‘गाँव कनेक्शन’ में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं उमंग शुक्ला वेबसाइट लीड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, सरकारी योजनाएं और कृषि विषय पर विशेषज्ञता रखते हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
‘गाँव कनेक्शन’ में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं उमंग शुक्ला वेबसाइट लीड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, सरकारी योजनाएं और कृषि विषय पर विशेषज्ञता रखते हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
By Umang
1 जुलाई से देशभर में फसल बीमा माह की शुरुआत हो गई है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है। खरीफ़ फसलों के लिए किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार वहन करती है। किसान ऑनलाइन, CSC, बैंक या Crop Insurance ऐप के जरिए आवेदन कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं।
1 जुलाई से देशभर में फसल बीमा माह की शुरुआत हो गई है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है। खरीफ़ फसलों के लिए किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार वहन करती है। किसान ऑनलाइन, CSC, बैंक या Crop Insurance ऐप के जरिए आवेदन कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं।
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हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान योजना शुरू की है। किसान 18 जुलाई 2026 तक agriharyana. gov. in पर आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रदर्शन प्लांट, प्रमाणित बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण पर आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना हरियाणा के 10 ज़िलों में लागू की गई है।
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान योजना शुरू की है। किसान 18 जुलाई 2026 तक agriharyana. gov. in पर आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रदर्शन प्लांट, प्रमाणित बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण पर आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना हरियाणा के 10 ज़िलों में लागू की गई है।
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ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ब्यूरो ऑफ़ मेटियोरोलॉजी ने चेतावनी दी है कि 2026 में 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली सुपर अल नीनो विकसित हो सकता है। प्रशांत महासागर का तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है और वायुमंडलीय परिस्थितियाँ इसे और मज़बूत बना रही हैं। साथ ही, वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जिससे दुनिया भर में भीषण गर्मी, बाढ़, समुद्री हीटवेव और चरम मौसमी घटनाओं का ख़तरा बढ़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ब्यूरो ऑफ़ मेटियोरोलॉजी ने चेतावनी दी है कि 2026 में 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली सुपर अल नीनो विकसित हो सकता है। प्रशांत महासागर का तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है और वायुमंडलीय परिस्थितियाँ इसे और मज़बूत बना रही हैं। साथ ही, वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जिससे दुनिया भर में भीषण गर्मी, बाढ़, समुद्री हीटवेव और चरम मौसमी घटनाओं का ख़तरा बढ़ सकता है।
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वैश्विक कच्चे तेल की क़ीमतों में नरमी के बीच 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत 183.50 रुपये घटाकर 2,930 रुपये कर दी गई है। वहीं नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीज़ल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर और सरकारी तेल कंपनियों के ईंधन दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वैश्विक कच्चे तेल की क़ीमतों में नरमी के बीच 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत 183.50 रुपये घटाकर 2,930 रुपये कर दी गई है। वहीं नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीज़ल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर और सरकारी तेल कंपनियों के ईंधन दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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एक जुलाई से विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB-GRAM-G लागू हो गया है। नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों तक गारंटीकृत रोज़गार मिलेगा। राष्ट्रीय औसत दैनिक मज़दूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। योजना में डिजिटल निगरानी, समय पर भुगतान, बेरोज़गारी भत्ता और कृषि सीज़न के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
