तय रेट से ज्यादा देने पर भी बड़ी मुश्किल से मिल रहा ऑक्सीजन सिलिंडर, छोटे शहरों से बड़े शहरों में की जा रही सप्लाई

उत्तर प्रदेश के सीतापुर और शाहजहांपुर जिले से लखनऊ भेजे जा रहे हैं ऑक्सीजन सिलिंडर, दोगुनी तक वसूली जा रही कीमत। गाँव कनेक्शन की पड़ताल

तय रेट से ज्यादा देने पर भी बड़ी मुश्किल से मिल रहा ऑक्सीजन सिलिंडर, छोटे शहरों से बड़े शहरों में की जा रही सप्लाई

मध्य प्रदेश में इंदौर जिला प्रशासन निजी कंपनी से ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर अस्पतालों तक पहुंचवा रहा। (फोटो-इंदौर जिला प्रशासन )

"हमारे शाहजहांपुर से गाड़ियों में लोड करके ऑक्सीजन सिलिंडर लखनऊ भेजे जा रहे हैं। दो दिन से मैं रोज रात को एक बार में 40 सिलिंडर लेकर लखनऊ जा रहा हूं। वहां इन्हें अलग-अलग निजी अस्पतालों में पहुंचाया। इतना ही नहीं कई अस्पतालों में जगह न होने पर डॉक्टर अपने घर तक में इनका स्टॉक कर लेते हैं।"

ये बोल हैं एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करने वाले ड्राइवर के। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 170 किलोमीटर दूर शाहजहांपुर में काम करने वाले इस ड्राइवर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वे 13 और 14 अप्रैल की रात काफी व्यस्त रहे। उन्हें एक ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया कराने वाली कंपनी ने कुछ दिनों लिए काम पर रखा और लखनऊ तक सिलिंडर पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

देश में कोरोना की दूसरी लहर बेकाबू होती जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में (17 अप्रैल को) 2 लाख 33 हजार 757 कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आये हैं। वहीं मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत अन्य जिले ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं और अब छोटे शहरों से बड़े शहरों में ऑक्सीजन सिलिंडर की सप्लाई बड़े पैमाने पर की जा रही है। दूसरे राज्यों में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।

Also Read:कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की घमासान पर डॉक्टरों के टास्क फोर्स ने क्या कहा?

शुक्रवार 16 अप्रैल को पीएमओ से जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन आपूर्ति की मौजूदा स्थिति की समीक्षा भी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्यादा संक्रमण वाले 12 राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अगले 15 दिनों के लिए ऑक्सीजन आपूर्ति की वर्तमान स्थिति और इसके अनुमानित उपयोग की विस्तृत समीक्षा भी की। प्रधानमंत्री ने प्रत्येक संयंत्र की क्षमता के अनुसार ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाने का सुझाव दिया।

आसपास के जिलों से राजधानी भेजे जा रहे ऑक्सीजन सिलिंडर

कोरोना से बचाव के लिए उत्तर प्रदेश में मरीजों को जरूरी दवाइयों से लेकर ऑक्सीजन सिलिंडर तक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। 15 दिन पहले तक जहां लखनऊ से ऑक्सीजन सिलिंडर शाहजहांपुर लाए जाते थे, वहीं अब शाहजहांपुर की कंपनियों से ऑक्सीजन सिलिंडर लखनऊ भेजे जा रहे हैं।

शाहजहांपुर में ऑक्सीजन सिलिंडर की स्थिति क्या है, इस बारे में वहां के डिप्टी एसीएमओ डॉ. रोहतास कुमार कहते हैं, "जिले में न तो दवाइयों की कोई कमी है और न हीं ऑक्सीजन की। हमारे यहां सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन की व्यवस्था वाले 3 आईसीयू हैं।"

सीतापुर की एक कंपनी में रखा ऑक्सीजन सिलिंडर

शाहजहांपुर से लखनऊ सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के लिए काम करने वाले ड्राइवर ने बताया, "मैं पिछले 2 दिन से गाड़ी में सिलिंडर लेकर लखनऊ जा रहा हूं। कल (शुक्रवार 16 अप्रैल) को भी दिन में सिलिंडर लेकर लखनऊ गया था।"

चालक ने सरल शब्दों में पूरा गुणा-गणित बताया। "शाहजहांपुर से एक गाड़ी ऑक्सीजन पहुंचाने में लगभग 4500 रुपये से अधिक का खर्चा आ जाता है। निजी अस्पतालों में मरीजों से इसकी व्यवस्था हो जाती है। एक गाड़ी में लगभग 30 सिलिंडर लोड हो जाते हैं। कुछ ड्राइवर तो 40 सिलिंडर तक लोड कर लेते हैं। एक बार में 4500 खर्च करके लखनऊ में तीस से चालीस सिलिंडर की व्यवस्था की जा सकती है।"

