कैसे लगा सकते हैं बायोगैस संयंत्र, जानें विधि

Diti BajpaiDiti Bajpai   27 Jan 2018 11:12 AM GMT

कैसे लगा सकते हैं बायोगैस संयंत्र, जानें विधिइस संयंत्र से खाना बनाने के लिए गैस और बिजली भी बना सकते हैं।

अगर आपके पास चार से पांच पशु हैं तो आप आसानी से बायोगैस संयंत्र को लगा सकते हैं। इसको लगाने में ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। इस संयंत्र से खाना बनाने के लिए गैस और बिजली भी बना सकते हैं।

"बायोगैस प्लांट को लगाने के लिए सरकार भी बढ़ावा दे रही है लेकिन अभी किसानों में जागरूकता की कमी है। चार से पांच जानवरों से 50 किलो गोबर आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन किसान इसको लगाते नहीं है। जबकि इस संयंत्र को लगाना काफी आसान है। हरियाणा, पंजाब बायोगैस प्लांट लगाने का सबसे ज्यादा चलन है। वहां के हर छोटे किसान ने इस प्लांट को लगा रखा है। सरकार को इसके लिए प्रचार-प्रसार की जरूरत है, "ऐसा बताते हैं, सीतापुर जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह।

यह भी पढ़ें- गोबर से लाखों का कारोबार करना है तो लगाइए बॉयो सीएनजी बनाने का प्लांट, पूरी जानकारी

दो घनमीटर के बायोगैस संयंत्र में पांच से छह लोगों के दोनों समय का खाना और एक बल्ब चार से पांच घंटे तक आसानी से जलाया जा सकता है। इसके साथ हर साल छह टन उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद प्राप्त की जा सकती है। दो घनमीटर के बायोगैस प्लांट में 50 किलो गोबर और 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इन दोनों को मिलाकर बायोगैस संयंत्र में डाला जाता है। संयंत्र में डाईजेस्टर होता है जो कुंआनुमा आकार का होता है। संयंत्र में ऊपर एक ड्रम होता है जहां गैस इकट्ठा होती है। ड्रम के नीचे लगभग सात से आठ फीट गहरा कुंआ होता है। जहां मिश्रण रहता है।

बायोगैस संयंत्र के पास इनलेट होता है जहां गोबर और पानी का मिश्रण डाला जाता है। यह मिश्रण कुएं में जाता है और लगभग 40 दिनों तक रहता है। पूरी तरह से सड़ने के बाद आउटलेट के माध्यम से जो भी कुछ होता है बाहर निकल जाता है और जो भी गैस बनती है वो लोहे के ड्रम में इकट्ठा हो जाती है। गैस के प्रेशर से यह ड्रम ऊपर का भाग उठ जाता है। ड्रम के ऊपर एक वॉल होती है, जिसको खोल दिया जाता है जिससे घर तक गैस का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे-जैसे गैस निकलती है ड्रम का ऊपरी भाग नीचे होता जाता है।

यह भी पढ़ें- पशुपालक भी सीख रहे हैं बायोगैस से बिजली बनाना

इस प्लांट को लगाने के लिए सरकार भी बढ़ावा दे रही है। यूपी के राष्ट्रीय बायोगैस उर्वरक प्रबन्धन कार्यक्रम (एनबीएमएमपी) के तहत 22,000 रुपए प्रति संयत्र लागत आती है। जिसमें सामान्य जाति के लाभार्थियों को 9000 रुपए और अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को 11,000 रुपए का अनुदान दिया जा रहा है बची हुई लागत लाभार्थी को देनी होती है।

यह भी पढ़ें- यहां दिया जाता है बायोगैस प्लांट लगाने का प्रशिक्षण

सरकार के साथ-साथ कई कंपनियां बायोगैस संयंत्र के छोटे-छोटे मॉडल ला रही है। इसके बारे में डॉ. आनंद बताते हैं, सरकार तो बढ़ावा दे ही रही है। बड़ी-बड़ी कंपनियां प्लास्टिक के ड्रम तैयार कर रही है जिसमें पांच से छह किलो (सब्जियां या अन्य सूखा) कचरा डालकर गैस बनाई जा सकती है। इसमें घर के दो तीन लोगों के लिए आसानी से खाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा इसकी जो स्लरी होती है वो खेतों के लिए बहुत उपयोगी है। जिनके पास पशु है वो इस प्लांट को लगा सकते है। इसकी तकनीकी जानकारी उनकी कृषि विज्ञान केंद्र में मिल जाएगी।"

