Budget 2026: सहकारी समितियों को बड़ी राहत, किसानों और पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ
Gaon Connection | Feb 01, 2026, 14:14 IST
Budget 2026 में सरकार ने सहकारी समितियों को बड़ी राहत देते हुए पशुचारा और कपास बीज की आपूर्ति पर टैक्स कटौती की सुविधा बढ़ाई है। साथ ही सहकारी संस्थाओं के बीच मिलने वाले लाभांश पर भी कर नियम आसान किए गए हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन प्रस्तावित किए हैं। इन प्रोत्साहनों से सहकारी समितियों और उनके सदस्यों को कर बोझ में कमी और लाभ के वितरण में बेहतर अवसर मिलेगा।
अब प्राथमिक सहकारी समितियों को उनके सदस्यों द्वारा उत्पादित पशुचारा और कपास के बीज की आपूर्ति को कर कटौती में शामिल करने की अनुमति दी जाएगी। इससे पहले यह छूट केवल दूध, तिलहन, फल और सब्ज़ियों की आपूर्ति तक सीमित थी। इस फैसले से किसानों और पशुपालकों को इन कृषि इनपुट्स के उत्पादन और विपणन में राहत मिलेगी।
यह कदम उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी आय पशुपालन और कपास जैसी कृषि गतिविधियों पर निर्भर रहती है। सहकारी समितियाँ अब इन उत्पादों की आपूर्ति के खर्च को घटा सकेंगी, जिससे उनकी लाभप्रदता और सदस्य किसानों की आमदनी को बढ़ावा मिलेगा।
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बजट में यह प्रस्ताव भी शामिल है कि नई कर व्यवस्था के तहत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय को भी सहयोगी समिति के सदस्यों के बीच आगे वितरित करने की सीमा तक कटौती के रूप में मान्यता दी जाए। इसका मतलब यह है कि अगर एक सहकारी समिति किसी दूसरी सहकारी समिति में निवेश करती है और लाभांश प्राप्त होता है, तो उसे कर योग्य आय में शामिल न करके, कटौती के रूप में माना जाएगा। इससे सहकारी नेटवर्क के बीच वित्तीय लेन-देन आसान, पारदर्शी और कम कर योग्य होगा।
एक और बड़ा प्रोत्साहन यह है कि एक अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ को तीन वर्षों के लिए छूट दी जाएगी, जब तक कि उसके सदस्य सहकारी समितियों में उसके निवेश का लाभांश वापस वितरित किया जा रहा हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहकारी संस्थाएँ जो कंपनियों में निवेश करती हैं, उनमें से होने वाला लाभांश सदस्यों तक वापस पहुंचाया जाए, न कि कहीं अन्यत्र कर योग्य आय के रूप में फंसे।
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अब प्राथमिक सहकारी समितियों को उनके सदस्यों द्वारा उत्पादित पशुचारा और कपास के बीज की आपूर्ति को कर कटौती में शामिल करने की अनुमति दी जाएगी। इससे पहले यह छूट केवल दूध, तिलहन, फल और सब्ज़ियों की आपूर्ति तक सीमित थी। इस फैसले से किसानों और पशुपालकों को इन कृषि इनपुट्स के उत्पादन और विपणन में राहत मिलेगी।
यह कदम उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी आय पशुपालन और कपास जैसी कृषि गतिविधियों पर निर्भर रहती है। सहकारी समितियाँ अब इन उत्पादों की आपूर्ति के खर्च को घटा सकेंगी, जिससे उनकी लाभप्रदता और सदस्य किसानों की आमदनी को बढ़ावा मिलेगा।
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बजट में यह प्रस्ताव भी शामिल है कि नई कर व्यवस्था के तहत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय को भी सहयोगी समिति के सदस्यों के बीच आगे वितरित करने की सीमा तक कटौती के रूप में मान्यता दी जाए। इसका मतलब यह है कि अगर एक सहकारी समिति किसी दूसरी सहकारी समिति में निवेश करती है और लाभांश प्राप्त होता है, तो उसे कर योग्य आय में शामिल न करके, कटौती के रूप में माना जाएगा। इससे सहकारी नेटवर्क के बीच वित्तीय लेन-देन आसान, पारदर्शी और कम कर योग्य होगा।
एक और बड़ा प्रोत्साहन यह है कि एक अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ को तीन वर्षों के लिए छूट दी जाएगी, जब तक कि उसके सदस्य सहकारी समितियों में उसके निवेश का लाभांश वापस वितरित किया जा रहा हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहकारी संस्थाएँ जो कंपनियों में निवेश करती हैं, उनमें से होने वाला लाभांश सदस्यों तक वापस पहुंचाया जाए, न कि कहीं अन्यत्र कर योग्य आय के रूप में फंसे।
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