सीतापुर से भी लखनऊ और दूसरे जिलों में भेजी जा रही ऑक्सीजन

सिर्फ शाहजहांपुर से ही नहीं, बल्कि सीतापुर से भी ऑक्सीजन सिलिंडरों की खेप लखनऊ समेत आसपास के अन्य जिलों में भेजी जा रही है।

नाम न छापने की शर्त पर सीतापुर जिले के एक ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले व्यवसायी ने बताया, "पहले ऑक्सीजन सिलिंडर लखनऊ से सीतापुर आते थे, लेकिन जब से ये कोविड का संक्रमण दोबारा से बढ़ा है, तब से बाजार में मारा-मारी मची हुई है। जो सिलिंडर 110, 120 प्रेशर का पहले 400 रुपये का बिकता था, वहीं अब हमें फैक्टरी से 800 रुपये का मिल रहा है। ऐसे में हमें मजबूरन चार गुना दामों पर बिक्री करना पड़ रहा है। मेरे पास पहले से ही अस्पतालों से ऑर्डर लगे हुए हैं, लेकिन पिछले 15 दिनों से सप्लाई कम मिलने के कारण हम ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया ही नहीं करा पा रहे हैं। वहीं लोग मनमाने दाम देने को तैयार हैं।"

उत्तर प्रदेश में कोराना के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।

"इस महामारी के दौर में बाराबंकी, लखनऊ, उन्नाव, लखीमपुर खीरी तक सीतापुर जिले से ही सप्लाई जा रही है। अस्पतालों से फोन आते हैं, लेकिन जब सप्लाई कम मिल रही है तो ऐसे में कैसे सप्लाई दी जाए। फिर भी हम जैसे तैसे जुगाड़ करके अस्पतालों को सप्लाई दे रहे हैं। 35 सिलेंडर रिफिल करने के लिए भेजे गए हैं। अब जैसे सप्लाई आती है, वैसे ही भाव का पता चलेगा आज क्या रेट में मिलता है।" व्यवसायी ने आगे बताया।

इस विषय पर गांव कनेक्शन ने सीतापुर की सीएमओ मधु गेरोला से भी बात की। वे ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी की खबर को नकारते हुए कहती हैं, "वैसे तो हर बेड पर ऑक्सीजन की आवश्यकता रहती है। अभी फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। सभी बेडों पर ऑक्सीजन की व्यवस्था है, लेकिन हालात बिगड़ते चले जा रहे हैं, जिसे संभालना मुश्किल हो रहा।"

गुरुवार 15 अप्रैल को सीतापुर में 167 मरीज कोविड पॉजिटिव पाए गए। इन्हें मिलाकर कुल मरीजों की संख्या 5,804 हो गई है। कुल एक्टिव मामले 815 है. जबकि अब तक 88 लोगों की मौत हो चुकी है।

उन्नाव- रिफिलिंग में लग रहे कई घंटे

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भी कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। जिले में सिर्फ एक कोविड हॉस्पिटल सरस्वती मेडिकल कॉलेज (एल-टू) में कोविड के मरीजों के लिए 300 बेड की व्यवस्था की गई है जहां फिलहाल 179 कोविड मरीज भर्ती हैं।

जिले में ऑक्सीजन की कमी की तो अभी तक कोई खबर नहीं है लेकिन इसके रिफिलिंग में 15 से 20 घंटे का समय लग जा रहा।

रस्वती मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक मनोज सिसोदिया बताते हैं किएल-टू कोविड-19 हॉस्पिटल में 179 मरीज भर्ती हैं, जिनके लिए औसतन प्रतिदिन 70 सिलिंडर ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। इस समय अस्पताल में 170 सिलिंडर में से 80 ऑक्सीजन सिलेंडर ही मौजूद हैं।

मामले बढ़े तो बाराबंकी में भी हो सकती है दिक्कत

बाराबंकी में एल-2 के तहत हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सफेदाबाद में इलाज चल रहा है। यहां कुल बेडों की संख्या 330 है और फिलहाल 13 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा एल-3 के तहत मेया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज, गदिया काम कर रहा है। यहां कुल 630 बेड हैं और 38 बेड पर मरीज एडमिट हैं।

