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Abhishek Verma

GUEST

Abhishek Verma

    'अब माँग कर नहीं मेहनत से सम्मान की रोटी खाते हैं'
    'अब माँग कर नहीं मेहनत से सम्मान की रोटी खाते हैं'

    By Abhishek Verma

    कभी रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और मँदिरों की सीढ़ियों पर बैठे भीख माँगने वाले ख़ुद का रोज़गार शुरूकर समाज में सम्मान की ज़िंदगी जी रहे हैं। लेकिन इन लोगों की ज़िंदगी में ये बदलाव इतनी आसानी से नहीं आया।

    कभी रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और मँदिरों की सीढ़ियों पर बैठे भीख माँगने वाले ख़ुद का रोज़गार शुरूकर समाज में सम्मान की ज़िंदगी जी रहे हैं। लेकिन इन लोगों की ज़िंदगी में ये बदलाव इतनी आसानी से नहीं आया।

    The Memory Pillars
    The Memory Pillars

    By Abhishek Verma

    Memory pillars are erected on the occasion of the death of a person. It is an age-old tradition going back 3,000 years or more of the Maria and Gond tribes inhabiting Bastar and Dantewada in Chhattisgarh.

    Memory pillars are erected on the occasion of the death of a person. It is an age-old tradition going back 3,000 years or more of the Maria and Gond tribes inhabiting Bastar and Dantewada in Chhattisgarh.

    Photo Feature: In the tribal heartland of Bastar with the Bison Horn Maria tribe
    Photo Feature: In the tribal heartland of Bastar with the Bison Horn Maria tribe

    By Abhishek Verma

    The Bison Horn Maria tribe is one of the oldest Adivasi communities in central India. Menfolk of this tribe wear traditional headdress made of bison horns, decorated with cowrie shells and bird feathers. Women, too, wear headbands made of cowrie shells and a lot of silver jewellery.

    The Bison Horn Maria tribe is one of the oldest Adivasi communities in central India. Menfolk of this tribe wear traditional headdress made of bison horns, decorated with cowrie shells and bird feathers. Women, too, wear headbands made of cowrie shells and a lot of silver jewellery.

    मिलिए लखनऊ के पारंपरिक सेवइयां बनाने वाले कारीगरों से
    मिलिए लखनऊ के पारंपरिक सेवइयां बनाने वाले कारीगरों से

    By Abhishek Verma

    पूरी दुनिया ईद मना रही है और ईद-उल-फित्र का यह त्योहार मीठी सेवइयों के बिना पूरा कैसे हो सकता है, मिलिए लखनऊ के ऐसे ही कुछ कारीगरों से जिनकी वजह आपके घर तक सेवइयां पहुंचती हैं।

    पूरी दुनिया ईद मना रही है और ईद-उल-फित्र का यह त्योहार मीठी सेवइयों के बिना पूरा कैसे हो सकता है, मिलिए लखनऊ के ऐसे ही कुछ कारीगरों से जिनकी वजह आपके घर तक सेवइयां पहुंचती हैं।

    Eid 2022: Meet the traditional sevaiyyan-makers of Lucknow
    Eid 2022: Meet the traditional sevaiyyan-makers of Lucknow

    By Abhishek Verma

    As the world celebrates Eid, an old establishment in Lucknow makes mountains of sevaiyyan that will be carted off to kitchens where it will be the hero of meethi Eid.

    As the world celebrates Eid, an old establishment in Lucknow makes mountains of sevaiyyan that will be carted off to kitchens where it will be the hero of meethi Eid.

    छठ पूजा 2021: देखिए कैसे मनाया गया आस्था का महापर्व
    छठ पूजा 2021: देखिए कैसे मनाया गया आस्था का महापर्व

    By Abhishek Verma

    सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही आस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन हो गया, चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरूआत नहाय खाय से होती है और समापन ऊषा अर्घ्य के साथ होता है।

    सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही आस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन हो गया, चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरूआत नहाय खाय से होती है और समापन ऊषा अर्घ्य के साथ होता है।

    सांपों से जुड़ी ये बातें जो आपको जाननी चाहिए
    सांपों से जुड़ी ये बातें जो आपको जाननी चाहिए

    By Abhishek Verma

    सांपों को लेकर अभी लोगों के अंदर बहुत सी भ्रांतियां हैं, सांप को देखते ही लोग डर जाते हैं, आदित्य तिवारी बता रहे हैं जब सांप दिखे तो क्या करें।

    सांपों को लेकर अभी लोगों के अंदर बहुत सी भ्रांतियां हैं, सांप को देखते ही लोग डर जाते हैं, आदित्य तिवारी बता रहे हैं जब सांप दिखे तो क्या करें।

    बैंड बाजा का काम छोड़कर कोई बेचने लगा है चाय, तो कोई कर रहा है खेत में मजदूरी
    बैंड बाजा का काम छोड़कर कोई बेचने लगा है चाय, तो कोई कर रहा है खेत में मजदूरी

    By Abhishek Verma

    बैंड वाले गांव के नाम से मशहूर इस गाँव की रौनक बिल्कुल गायब है। सैकड़ों लोग बेरोज़गार हो गए हैं। इस गांव का अकेला व्यापार बैंड ही है जो पूरी तरह से बंद पड़ा है।

    बैंड वाले गांव के नाम से मशहूर इस गाँव की रौनक बिल्कुल गायब है। सैकड़ों लोग बेरोज़गार हो गए हैं। इस गांव का अकेला व्यापार बैंड ही है जो पूरी तरह से बंद पड़ा है।

    'तीन महीने से तांगे बंद हैं, हम भी आधा पेट खा रहे हैं और घोड़ों को भी आधा पेट खिला रहे हैं'
    'तीन महीने से तांगे बंद हैं, हम भी आधा पेट खा रहे हैं और घोड़ों को भी आधा पेट खिला रहे हैं'

    By Abhishek Verma

    एक समय था, जब पुराने लखनऊ में तांगे दौड़ते दिखायी देते थे, फिर ई-रिक्शा और ऑटो चलने के के कारण तांगे को सवारी मिलना मुश्किल हो गया, लेकिन लखनऊ आने वाले पर्यटकों की वजह से कुछ कमाई हो जाती थी, लेकिन पिछले तीन महीनों से तांगे ही नहीं चले, अब वो अपना पेट कैसे भरे और कैसे अपने घोड़ों का।

    एक समय था, जब पुराने लखनऊ में तांगे दौड़ते दिखायी देते थे, फिर ई-रिक्शा और ऑटो चलने के के कारण तांगे को सवारी मिलना मुश्किल हो गया, लेकिन लखनऊ आने वाले पर्यटकों की वजह से कुछ कमाई हो जाती थी, लेकिन पिछले तीन महीनों से तांगे ही नहीं चले, अब वो अपना पेट कैसे भरे और कैसे अपने घोड़ों का।

    THEY SURVIVED. NOW WHAT?
    THEY SURVIVED. NOW WHAT?

    By Abhishek Verma

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