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बाढ़ और मौसमी तबाही: 2020-21 में कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुआ था फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान, इस साल भी कई राज्य चपेट में

बाढ़ और मौसमी आपदाओं से भारत में हर साल भारी नुकसान होता है। सरकार ने लोकसभा में बताया है कि 2020-21 में देश में 66.55 लाख हेक्टेयर में फसल क्षतिग्रस्त हुई थी। इस बार अकेले महाराष्ट्र में इस वर्ष 213 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल के नुकसान की आशंका है। बिहार में जून महीने से ही नदियां तबाही मचा रही हैं।

Arvind ShuklaArvind Shukla   30 July 2021 1:36 PM GMT

बाढ़ और मौसमी तबाही: 2020-21 में कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुआ था फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान, इस साल भी कई राज्य चपेट में

बाढ़, अतिवृष्टि आदि से भारत में हर साल करोड़ों रुपए की फसलों का नुकसान है। इस साल भी कई राज्यों में भारी नुकसान की आशंका है। फोटो- अमोल पाटिल

महाराष्ट्र के सांगली जिले के करंदवाड़ी गांव में रहने वाले अमोल पाटिल ने इस वर्ष 12 एकड़ खेत में हल्दी, सोयाबीन और गन्ना बोया था, उनकी पूरी खेती पिछले हफ्ते आई बाढ़ में तबाह हो गई।

"21-22 जुलाई की रात पानी हमारे इलाके में पहुंचा था। मेरी हल्दी और सोयाबीन पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। 2-3 एकड़ में गन्ने को भी भारी नुकसान हुआ है। पूरे इलाके में यही हाल है। किसानों की पूरी की पूरी फसलें बर्बाद हुई है। खेती में नुकसान का भी सर्वे चल रहा है।" अमोल पाटिल (41 वर्ष) फोन पर बताते हैं। पाटिल से जब गांव कनेक्शन की बात हुई वो गांव वालों के साथ खेतों को देखने गए थे। उनकी आवाज़ में मायूसी थी, क्योंकि उनके पड़ोसी जिले सतारा के कोईना बांध से 31 जुलाई को फिर पानी छोड़ा जाने वाला है।

"अभी हफ्ते भर में जो फसलें बची रह गई हैं वो आगे बचेंगी कि नहीं पता क्योंकि कोईना बांध से पानी छोड़ा गया तो यहीं आएगा। अभी सरकार का पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्य पर है। जिनके घरों में पानी गया था उन्हें 10-10 हजार रुपए मिले हैं बाकि खेती वालों के लिए सर्वे हो रहा है।" पाटिल आगे बताते हैं।

महाराष्ट्र के सांगली जिले में अमोल पाटिल के खेतों में भरा पानी। फोटो via अमोल पाटिल

महाराष्ट्र में 4 लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की आशंका

भारी बारिश, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से भारत के एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में हर साल तबाही आती है। जिसमें किसानों की खड़ी फसलों और जमीन का बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। साल 2021 की बात करें तो महाराष्ट्र (Maharashtra) के रायगढ़, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, रत्नागिरी, ठांडे में भारी नुकसान हुआ है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के अनुसार राज्य 213 लोगों की मौत हुई। राज्य के कृषि मंत्री दादाजी भूसे के मुताबिक करीब 4 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हो सकती है। लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के जवाब के मुताबिक साल 2020-21 में महाराष्ट्र में जल/मौसम और संबंधी प्राकृतिक आपदाओं और घटनाओं से 11.28 लाख हेक्टेयर फसल क्षतिग्रस्त हुई थी। बाढ़ और अतिवृष्टि से फसल बर्बादी के मामले में महाराष्ट्र देश में दूसरे नंबर पर था। महाराष्ट्र इस अतिवृष्टि से भी कई जिलों में भारी नुकसान हुआ था।

संसद के मानसून सत्र के दौरान 27 जुलाई को लोकसभा में यूपी के बाराबंकी जिले से BJP सांसद उपेंद्र सिंह रावत के बाढ़ आदि से फसल नुकसान संबंधी लिखित जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने सदन को बताया कि साल 2020-21 के दौरान देश के 15 राज्यों में 66.55 लाख हेक्टेयर फसल क्षतिग्रस्त हुई थी। इस दौरान सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य कर्नाटक (14.32 लाख हेक्टेयर) में हुआ था, जिसके बाद महाराष्ट्र में 11.28 लाख हेक्टेयर, हर साल बाढ़ का देश झेलने वाले राज्य बिहार (Bihar) में 7.14 लाख हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ था तो आंध्र प्रदेश में 6.81 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 6.68 लाख हेक्टेयर एरिया में फसल क्षतिग्रस्त हुई थी। पूरी रिपोर्ट के लिए ग्राफ देखिए-


