजार में न बैठे रहें। जैसे अगर वह गन्ने या केले जैसी लम्बी अवधि की फसल ले रहे हों तो उसमें छोटी अवधि की अंत: फसलें लेते रहें" ट्रेनिंग में प्रशिक्षण दे रहे डॉ दया श्रीवास्तव ने कहा।

डॉ श्रीवास्तव ने आगे कहा, ''इसके साथ वह ऐसी तकनीकों को भी अपनाएं, जिससे समय बचाया जा सके, जैसे धान में डायरेक्ट सींडिग तकनीक जिसमें सीधा धान के बीज की बुआई कर देनी होती है, इससे 15 दिन फसल में बचाए जा सकते हैं। टनल पॉलीहाउस भी अच्छी तकनीक है जिससे मौसम शुरू होने से थोड़ा पहले ही नर्सरी तैयार की जा सकती है।"

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