गुरुवार 16 अप्रैल को शहर में कुल 307 पॉजिटिव मरीज मिले। इसे मिलाकर अब तक कुल मरीजों की संख्या 9903 हो गई है। सक्रिय मामलों की की संख्या 1681 है। जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर की स्थिति क्या है, इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी. के. एस चौहान ने गाँव कनेक्शन को बताया, "अभी हमारे जिले में पर्याप्त ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था है, लेकिन जिस तरह से चारों तरफ लगातार कोरोना केस बढ़ रहे हैं और सिलिंडरों की मांग हो रही है। निश्चित तौर पर आगे दिक्कत हो सकती है।"

मध्य प्रदेश में भी कमी

ऐसा नहीं है कि ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी बस उत्तर प्रदेश में ही है। आसपास के राज्यों में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। उत्तर प्रदेश से सटे मध्य प्रदेश के जिला सतना के जिला अस्पताल में इस समय 115 मरीजों का इलाज चल रहा है। जिनमें से 60 की स्थिति गंभीर है।

मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन सिलिंडरों की कमी को देखते हुए 15 अप्रैल को कांग्रेस के नेता जीतू पटवारी, कुनाल चौधरी और पीसी शर्मा ने खाली आक्सीजन सिलिंडर लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। (फोटो- पीसी शर्मा के ट्वीटर हैंडल से)

जिले में कुल संक्रमितों की संख्या 4723 पर पहुंच गई है। जबकि 472 बेडों पर ही ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था है।

इस बारे में एक ऑक्सीजन रिफलिंग प्लांट के प्रबंधक त्रिपुरारी सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया "नागपुर से लिक्विड ऑक्सीजन मांगते थे। वहां से सप्लाई बंद है। इसलिए छत्तीसगढ़, हरियाणा पर निर्भर हैं। सतना से ही रीवा, पन्ना आदि जिलों में रिफिल ऑक्सीजन सिलेंडर जाते हैं।" कोविड काल से पहले तक एक सप्ताह में 400 सिलेंडर की मांग थी इसमें व्यवसायिक भी शामिल है लेकिन अब प्रतिदिन 600 सिलेंडर तक डिमांड पहुंच गई है। प्लांट की क्षमता 400 की ही है।"

केंद्र सरकार का 100 फीसदी ऑक्सीजन सिलिंडर के उत्पादन का दावा

सरकार की ओर से गुरुवार 15 अप्रैल को जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक पिछले साल देश में कोरोना संकट बढ़ने और इलाज में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने मार्च 2020 में कई मंत्रालयों, विभागों और अधिकारियों को मिलाकर एक उच्चाधिकार प्राप्त समूह का गठन किया। इस समूह को ईजी-1 नाम से जाना जाता है। यह समूह देश में मेडिकल ऑक्सीजन सहित इलाज में जरूरी मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।

प्रेस से जारी वक्तव्य के अनुसार, समूह का कहना है कि इस समय देश में रोजाना करीब 7127 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। जरूरत पड़ने पर स्टील संयंत्रों में बचत के रूप में रखे गए ऑक्सीजन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। देश के पास प्रतिदिन 7127 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन करने की क्षमता है और ईजी-2 के निर्देश पर संयंत्र पिछले दो दिनों से अपनी क्षमता का 100 फीसदी उत्पादन कर रहे हैं।

Also Read:पंचायत चुनाव 2021: लोगों की भीड़ क्या बढ़ा सकती है कोरोना का संक्रमण?

समूह का कहना है कि इस समय मेडिकल ऑक्सीजन का सर्वाधिक इस्तेमाल महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान में हो रहा है। समूह के मुताबिक गत 12 अप्रैल को देश में मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 3842 मीट्रिक टन थी। यह प्रतिदिन के उत्पादन का 54 प्रतिशत है। इसके अलावा देश के उत्पादन संयंत्रों के पास 50,000 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन का स्टॉक मौजूद है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोगों को दिलाया भरोसा

इन सबके बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को भरोसा दिलाया है कि प्रदेश में न तो दवाओं की कमी है और न ही बेड की। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना की पहली लहर कह तरह हम दूसरी लहर को भी नियंत्रित कर लेंगे।

इनपुट - सीतापुर से मोहित शुक्ला, शाहजहांपुर से रामजी मिश्रा, उन्नाव से सुमित यादव, मिर्जापुर और वाराणसी से बृजेंद्र दुबे, बाराबंकी से वीरेंद्र सिंह और मध्य प्रदेश के सतना से सचिन तुलसा त्रिपाठी।

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.