पशुपालक कैलेंडर: जुलाई के महीने में इन बातों का रखें ध्यान

Diti Bajpai | Jul 23, 2018, 06:18 IST
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सिंचित हरे चारे के खेतों में पशुओं को नहीं जाने दें, क्योंकि लंबी गर्मी के बाद अचानक वर्षा से जो हरे चारे की बढ़वार होती है उसमें साइनाइड जहर पैदा होने से चारा जहरीला हो जाता है।
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पशुपालक कैलेंडर: जुलाई के महीने में इन बातों का रखें ध्यान
जुलाई में अधिकांश हिस्सों में वर्षा ऋतु आने की संभावना रहती है, और कुछ स्थानों पर आंधी तूफान के साथ वर्षा होती है। ऐसे में गर्मी व नमी जनित रोगों से पशुओं को बचाएं।

कीचड़ बाढ़ आदि का प्रभाव पशुओं पर न्यूनतम हो, ऐसे उपाय अभी से करें।

वर्षा जनित रोगों से बचाव के उपाय नहीं भूले अंतः परजीवी व कृमि नाशक घोल या दवा देने का समय भी यही है।

अगर खुरपका- मुंहपका रोग, गलाघोटू, ठप्पा रोग, फड़किया रोग आदि के टीके नहीं लगवाए हो तो अभी लगवा लें।

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पशु ब्यांने के दो घंटे के अंदर नवजात बछड़े व बछड़ियों को खीस अवश्य पिलाएं।

ज्यादा दूध देने वाले पशुओं के ब्याने के 7-8 दिन तक दुग्ध ज्वर होने की संभावना अधिक होती है। इस रोग से पशुओं को बचाने के लिए उसे गाभिन अवस्था में उचित मात्रा में सूर्य की रोशनी मिलनी चाहिए। साथ ही गर्भावस्था के अंतिम माह में पशु चिकित्सक द्वारा लगाया जाने वाला विटामिन ई व सिलेनियम का टीका प्रसव उपरांत होने वाली कठिनाईयां, जैसे की जेर न गिरना इत्यादि में लाभदायक होता है, अत: पानी के साथ 5 से 10 ग्राम चूना मिलाकर या कैल्शियम, फास्फोरस का घोल 70 से सौ मिलीलीटर प्रतिदिन दिया जा सकता है।

सिंचित हरे चारे के खेतों में पशुओं को नहीं जाने दें, क्योंकि लंबी गर्मी के बाद अचानक वर्षा से जो हरे चारे की बढ़वार होती है उसमें साइनाइड जहर पैदा होने से चारा जहरीला हो जाता है। यह ज्वार की फसल में विशेष तौर पर होता है। ऐसी फसल को समय से पहले ना काटे और न हीं पशुओं को खिलाएं।

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बहुऋतुजीवी चारा घासों की रोपाई करें और बढ़ रही घास की कटाई 40 से 50 दिनों के अंतर पर करते रहें। संतुलित पशु आहार के लिए मक्का, ज्वार, बाजरे की, लोबिया व ग्वार के साथ मिलाकर बिजाई करें।

भेड़ के शरीर को ऊन कतरने के 21 दिन बाद बाहय परजीवी से बचाने के लिए कीटाणुनाशक घोल से भिगोएं।



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