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दो महीने मुफ्त राशन योजना पर खाद्य विशेषज्ञों ने कहा- 2 महीने नाकाफी, 6 महीने तक चले तो बने बात

कोरोना की दूसरी लहर के बीच कई राज्यों में लगे लॉकडाउन को देखते हुए पिछले दिनों केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मई और जून में 5 किलो अतिरिक्त अनाज देने की घोषणा की है। इस पर खाद्य विशेषज्ञों ने योजना को बढ़ाने और बिना राशन कार्ड वालों को राशन देने की मांग की है।

Shivani GuptaShivani Gupta   27 April 2021 9:39 AM GMT

दो महीने मुफ्त राशन योजना पर खाद्य विशेषज्ञों ने कहा- 2 महीने नाकाफी, 6 महीने तक चले तो बने बात

पिछले साल लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में गरीबों को राशन नहीं मिल पाया था। फोटो: पिक्साबे

देश में कोविड के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं और पिछले कुछ दिनों में इनकी रोजाना की संख्या 3 लाख से ऊपर दर्ज की जा रही है। ऐसे में कई राज्यों में लगे लॉकडाउन से लोगों का कामकाज प्रभावित हुआ है। कोई भूखा न रहे है ऐसे में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राशन कार्ड धारकों को अगले दो महीनों (मई और जून) के लिए पात्रता से अधिक (प्रति व्यक्ति पांच किलो) अनाज दिया जाएगा।

सरकार द्वारा मंजूर की गई इस योजना के तहत मई व जून में प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त अनाज लगभग 80 करोड़ लोगों को दिया जाएगा। सरकार ने पिछले साल (2020) भी लॉकडाउन लगने पर कुछ दिनों बाद 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' के तहत सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली में अतिरिक्त अनाज देना शुरू किया था। यह योजना नवंबर 2020 तक चली थी।

हालिया इस घोषणा का स्वागत करते हुए, खाद्य अधिकारों को लेकर काम करने वाली एक संस्था राइट टु फूड अभियान के कार्यकर्ताओ ने इस योजना को 2 महीने से ज्यादा चलाने की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दो महीने से ज्यादा समय तक राशन दिया जाए और पांच किलो से अधिक राशन दिया जाए। फोटो: पिक्साबे

दिल्ली स्थित डॉ. बी. आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपा सिन्हा ने गांव कनेक्शन से कहा, "हम इस कदम का स्वागत करते हैं। पांच किलो खाद्यान्न अच्छा है, लेकिन यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) तक ही सीमित है। इससे बिना राशन कार्ड वालों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।" उन्होंने आगे कहा कि इसकी घोषणा सिर्फ दो महीने के लिए की गई है, जिसे 6 महीने तक बढ़ाया जाना चाहिए। क्योंकि जिनकी नौकरी गई है उसे वापस मिलने में वक्त लगेगा।

सिन्हा राइट टु फूड कैंपेन से जुड़ी हुईं हैं और आगे बताती हैं, "इस साल दाल इसमें शामिल नहीं है, जबकि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

विपक्षी दलों और खाद्य विशेषज्ञों की ओर से किया गया आग्रह

पिछले साल कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत 25 मार्च को की थी। तब इस राहत पैकेज में राशन कार्ड रखने वाले गरीब लाभार्थी परिवारों को 5 किलो अतिरिक्त चावल या गेहूं और एक किलो अतिरिक्त दाल शामिल थीं। 26,000 करोड़ रुपये खर्च वाली इस योजना को पिछले साल नवंबर तक बढ़ाया गया था।

इस महीने की शुरुआत में 3 राज्यों की सरकार (राजस्थान, उत्तराखंड और केरल), नेशलिस्ट कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार समेत कई विपक्षी दलों के नेता, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगाता रॉय ने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना शुरू करने का आग्रह किया था।

कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए देश के कई राज्य की सरकारों ने पूर्ण लॉकडाउन, आंशिक लॉकडाउन वीकेंय लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूरों का काम छूट गया है ओर बड़ी संख्या में वे अपने घर की ओर निकल रहे हैं। 2020 में भी लॉकडाउन का सबसे अधिक असर गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ा था। लाखों लोगों का रोजगार छूट गया और लोगों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया था।

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पिछले साल नवंबर में मुफ्त खाद्यान्न योजना के खत्म होने पर राइट टु फूड कैंपेन के कार्यकर्ताओं ने इसे दोबारा शुरू करने के लिए केंद्र सरकार को लिखा था।

