पौधे खुद बताते हैं कि उनको कब क्या चाहिए, जानिए कैसे ?

पौधे खुद बताते हैं कि उनको कब क्या चाहिए, जानिए कैसे ?पत्तियों के रंग से पहचाने कि फसल में किस पोषक तत्वों की है कमी

लखनऊ। अधिक उत्पादन के लिए पोषक तत्वों की कमी को पहचान कर उन्हें सही करना प्रत्येक किसान का कर्तव्य होता है। कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर बताया गया है कि किसान फसल के पौधों को देखकर कैसे पहचान सकते हैं कि फसल में किस पोषक तत्व की कमी है, जिससे किसान समय पर उसका उपचार कर सकें।

बोरान

बोरान की कमी से पौधे के सबसे ऊपर की पत्तियां पीली हो जाती हैं। कलियां सफेद या हल्के भूरे मृत ऊतक की तरह दिखाई देती हैं।

गंधक

गंधक की कमी से पत्तियां, शिराओं सहित गहरे हरे से पीले रंग में बदल जाती हैं तथा बाद में सफेद हो जाती हैं। इसकी कमी से सबसे पहले नई पत्तियां प्रभावित होती हैं।

ये भी पढ़ें : यूरिया और डीएपी असली है या नकली ? ये टिप्स आजमाकर तुरंत पहचान सकते हैं किसान

मैगनीज

इसकी कमी से पत्तियों का रंग पीला-धूसर या लाल-धूसर हो जाता है तथा शिराएं हरी होती हैं। पत्तियों का किनारा और शिराओं का मध्य भाग पीला हो जाता है। पीली पत्तियां अपने सामान्य आकार में रहती हैं।

ये भी पढ़ें : कृषि वैज्ञानिक ने बताए धान की फसल में लगने वाले रोग-कीट व उसके उपचार

जस्ता

जस्ता की कमी से सामान्य तौर पर पत्तियों के शिराओं के मध्य पीले पन के लक्षण दिखाई देते हैं और पत्तियों का रंग कॉसा की तरह हो जाता है।

मैग्नीशियम

इसकी कमी से पत्तियों के आगे का हिस्सा गहरा हरा होकर शिराओं का मध्यभाग सुनहरा पीला हो जाता है और फिर किनारे से अन्दर की ओर लाल-बैंगनी रंग के धब्बे बन जाते हैं।

ये भी पढ़ें : किसान ऐसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का ले सकते हैं लाभ, पानी की बचत के साथ होगा अधिक उत्पादन

फास्फोरस

फास्फोरस की कमी से पौधों की पत्तियां छोटी रह जाती हैं और पौधों का रंग गुलाबी होकर गहरा हरा हो जाता है।

कैल्शियम

कैल्शियम की कमी से पौधे के सबसे ऊपर की पत्तियां प्रभावित होती हैं तथा देर से निकलती हैं। ऊपर की कलियां खराब हो जाती हैं। मक्के की नोचे चिपक जाती हैं।

लोहा

नई पत्तियों में तने के ऊपरी भाग पर सबसे पहले पिलेपन के लक्षण दिखाई देते हैं। शिराओं को छोड़कर पत्तियों का रंग एक साथ पीला हो जाता हैं। ये कमी होने पर भूरे रंग का धब्बा या मृत उतक के लक्षण प्रकट होते हैं।

ये भी पढ़ें : अगर धान की फसल से अधिक पैदावार चाहिए तो हमेशा ध्यान रखें ये चार सिद्धांत

तांबा

इसकी कमी से नई पत्तियां एक साथ गहरी पीले रंग की हो जती हैं तथा सूख कर गिरने लगती हैं। खाद्यान वाली फसलों में गुच्छों में वृद्धि होती है तथा शीर्ष में दाने नहीं होते हैं।

मालिब्डेनम

इसकी कमी से नई पत्तियां सूख जाती हैं, हल्के हरे रंग की हो जीती हैं, मध्य शिराओं को छोड़ कर पूरी पत्तियों पर सूखे धब्बे दिखाई देते हैं। नाईट्रोजन के उचिट ढंग से उपयोग न होने के कारण पुरानी पत्तियां पीली होने लगती हैं।

पोटैशियम

पोटैशियम की कमी से पुरानी पत्तियों का रंग पीला/भूरा हो जाता है और बाहरी किनारे कट-फट जाते हैं। मौटे आनाज जैसे - मक्का और ज्वार में ये लक्षण पत्तियों के आगे के हिस्से से शुरू होते हैं।

नाइट्रोजन

नाइट्रोजन की कमी से पौधे हल्के हरे रंग के या हल्के पीले रंग के होकर बौने रह जाते हैं। पुराई पत्तियां पहले पीली हो जाती हैं। मोटे अनाज वाली फसलों में पत्तियों का पीलापन आगे के हिस्से से शुरू होकर बीच के हिस्से तक फैल जाता है।

ये भी पढ़ें : आपकी फसल को कीटों से बचाएंगी ये नीली, पीली पट्टियां

Share it
Top