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उत्तर प्रदेश में इस होली रंगों के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी उत्सव मनाया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल पर प्राकृतिक तत्वों से ऑर्गेनिक गुलाल तैयार हो रहा है। यह गुलाल गाय के गोबर की राख, गुलाब, चुकंदर और पालक जैसी चीजों से बनता है। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और त्वचा को नुकसान नहीं होता।
उत्तर प्रदेश में इस होली रंगों के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी उत्सव मनाया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल पर प्राकृतिक तत्वों से ऑर्गेनिक गुलाल तैयार हो रहा है। यह गुलाल गाय के गोबर की राख, गुलाब, चुकंदर और पालक जैसी चीजों से बनता है। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और त्वचा को नुकसान नहीं होता।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जलवायु संकट का सामना करने के लिए नई और उन्नत फसल किस्मों पर काम कर रहा है। ये किस्में न केवल जलवायु के प्रतिकूल प्रभावों को सहन कर सकेंगी, बल्कि इनमें पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा भी होगी। इससे न केवल फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जलवायु संकट का सामना करने के लिए नई और उन्नत फसल किस्मों पर काम कर रहा है। ये किस्में न केवल जलवायु के प्रतिकूल प्रभावों को सहन कर सकेंगी, बल्कि इनमें पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा भी होगी। इससे न केवल फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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रेज़्ड बेड गार्डनिंग बागवानी का एक सरल और प्रभावी तरीका है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास सीमित स्थान है। यह विधि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करती है और पौधों को पर्याप्त हवा और पानी मिलती है। रेज़्ड बेड का आकार और स्थान चुने जाने पर ध्यान देने से पौधों की वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
रेज़्ड बेड गार्डनिंग बागवानी का एक सरल और प्रभावी तरीका है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास सीमित स्थान है। यह विधि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करती है और पौधों को पर्याप्त हवा और पानी मिलती है। रेज़्ड बेड का आकार और स्थान चुने जाने पर ध्यान देने से पौधों की वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
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राजस्थान के एक साहसी किसान ने एक अद्भुत बिजनेस मॉडल पेश किया है। कैलाश चौधरी ने कच्चे आंवले को प्रोसेस करके बेहतरीन गुणवत्ता के उत्पादों में बदल दिया है। उनकी चार हेक्टेयर की भूमि से करोड़ों का कारोबार शुरू हुआ है, जिसमें आंवले से बनी कैंडी, मुरब्बा और अचार शामिल हैं।
राजस्थान के एक साहसी किसान ने एक अद्भुत बिजनेस मॉडल पेश किया है। कैलाश चौधरी ने कच्चे आंवले को प्रोसेस करके बेहतरीन गुणवत्ता के उत्पादों में बदल दिया है। उनकी चार हेक्टेयर की भूमि से करोड़ों का कारोबार शुरू हुआ है, जिसमें आंवले से बनी कैंडी, मुरब्बा और अचार शामिल हैं।
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कमाल की सोच और आधुनिक शिक्षा के साथ दिल्ली में पले-बढ़े फहद फारूकी ने खेती को एक नई दिशा दी। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई के बाद, उन्होंने अपने खेतों में साधारण खेती की पारंपरिक पद्धतियों को बदल दिया। अपनी खेती को ऐसे डिजाइन किया कि लोग दूर-दूर से देखने आते हैं।
कमाल की सोच और आधुनिक शिक्षा के साथ दिल्ली में पले-बढ़े फहद फारूकी ने खेती को एक नई दिशा दी। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई के बाद, उन्होंने अपने खेतों में साधारण खेती की पारंपरिक पद्धतियों को बदल दिया। अपनी खेती को ऐसे डिजाइन किया कि लोग दूर-दूर से देखने आते हैं।
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बिहार के किसानों के लिए बिहार कृषि ऐप एक महत्वपूर्ण डिजिटल मंच है। इस ऐप से किसान घर बैठे फार्मर रजिस्ट्री करा सकते हैं और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। ऐप में नई डिजिटल सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे किसानों को आधुनिक खेती, मौसम की जानकारी और खाद की उपलब्धता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
