लीजिए छुक-छुक का मजा : 110 साल पुरानी माथेरान टॉय ट्रेन सेवा फिर से शुरू 

लीजिए छुक-छुक का मजा : 110 साल पुरानी माथेरान टॉय ट्रेन  सेवा फिर से शुरू साभार: इंटरनेट।

अगर आप कोयले से चलने वाली ट्रेन में नहीं बैठ पाएं हैं तो आपके लिए ये मौका है। महाराष्ट्र के खूबसूरत हिल स्टेशन माथेरान में आप टॉय ट्रेन का मजा ले सकते हैं... यहां बादल आप को छूकर निकलते हैं..

110 साल पुरानी माथेरान टॉय ट्रेन ने अपनी सेवा फिर से शुरू की है। अपनी 110 साल पुरानी विरासत सहेजे ये ट्रेन 21 किलोमीटर का सफर तय करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसका उद्घाटन किया। अपने 21 किलोमीटर के सफर में ये ट्रेन जंगलों को पार करती हुई नरेल से होकर दक्षिण में मदिरन को जोड़ेगी।

पर्यटकों, छोटे व्यापारियों और होटलों के लिए ये लाइफ लाइन 1907 में शुरू की गई थी जिसको यूनेस्को की वैश्विक धरोहरों के स्थलों की सूची में जोड़ा गया था। लेकिन 2016 में 1 मई और उसके ठीक बाद 8 मई को लगातार दो रेल हादसों के कारण इस ट्रेन का सफर घटाकर अमन लॉज से माथेरान लगभग ढाई किलोमीटर कर दिया गया।

साभार: इंटरनेट

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मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद अब इस ट्रेन का सफर फिर से 21 किलोमीटर हो गया है। ये ट्रेन नरेल से रोज सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर छूटेगी और 9 बजकर 40 मिनट पर माथेरान पहुंचेगी। शाम को वापसी के वक्त माथेरान से 3 बजकर 30 मिनट पर छूटेगी और 6 बजकर 30 मिनट पर नरेल पहुंचेगी। इस टॉय ट्रेन के टिकट के लिए आप टिकट काउंटर पर ट्रेन चलने के 45 मिनट पहले ही टिकट ले सकते हैं।

अधिकतम साढ़े सात किलो तक ही सामान ले कर चल सकते हैं

सेकेंड क्लास का हर यात्री अधिकतम पांच किलोग्राम और प्रथम श्रेणी का हर यात्री साढ़े सात किलोग्राम तक का सामान अपने साथ ले जा सकता है। एक टिकट पर अधिकतम चार सीट ही रिजर्व हो सकती है। सेकेंड क्लास का टिकट 45 रुपए है बच्चों के लिए 30 रुपए है। वहीं प्रथम श्रेणी के टिकट की कीमत 300 रुपए और बच्चों के लिए 180 रुपए है।

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सुरक्षा मानकों को लेकर रेलवे ने दी हरी झण्डी

पिछले महीने ही मध्य रेलवे ने सुरक्षा के मानकों पर इस ट्रेन को पास करने के बाद ही हरी झण्डी दी है। ट्रेन को दुर्घटना से बचाने के लिए क्रैश बेरियर, गैबियन बेरियर और सीमा बेरियर लगाकर कुल 6 करोड़ रुपए का खर्च आया है। ड्यूअेल ब्रेकिंग सिस्टम, माइक्रो प्रोसेसर बेस्ड इंजन कंट्रोल सिस्टम, ट्रेन की स्पीड को अलर्ट करने के लिए लोको पायलेट की विजिलेंट कंट्रोल डिवाइस से ट्रेन की सुरक्षा की जाएगी।

1907 में शुरू हुई ये लाइन

इस रेलमार्ग को सबसे पहले अब्दुल हुसैन अदमजी पीरभोए ने अपने पिता से सोलह लाख रुपए लेकर के बनवाई थी। अब्दुल हुसैन को ये विचार माथेरान का दौरा करते वक्त आया। तब उन्होंने तय किया कि लोगों की सुविधा के लिए ये माथेरान हिल रेलवे शुरू करेंगे। ये प्रोजेक्ट 1900 में शुरू हुआ काम 1904 में शुरू हुआ और 1907 में ये रेलवे लाइन लोगों के लिए शुरू कर दी गई थी।

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1881 में शुरू हुई थी पहली टॉय ट्रेन

कार्यकारी निदेशक (हेरिटेज) सुब्रत नाथ ने बताया कि भारत में पहली टॉय ट्रेन 1881 में सिलीगुड़ी से लेकर दार्जलिंग तक चली थी। जिसके बीच की दूरी लगभग 78 किलोमीटर की थी। गौरतलब है कि पहाड़ों पर चलने वाली टॉय ट्रेन दार्जलिंग, शिमला, ऊटी के आलावा कांगड़ा और माथेरान में है। आपको बता दें कि ऊटी में जो टॉय ट्रेन चलती है वो मीटर गेज होती है बाकी चारों जगह पर नैरो गेज ट्रेन चलती है।

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