भूमिगत तेल और गैस की आसानी से निकालने के लिए विकसित हुए विशेष पॉलिमर
यह पॉलिमर एक्रिलामाइड आधारित पॉलिमर है। एक्रिलामाइड एक प्रकार का रसायन है। ये पॉलिमर सुनिश्चित करते हैं कि भूमिगत तेल को बाहर निकालते समय घर्षण कम से कम हो, जिससे तेल को आसानी से निकाला जा सके।
India Science Wire 31 July 2021 9:55 AM GMT

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के शोधकर्ताओं की टीम ने "स्पेशलिटी फ्रिक्शन रेड्यूसर" पॉलिमर विकसित किए हैं, जो भूमिगत कुओं से तेल निकालने में मदद कर सकते हैं।
इस शोध से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर संदीप डी कुलकर्णी ने बताया है कि ये बड़े कृत्रिम पॉलिमर विशेष रूप से घर्षण घटाने वाले पॉलीमर हैं। उन्होंने कहा कि इनकी विश्व में काफी अधिक मांग है लेकिन दुर्भाग्य से भारत इस उत्पाद के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा नहीं है।
उन्होंने बताया कि देश में विभिन्न प्रकार के पॉलिमर बनाने वाले कई संस्थान हैं, लेकिन इस प्रकार का पॉलिमर पहली बार तैयार किया गया है। यह पॉलिमर एक्रिलामाइड आधारित पॉलिमर है। एक्रिलामाइड एक प्रकार का रसायन है। ये पॉलिमर सुनिश्चित करते हैं कि भूमिगत तेल को बाहर निकालते समय घर्षण कम से कम हो, जिससे तेल को आसानी से निकाला जा सके।
प्रोफेसर कुलकर्णी ने कहा कि पिछले दशक के बाद से वैश्विक तेल और गैस उद्योग भूमिगत तेल निकालने के लिए फ्रैकिंग जैसे नए तरीकों पर तेजी से भरोसा कर रहा है। लेकिन कई स्थान ऐसे है जहां ड्रैग रिडक्शन के अधिक होने के कारण और तरल पदार्थो के प्रवाह गुणों के कारण तेल निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में टीम ने ड्रैग रिडक्शन और तरल पदार्थो के प्रवाह गुणों की गणना करके विशेष पॉलिमर विकसित किए हैं।
फ्रैकिंग वह प्रक्रिया है जिसमें जमीन की नीचे से जरूरी तेल रसायन एवं गैस को बहुत ज्यादा दबाव देकर निकाला जाता है। वहीं, ड्रैग रिडक्शन एक ऐसी भौतिक प्रक्रिया है, जिसके कारण घर्षण कम हो जाता है और द्रव प्रवाह बढ़ जाता है।
यह शोध कार्य मुख्य रूप से आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र एवं यूएसए में स्थित पीएफपी इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ अशोक देसरकर द्वारा प्रायोजित किया गया था। टीम ने ड्रैग रिडक्शन मूल्यांकन के लिए ऑटोमैटिक फ्लो लूप भी बनाया गया है जो देश में अपनी तरह का पहला है।
शोध टीम को बधाई देते हुए आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा है कि स्वदेशी नवाचार पर आधारित इस मेक-इन-इंडिया अभ्यास के लंबे समय में बढ़ने की उम्मीद है। शोधकर्ताओं को विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्रों को लाभान्वित करने के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ इसे एक वास्तविक रूप देने की आवश्यकता है।
इस परियोजना के प्रायोजक और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र डॉ देसरकर ने कहा है कि आईआईटी में अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को समाज और देश के लिए वास्तविक मूल्यवर्धन सुनिश्चित करना चाहिए। इस तरह के नवाचार मेक-इन-इंडिया को मजबूत करेंगे और विशेष उत्पादों की एक श्रृंखला के लिए इंडिया आईएनसी. को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बना सकते हैं।
इस उत्पाद को पहली बार वैश्विक तेल और गैस उद्योग के लिए लागत प्रभावी मूल्य पर भारत में निर्मित किया जा रहा है। नवाचार के व्यावहारिक प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में संस्थान ने सहयोगात्मक कार्य के माध्यम से इस उत्पाद के 18 टन का निर्यात पहली बार किसी भारतीय निर्माता द्वारा वैश्विक तेल और गैस उद्योग को किया है।
प्रोफेसर कुलकर्णी के नेतृत्व वाली इस टीम में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग अनुसंधान विभाग के शोध छात्र नवनीत कुमार कोरलेपारा और रसायन विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर किरण गोर शामिल हैं।
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