बिहार के किसानों के लिए बिहार कृषि ऐप एक महत्वपूर्ण डिजिटल मंच है। इस ऐप से किसान घर बैठे फार्मर रजिस्ट्री करा सकते हैं और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। ऐप में नई डिजिटल सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे किसानों को आधुनिक खेती, मौसम की जानकारी और खाद की उपलब्धता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
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भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आज एक महत्वपूर्ण मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वोत्तर क्षेत्रों के साथ ही ऊँचाई वाले स्थानों पर बारिश और बर्फबारी का अनुमान है। वहीं, मैदानी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा, जिससे लोगों को उमस भरी गरमी का सामना करना पड़ेगा। जानिए देश के किन राज्यों में कैसा है अगले कुछ दिनों में मौसम का हाल।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आज एक महत्वपूर्ण मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वोत्तर क्षेत्रों के साथ ही ऊँचाई वाले स्थानों पर बारिश और बर्फबारी का अनुमान है। वहीं, मैदानी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा, जिससे लोगों को उमस भरी गरमी का सामना करना पड़ेगा। जानिए देश के किन राज्यों में कैसा है अगले कुछ दिनों में मौसम का हाल।
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कार्बी आंगलोंग के अदरक का लंदन निर्यात शुरू होना असम की कृषि की वैश्विक पहचान बढ़ाने वाला कदम है. GI टैग के साथ यह अदरक उच्च गुणवत्ता का प्रमाण देता है, जिससे किसानों की आय और क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा. आने वाले वर्षों में ऐसे निर्यात से पूर्वोत्तर भारत की क्षमताएँ वैश्विक मंच पर और सशक्त होंगी.
कार्बी आंगलोंग के अदरक का लंदन निर्यात शुरू होना असम की कृषि की वैश्विक पहचान बढ़ाने वाला कदम है. GI टैग के साथ यह अदरक उच्च गुणवत्ता का प्रमाण देता है, जिससे किसानों की आय और क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा. आने वाले वर्षों में ऐसे निर्यात से पूर्वोत्तर भारत की क्षमताएँ वैश्विक मंच पर और सशक्त होंगी.
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डेयरी पशुओं में होने वाली बीमारियाँ पशुपालक की कमाई और पशु की जिंदगी दोनों के लिए बड़ा खतरा हैं। खुरपका-मुँहपका, गलघोटू और लंगड़ा बुखार जैसी छूत की बीमारियाँ देखते ही देखते पूरे झुंड में फैल सकती हैं। ब्याने के बाद दुग्ध ज्वर और कीटोसिस जैसी कमजोरी की बीमारियाँ पोषण की कमी से जन्म लेती हैं। थनैला रोग दूध उत्पादन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाता है। इन सबसे बचाव के लिए समय पर टीकाकरण, साफ-सुथरा वातावरण और संतुलित खुराक ही सबसे बड़ा हथियार है।
डेयरी पशुओं में होने वाली बीमारियाँ पशुपालक की कमाई और पशु की जिंदगी दोनों के लिए बड़ा खतरा हैं। खुरपका-मुँहपका, गलघोटू और लंगड़ा बुखार जैसी छूत की बीमारियाँ देखते ही देखते पूरे झुंड में फैल सकती हैं। ब्याने के बाद दुग्ध ज्वर और कीटोसिस जैसी कमजोरी की बीमारियाँ पोषण की कमी से जन्म लेती हैं। थनैला रोग दूध उत्पादन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाता है। इन सबसे बचाव के लिए समय पर टीकाकरण, साफ-सुथरा वातावरण और संतुलित खुराक ही सबसे बड़ा हथियार है।
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बिहार सरकार ने मुर्गीपालकों के लिए बर्ड फ्लू से बचाव के निर्देश जारी किए हैं। यह बीमारी पक्षियों में तेजी से फैलती है और आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। साफ-सफाई, बीमार पक्षियों को अलग रखना और मृत पक्षियों का सुरक्षित निपटान जरूरी है। जानिए कैसे रखें मुर्गियों को सुरक्षित?
बिहार सरकार ने मुर्गीपालकों के लिए बर्ड फ्लू से बचाव के निर्देश जारी किए हैं। यह बीमारी पक्षियों में तेजी से फैलती है और आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। साफ-सफाई, बीमार पक्षियों को अलग रखना और मृत पक्षियों का सुरक्षित निपटान जरूरी है। जानिए कैसे रखें मुर्गियों को सुरक्षित?
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