बायोगैस प्लांट के लिए मुख्य कच्चा पदार्थ गोबर होता है, लेकिन इसके अलावा मल, मुर्गियों की बीट और कृषि अन्य कचरे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी भी कार्बनिक पदार्थ को जिसमें मुख्य रूप से गोबर लेते हैं। हवा की अनुपस्थिति में सड़ाने से जो गैस बनती है उसे बायोगैस कहते है। यह ज्वलन शील गैस होती है। इसमें 60 प्रतिशत मिथेन होती है, जबकि 40 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड होती है। मिथेन गैस जलने में सहायक होती है। इसका संयंत्र लगाने के बाद एक साल में ही उसकी लागत निकल आती है।

यह भी पढ़ें- आप भी ऐसे शुरु कर सकते हैं डेयरी का व्यवसाय

वैकल्पिक ऊर्जा के विकास पर काम कर रही संस्था नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 45.5 लाख बायोगैस संयंत्र अभी तक लगाए जा चुके हैं। इसमें आने वाले दो वर्षों में एक करोड़ नए संयंत्रों को लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

10 टन तक बना सकते हैं जैविक खाद

बायोगैस संयंत्र में गोबर गैस की पाचन क्रिया के बाद 25 प्रतिशत ठोस पदार्थ रूपान्तरण गैस के रूप में होता है और 75 प्रतिशत ठोस पदार्थ का रूपान्तरण खाद के रूप में होता हैं। जिसे बायोगैस स्लरी कहा जाता है। इस स्लरी को किसान अपने खेतों में प्रयोग कर सकते है। क्योंकि जब खाद सड़ जाती है उसमें किसी भी प्रकार की घास या बीज नहीं होता है जो खेतों के लिए बहुत उपयोगी होता है। दो घनमीटर के बायोगैस संयंत्र में 50 किलोग्राम प्रतिदिन के हिसाब से 18.25 टन गोबर एक वर्ष में डाला जाता है। उस गोबर में 80 प्रतिशत नमी युक्त करीब 10 टन बायोगैस स्लरी जैविक खाद प्राप्त होती है। ये खेती के लिये अति उत्तम खाद होती है। इसमें 1.5 से 2 प्रतिशत नाइट्रोजन, एक प्रतिशत फास्फोरस एवं एक प्रतिशत पोटाश होती हैं।

यह भी पढ़ें- गाय-भैंस के गोबर के बाद अब मुर्गियों की बीट से बनेगी बॉयोगैस

भारत सरकार बायोगैस प्लांट लगाने के लिए मदद करती है। कैसे ग्रामीण बायोगैस संयंत्र अनुदान योजना का लाभ 'अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग उत्तर प्रदेश (यूपीनेडा)' से ले सकते हैं।

ऐसे मिलेगा अनुदान

  • बायोगैस संयंत्र अनुदान योजना लेने के लिए सबसे पहले ग्रामीण अपने जिले के यूपीनेडा कार्यालय के जिला परियोजना अधिकारी से संपर्क करे।
  • जिला परियोजना अधिकारी के यहां बायोगैस संयंत्र अनुदान योजना का लाभ लेने के लिए फार्म भराया जाएगा।
  • अपने जिले में बायोगैस संयंत्र बनवाने वाले किसी भी एजेंसी से आप संपर्क कर अपने यहां बायोगैस प्लांट का निर्माण कराएं।
  • बायोगैस प्लांट का निर्माण कराने के बाद ग्रामीण बने हुए प्लांट की फोटो, बिल के साथ-साथ जरूरी कागजात लेकर यूपीनेडा के जिला परियोजना अधिकारी के पास जाकर जमा करें।
  • बायोगैस प्लांट बनने के बाद यूपी नेडा की एक टीम बने हुए संयंत्र का निरीक्षण करने जाएगी। निरीक्षण करने के बाद बायोगैस प्लांट बनवाने वाले ग्रामीण को सरकार के तहत कुछ दिनों में अनुदान की धनराशि प्रदान की जाएगी।

(ये जानकारी यूपीनेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी अतुल शंकर श्रीवास्तव से प्राप्त की गई है )

यह भी पढ़ें- अब छोटे किसान भी लगा सकेंगे गोबर गैस प्लांट

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top