बेटियों को पढ़ाने की ठानी जिद, अब लोग इन्हें 45 बच्चों की माँ कहते हैं

बेटियों को पढ़ाने की ठानी जिद, अब लोग इन्हें 45 बच्चों की माँ कहते हैंबेटियों के साथ सोनिया जौली।

लखनऊ। लड़कियों को कोख में मार दिया जाता है तो कभी जन्म के बाद उन्हें लावारिस छोड़ दिया जाता है। ये सब ठीक रहा तो बड़ी होने के बाद उन्हें दहेज का दंश झेलना पड़ता है। ऐसी ढेरों खबरें प्रतिदिन समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल जाती हैं। सतना की सोनिया जौली भी रोज ऐसी खबरों से रूबरू होती थीं। ऐसी घटनाएं उन्हें मन ही मन कचोटती थीं। सोनिया ऐसी खबरें पढ़ती थीं तो वे इसके पीछे का कारण भी जानना चाहती थीं।

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सतना में रहने वालीं 50 वर्षीय सोनिया जौली वैसे तो एक गृहिणी हैं, लेकिन लोग उन्हें 45 बच्चों की माँ कहता है। सोनिया 45 बेटियों के जीवन में शिक्षा का प्रकाश प्रवाह कर रही हैं। इन बेटियों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाती हैं। साथ ही उनके खाने आैर स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाता है। सोनिया ने गाँव कनेक्शन को बताया कि बेटियों पर हो रहे अत्याचार की खबरें वो प्रतिदिन पढ़ती थीं। गरीब घर में पैदा हुई बेटियों को ज्यादा अत्याचार सहना पड़ता है। उनके पिता उन्हें बोझ समझते हैं। इन्हीं सबको देखते हुए मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न गरीब घर में पैदा हुई बेटियों को पढ़ा-लिखाकर उन्हें स्वावलंबी बनाएं।

सोनिया बताती हैं कि उनके तीन बच्चे हैं। वे सभी बाहर नौकरी करते हैं। मैंने सोचा कि गरीब और अनाथ बेटियों को भी तो पढ़ने का अधिकार है। उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका बराबर मिलना चाहिए। इसी संकल्प से वे एक दिन नजदीकी सरकार स्कूल में पहुंच गईं। अभावग्रस्त बेटियों की स्थिति देखकर उनका मन द्रवित हो उठा। हर किसी ने परिवार की स्थिति और आगे की पढ़ाई बंद करने के दबाव के बारे में बताया। सबकी स्थिति लगभग एक जैसी थी। ये घटना 2014 की है। उन बेटियों से बात करके सोनिया ने उनके शिक्षकों से बात की। खास बात ये है कि अब लोग मुझे इन बच्चियों की माँ समझने लगे हैं।

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सोनिया ने कहा कि शिक्षकों से बात करके पहले उन्होंने स्कूल के 13 गरीब बेटियों को गोद लिया। उनकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाना शुरू किया। इसके बाद ये सिलसिला शुरू हो गया। अब बेटियों की संख्या 45 हो गई। सोनिया आगे बताती हैं कि अब उन्होंनें उपकार नाम से एनजीओ भी बना लिया है। उसमें शामिल सदस्य भी समय-समय पर मदद करते रहते हैं। ट्यूशन, किताबें, ड्रेस स्कूल फीस आदि सभी खर्च उपकार वहन रहा है।

सबसे छोटी बेटी क्षमा

इन 45 बेटियों में 10वीं में पढ़ने वाली लड़कियां भी हैं। कुछ बच्चें इस साल बोर्ड एग्जाम में बैठेंगे। इसके लिए विशेष कोचिंग क्लासेस चलाए जा रहे हैं, ताकि रिजल्ट अच्छे आएं। सोनिया ने बताया कि जिन बच्चों को उन्होंने गोद लिया है उसमें क्षमा छोटी बेटी क्षमा है जो अभी मात्र 7 साल की है। 45 बेटियों के शिक्षा कर रिकार्ड भी बेहतर है। सभी बच्चे प्रथम श्रेणी में पास होते आए हैं। बेटियों के लिए नियमित कैंप भी लगाए जाते हैं जिसमें उनकी स्वास्थ्य की जांच की जाती है। उन्हें व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाता है।

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