बिहार में इस साल बाढ़ से 14 जिलों के 16 लाख लोग प्रभावित

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार बिहार, बाढ़ और बारिश से फसल नुकसान के मामले में तीसरे नंबर था। बिहार में सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, कटिहार, मधुबनी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, किशनगंज अररिया, पूर्णिया समेत 14 जिले भीषण रूप से इस बार भी प्रभावित हैं। बिहार में इस वर्ष फसलों का कितना नुकसान हुआ, इसका आकलन नहीं किया गया है लेकिन बिहार के राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की 22 जुलाई तक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 14 जिलों के 16 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

नेपाल से आने वाली कोसी समेत दर्जनों नदियां हर वर्ष न सिर्फ बिहार में हजारों एकड़ फसल नुकसान करती हैं, अपनी अपने साथ लाई गाद और रेत से भी हजारों एकड़ फसल और कृषि योग्य जमीन का नुकसान करती हैं। बिहार में जब राज्य आपदा विभाग ने 16 लाख लोगों के प्रभावित होने का आंकड़ा दिया, उसके 2-3 दिन पहले ही सहरसा जिले की केदली पंचायत के चार गांव पहाड़पुर, रामपुर, छतवन और असैय गांव के 500 से अधिक परिवारों में से 100 लोगों के खेत और जमीन कोसी नदी में समा चुके थे। ग्रामीणों का कहना था का कहना है कि, 'कटाव की रफ्तार यही रही तो आने वाले कुछ दिनों में इस पंचायत के चार गांव का अस्तित्व ही मिट जाएगा।'


यूपी की बात करें तो यहां भी सरयू (घाघरा), गंगा, शारदा, राप्ति समेत कई नदियां किसानों के लिए घातक साबित होती हैं। लखीमपुर, सीतापुर, बाराबंकी, बिजनौर, मेरठ आदि में इस वर्ष जुलाई माह में काफी नुकसान की खबर है। लोकसभा में दी गई केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार साल 2020-21 में उत्तर प्रदेश में 1.08 लाख हेक्टेयर का नुकसान हुआ है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 27 जुलाई को सदन में बताया कि कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग प्राकृतिक आपदाओं और निवार्य जोखिमों के कारण हुए फसल के नुकसान और अधिसूचित बीमा कवरेज एवं वित्तीय सहायता के लिए पुर्नगठन मौसम आधारित फसल बीमा योजना के साथ खरीफ 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कार्यान्वयन कर रहा है। लेकिन ये बीमा योनजाएं स्वैच्छिक हैं। यानी किसान की इच्छा पर निर्भर है।

कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार फसल बीमा योजना 2016-17 से ही लागू हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की बीमा राशि के साथ ही 229.42 लाख हेक्टेयर भूमि का बीमा कराया गया है। खरीफ 2020 तक लगभग 37.38 किसानों को 2810.62 करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया जा चुका है।

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बिहार के सुपौल जिले में भरा कोसी का पानी। फोटो- राहुल झा

कैसे मिलती है प्रभावित राज्यों को राहत

केंद्र सरकार के मुताबिक बाढ़ आदि आपदाओं के लिए राज्यों के पास भारत सरकार द्वारा अनुमोदित फंड होता है। जिसे राज्य अपने राज्य आपदा मोचन निधि (sdrf) से राहत का उपाय करती है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने लोकसभा में कहा कि राज्य सरकार की मांग पर सत्यापित होने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि एनडीआरएफ से अतिरिक्त धन का मुहैया कराया जाता है। इसके लिए अतिरिक्त एक अंतर मंत्रालयी कमेटी (आईएमसीटी) का गठन किया जाता है। जो नुकसान और धन की आवश्यकता का आकलन करती है, उसकी सिफारिश पर राष्ट्रीय कार्यसमिति की उप समिति विचार करती है, जिसके बाद उच्च समिति धन को मंजूरी देती है। आपदा के अतिरिक्त किसानों के नुकसान के मामले में फसल बीमा योजनाओं के जरिए भी किसानों की क्षतिपूर्ति होती है।


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