एक जुलाई से विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB-GRAM-G लागू हो गया है। नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों तक गारंटीकृत रोज़गार मिलेगा। राष्ट्रीय औसत दैनिक मज़दूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। योजना में डिजिटल निगरानी, समय पर भुगतान, बेरोज़गारी भत्ता और कृषि सीज़न के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
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ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर हुए राष्ट्रीय अध्ययन में रोज़गार और समय की कमी सबसे बड़ी वजह सामने आई है। 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हुए इस अध्ययन में जागरूकता, पारदर्शिता, भरोसे की कमी और संवाद संबंधी समस्याओं को भी प्रमुख बाधाएँ बताया गया है। रिपोर्ट में जनजागरूकता, महिला सहभागिता, डिजिटल संचार और पारदर्शिता बढ़ाने समेत कई नीतिगत सुझाव दिए गए हैं।
ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर हुए राष्ट्रीय अध्ययन में रोज़गार और समय की कमी सबसे बड़ी वजह सामने आई है। 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हुए इस अध्ययन में जागरूकता, पारदर्शिता, भरोसे की कमी और संवाद संबंधी समस्याओं को भी प्रमुख बाधाएँ बताया गया है। रिपोर्ट में जनजागरूकता, महिला सहभागिता, डिजिटल संचार और पारदर्शिता बढ़ाने समेत कई नीतिगत सुझाव दिए गए हैं।
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खरीफ़ फसलों की बुआई के बीच 1 से 31 जुलाई तक देशभर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा माह अभियान चलेगा। इस दौरान किसानों को कम प्रीमियम पर फसलों का बीमा कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। योजना प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि और कीट-रोग से होने वाले नुकसान पर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
खरीफ़ फसलों की बुआई के बीच 1 से 31 जुलाई तक देशभर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा माह अभियान चलेगा। इस दौरान किसानों को कम प्रीमियम पर फसलों का बीमा कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। योजना प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि और कीट-रोग से होने वाले नुकसान पर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
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देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में बुआई लगभग दो सप्ताह की देरी से चल रही है, जिससे खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कम बारिश और संभावित अल नीनो के असर से घरेलू उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यदि वैश्विक स्तर पर भी सोयाबीन उत्पादन घटा, तो भारत में खाद्य तेल की महँगाई और बढ़ सकती है।
देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में बुआई लगभग दो सप्ताह की देरी से चल रही है, जिससे खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कम बारिश और संभावित अल नीनो के असर से घरेलू उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यदि वैश्विक स्तर पर भी सोयाबीन उत्पादन घटा, तो भारत में खाद्य तेल की महँगाई और बढ़ सकती है।
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड के पंतनगर में कृषि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ धान की रोपाई की और कहा कि खेती केवल किताबों से नहीं, बल्कि खेत में उतरकर सीखी जाती है। उन्होंने 'खेत बचाओ अभियान' में हिस्सा लेते हुए हरित कृषि, अनुसंधान और किसानों से जुड़ाव पर ज़ोर दिया। साथ ही पूर्व छात्र सम्मेलन में कृषि को राष्ट्रनिर्माण का आधार बताया और पौधरोपण का संदेश दिया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड के पंतनगर में कृषि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ धान की रोपाई की और कहा कि खेती केवल किताबों से नहीं, बल्कि खेत में उतरकर सीखी जाती है। उन्होंने 'खेत बचाओ अभियान' में हिस्सा लेते हुए हरित कृषि, अनुसंधान और किसानों से जुड़ाव पर ज़ोर दिया। साथ ही पूर्व छात्र सम्मेलन में कृषि को राष्ट्रनिर्माण का आधार बताया और पौधरोपण का संदेश दिया।
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के किसान स्वर्गीय रघुपत सिंह को पारंपरिक बीजों के संरक्षण और टिकाऊ खेती में योगदान के लिए वर्ष 2026 में मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान उनकी पत्नी प्रेमवती को प्रदान किया। रघुपत सिंह ने 100 से अधिक नई प्रजातियाँ विकसित कीं और तीन लाख से अधिक किसानों को खेती के नए प्रयोगों से जोड़ा।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के किसान स्वर्गीय रघुपत सिंह को पारंपरिक बीजों के संरक्षण और टिकाऊ खेती में योगदान के लिए वर्ष 2026 में मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान उनकी पत्नी प्रेमवती को प्रदान किया। रघुपत सिंह ने 100 से अधिक नई प्रजातियाँ विकसित कीं और तीन लाख से अधिक किसानों को खेती के नए प्रयोगों से जोड़ा।