पशुशाला में इन बातों का रखें ध्यान, दुधारू पशुओं को नहीं होगी बीमारियां

Diti BajpaiDiti Bajpai   6 May 2019 9:25 AM GMT

पशुशाला में इन बातों का रखें ध्यान, दुधारू पशुओं को नहीं होगी बीमारियां

लखनऊ। दुधारू पशुओं में ज्यादातर जीवाणु और विषाणु जनित रोग होते है इसलिए पशुओं को स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए पशुओं के बाड़े की साफ-सफाई बहुत जरूरी है।

ज्यादातर पशुशाला में पशुपालक साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते है जिससे पशुओं को गंभीर बीमारी होती और पशुपालक को उसका महंगा इलाज कराकर काफी खर्च उठाना पड़ता है। अगर पशुशाला में पशुओं की सही से देख-रेख की जाए तो काफी हद तक पशुओं को संक्रमण फैलने से बचाया जा सकता है।

पशुशाला में स्वच्छता

पशुशाला को स्वच्छ रखने के लिए दिन में कम से कम दो बार गोबर और गोमूत्र की सफाई करें। जब पशुओं को चरागाह में अथवा बाड़े में भेजा जाता है वह सफाई का उचित समय होता है। सफाई के लिए प्रति 50 पशु एक मजदूर लगाना चाहिए ।

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पशुशाला की सफाई के लिए ध्यान देने वाली बातें

-पशुशाला की सफाई के लिए आवश्यक उपकरण (बेलचा, हाथगाड़ी, झाडू, पानी का पाइप, ब्रश ) और रसायन (धोने का सेाडा, क्लोरीन, फिनाइल, चूना) की आवश्यकता पड़ती है।

-गोबर को बेलचे से उठाकर हाथगाड़ी में डालकर उचित स्थान पर इक्ट्ठा करना चाहिए और नांद को झाडू से साफ करना चाहिए ।

-पहले फर्श पर पानी का छिड़काव करें जिससे फर्श गीला हो जाए और सूखी गंदगी व गोबर की सफाई सही से हो सके।

- फर्श को अच्छी तरह रगड़ कर धोने के बाद साबुन लगाकर और उसके बाद झाडू और पानी से साफ करना चाहिए।

-दीवारों पर लगे गोबर के धब्बों की अच्छी तरह से सफाई करनी चाहिए।

- पूरे फर्श पर 2 प्रतिशत फिनाइल का छिड़काव करना चाहिए।

- गोशाला में लगे मकड़ी के जालों को समय-समय पर साफ करना चाहिए।

- दीवारों को ब्रश से साफ करना चाहिए।

- सफाई के बाद गंदा पानी निकास नाली से बाहर निकालना चाहिए।

-100 से 200 पी.पी.एम. क्लोरीन के घोल को दुग्ध कक्ष के पूरे फर्श पर छिड़काव करना चाहिए।

- एक वर्ष में कम से कम दो बार दीवार की सफेदी करनी चाहिए।

- मक्खी, मच्छरों और अन्य कीटों की रोकथाम के लिए बाजार में उपलब्ध कीटनाशकों का उपयोग पशुचिकित्सक से सलाह लेकर करना चाहिए।

- दूध कक्ष के दरवाजे और खिड़कियों पर तारों की जाली लगानी चाहिए जिससे मक्खियों और मच्छरों का प्रवेश न हो ।

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प्रयोग करने की विधि

- कपड़े धोने का सोडा 30 प्रतिशत (सोडियम कार्बोनेट) का उबलते पानी में घोल बनाकर बर्तन और फर्श पर छिड़काव और धुलाई करें।

- चूना एक गलैन पानी में और 5 प्रतिशत फिनॉल का फर्श, दीवार और जमीन पर छिड़काव करें।

- पोटैशियम परमैग्नेट का 1:10,000 अनुपात में पानी के घोल से फर्श, नांद और नाली की धुलाई करें ।

- मरक्यूरिक क्लोराइड का 1:10,000 अनुपात में घोल बनाकर धातु के सामान और कपड़े की धुलाई करें ।

- फिनॉयल (कार्बोलिक एसिड) का 3-5 प्रतिशत घोल बनाकर धातु के सामान एवं कपड़े की धुलाई करें ।

- पानी में 5 प्रतिशत फार्मलीन ओर 15 ग्राम पोटैशियम परमैग्नेट प्रति वर्गमीटर जगह के हिसाब से घर के भीतर की धुलाई करें।

-सिल्वर नाइट्रेट का पानी में 10 प्रतिशत घोल बनाकर आंखों में संक्रमण होने पर कुछ बूंदे डालें।

- कॉपर सल्फेट 28 ग्राम को 8000 गैलन पानी में घोल बनाकर तालाब, कुआं, आदि में छिड़काव करें। यह एक अच्छा फफूंदीनाशक है।

- सोडियम हाइड्राक्साइड 2 प्रतिशत (कीटाणुनाशक के लिए) और 5 प्रतिशत (स्पोर नाशक के लिए) से फर्श, नाली और उपकरण की धुलाई करें।

- इथाइल एल्कोहल के पानी में 70 प्रतिशत घोल से त्वचा और हाथों की सफाई करें।

- आयोडीन का 2-5 प्रतिशत एल्कोहल में घोल बनाकर त्वचा के जख्मों को धोयें।

- ब्लीचिंग पाउडर (कैल्शियम हाइपोक्लोराइट) 30 प्रतिशत को फर्श एवं नाली में छिड़कें।

- सोडियम हाइपोक्लोराइट (200 पीपीएम मौजूद क्लोरीन) से बर्तन को धोएं।

- क्रिस्टल वायलेट का 2 प्रतिशत घोल बनाकर जख्मों को पोछें। घोल को कपड़ों से दूर रखें।

- बोरिक अम्ल के 5-6 प्रतिशत घोल से फर्श, दीवार उपकरण और त्वचा की धुलाई करें।

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इन बातों को रखें ध्यान-

सभी विसंक्रमण खासकर रासायनिक पाउडर और घोल सामान्य रूप से जहरीले होते हैं और त्वचा, आंखो और श्वसन मार्ग को नुकसान पहुंचाते हैं। इनका इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को इन्हें प्रयोग करते समय पर्याप्त सावधानियाँ बरतनी चाहिए। आंख, नाक, मुँह को रसायनिक पाउडर से बचाना चाहिए। इनका इस्तेमाल करते समय चश्में, दस्ताने, मास्क, श्वास यंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए।

(साभार: राष्ट्रीय पशु आनुंवाशिक संसाधन ब्यूरो )

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