कर्ज नहीं चुकाया तो घर-ज़मीन पर हो सकता है बैंक का कब्ज़ा! आरबीआई लाया नए नियमों का मसौदा
Umang | May 06, 2026, 16:42 IST
आरबीआई ने लोन रिकवरी प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब बैंक और एनबीएफसी गिरवी संपत्तियों पर कब्जा कर सकते हैं, खासकर उन मामलों में जहां लोन एनपीए बन चुके हैं। यह संपत्तियाँ बैंक द्वारा अधिकतम सात वर्षों तक रखी जा सकेंगी और अनिवार्य रूप से बेची जानी चाहिए।
आरबीआई के नए ड्राफ्ट नियम
अगर आपने बैंक से लोन लिया है और लगातार किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं, तो आने वाले समय में आपकी गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी पर बैंक का कब्जा आसान हो सकता है। Reserve Bank of India (आरबीआई) ने ऐसे मामलों के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं जिनमें बैंकों और एनबीएफसी को लोन रिकवरी के तहत घर, जमीन जैसी अचल संपत्तियां अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। साथ ही यह भी तय किया गया है कि बैंक इन संपत्तियों को कितने समय तक अपने पास रख सकते हैं और किन लोगों को इन्हें दोबारा नहीं बेच सकते।
आरबीआई ने साफ किया है कि सामान्य स्थिति में बैंक और अन्य विनियमित संस्थाएं (आरई) अपनी नियमित बैंकिंग गतिविधियों के दौरान गैर-वित्तीय संपत्तियों जैसे घर, जमीन या मशीनरी पर कब्जा नहीं करेंगी। लेकिन यदि कोई लोन एनपीए यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति बन जाता है और उधारकर्ता भुगतान बंद कर देता है, तब बैंक कानूनी प्रक्रिया अपनाकर गिरवी रखी गई संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकते हैं। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, केवल वही मामले इस प्रक्रिया के तहत आएंगे जहां बाकी सभी रिकवरी विकल्प विफल हो चुके हों।
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने बैंक से ₹50 लाख का लोन लिया और बाद में वह उसे चुकाने में असफल रहा। ऐसे में बैंक अंतिम विकल्प के तौर पर उसकी गिरवी रखी गई संपत्ति, जैसे घर, को अपने कब्जे में ले सकता है। अगर उस संपत्ति की कीमत ₹50 लाख है तो पूरा कर्ज खत्म माना जाएगा। लेकिन यदि संपत्ति की कीमत कम है, तो बाकी रकम उधारकर्ता को फिर भी चुकानी होगी। उस बचे हुए हिस्से को पुनर्गठित लोन माना जाएगा और उस पर मौजूदा नियम लागू होंगे।
आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक या एनबीएफसी कब्जे में ली गई ऐसी संपत्तियों को अधिकतम 7 साल तक ही अपने पास रख सकेंगे। इसके बाद उन्हें पारदर्शी तरीके से बेचकर रिकवरी करनी होगी। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि संपत्तियों की बिक्री निष्पक्ष और वित्तीय रूप से विवेकपूर्ण तरीके से होनी चाहिए, ताकि अधिकतम रिकवरी हो सके और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
आरबीआई ने अपने मसौदे में यह भी कहा है कि बैंक कब्जे में ली गई संपत्ति को दोबारा उसी उधारकर्ता या उससे जुड़े किसी व्यक्ति को नहीं बेच सकेंगे। ऐसा ‘मोरल हैजार्ड’ यानी गलत लाभ उठाने की संभावना को रोकने के लिए किया गया है। आरबीआई ने इन ड्राफ्ट नियमों पर 26 मई 2026 तक आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।