ओडिशा में राइट टु फूड कैंपेन के प्रमुख सदस्य समीर पांडा ने गांव कनेक्शन को बताया, "पिछले साल नवंबर के बाद हमने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम को फिर से शुरू करने का आग्रह किया था।" उन्होंने आगे कहा,"एफसीआई के पास पर्याप्त खाद्यान्न है, लेकिन इसके भंडारम के लिए ज्यादा गोदाम नहीं हैं। ऐसे में जब लोगों को अतिरिक्त राशन की आवश्यकता है, तो इस योजना को फिर से शुरू करने की जरूरत है।"

केंद्र सरकार ने पीएम गरीब कल्यान अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन देने की घोषणा की है। फोटो: पिक्साबे

महाराष्ट्र में 5,476 करोड़ का पैकेज दिलाएगा राहत

बीते 13 अप्रैल को राज्य में मिनी लॉकडाउन की घोषणा करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 5,476 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी। इसमें विभिन्न श्रेणियों के लाभार्थियों जैसे महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं, विकलांगों, ऑटो चालकों और आदिवासी समुदायों को वित्तीय सहायता देना शामिल है। इस पैकेज के तहत करीब 70 मिलियन लाभार्थियों को एक माह तक 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल निशुल्क दिया जाना है।

इसके अलावा राज्य सरकार की योजना 'शिव भूमिपूजन थाली' के तहत 200,000 थाली हर दिन मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी और संजय गांधी निराधार योजना, श्रवणबल योजना और केंद्र प्रायोजित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था सेवानिवृत्ति योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा सेवानिवृत्ति योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता सेवानिवृत्ति योजना के तहत 3.5 मिलियन लाभार्थियों को 1,000 रुपये दिए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में केंद्र की तर्ज पर दो महीने मिलेगा मुफ्त अनाज

महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने भी गरीब कल्याण अन्ना योजना के तहत अतिरिक्त पांच किलो अनाज देने की भी घोषणा की है। राज्य में लगभग 14.5 मिलियन गरीबों को अगले दो महीनों (मई और जून) के लिए अतिरिक्त 5 किलो अनाज मिलेगा।

राज्य में 14.5 मिलियन लोगों को खाद्यान्न वितरित करने के लिए, हर महीने कुल 750,000 मीट्रिक टन खाद्यान्न की जरूरत पड़ती है। राज्य की प्रमुख सचिव (खाद्य एवं रसद) वीना कुमारी मीणा के मुताबिक, "सभी सुरक्षा प्रोटोकाल को ध्यान मे रखते हुए नोडल अधिकारी के देखरेख में सभी राशन की दुकानों पर राशन का वितरण किया जाएका। राशन का वितरण पिछले साल लॉकडाउन के दौरान किए गए बायोमेट्रिक सर्वे के माध्यम से किया जाएगा"।

गाँव कनेक्शन के सर्वे में सामने आए थे चौकाने वाले आंकड़े

गाँव कनेक्शन द्वारा किया गया सर्वे देश के 20 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के 179 जिलों में 25,000 से ज्यादा ग्रामीणों के बीच हुआ। 30 मई से 16 जुलाई के बीच चले इस सर्वे में ग्रामीणों ने लॉकडाउन से उपजे हालात को गांव कनेक्शन के साथ साझा किया।


सर्वे में पाया गया था कि राशन ना मिलने की दिक्कत उन लोगों को अधिक हुई, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था। इस सर्वे के अनुसार 25,371 उत्तरदाताओं में 83 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनके पास राशन कार्ड था। इनमें से 71 फीसदी लोगों को राशन मिला, जबकि 29 फीसदी लोगों को राशन कार्ड होने के बावजूद भी मुफ्त राशन की सुविधा नहीं मिली।

इस सर्वे में यह भी पता चला कि उन जिलों में लोगों को मुफ्त राशन लेने में अधिक दिक्कत हुई जो लोग रेड जोन में थे। सर्वे के मुताबिक जहां ग्रीन जोन में 77 फीसदी लोगों को मुफ्त राशन मिला, वहीं रेड जोन में रहने वाले सिर्फ 60 फीसदी लोगों को ही यह सुविधा मिल पाई। जबकि ऑरेन्ज जोन में रहने वाले 70 फीसदी लोगों को राशन मिला।

खबर को अंग्रेजी में यहां पढ़ें

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