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यूपी पंचायत चुनाव: कोविड की वजह से 706 शिक्षकों की मौत, शिक्षकों/कर्मचारियों ने किया मतगणना का बहिष्कार

राज्य स्तरीय शिक्षक संघ का आरोप है कि उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों के दौरान ड्यूटी के कारण कम से कम 706 सरकारी स्कूल शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की मृत्यु हुई है। शिक्षकों सहित विभिन्न श्रमिक संघों के 20 लाख से अधिक सदस्यों ने दो मई की मतगणना का बहिष्कार किया है।

Shivani GuptaShivani Gupta   1 May 2021 12:45 PM GMT

यूपी पंचायत चुनाव: कोविड की वजह से 706 शिक्षकों की मौत, शिक्षकों/कर्मचारियों ने किया मतगणना का बहिष्कार

पंचायत चुनावों की मतगणना रविवार दो मई को होगी। (सभी तस्वीरें- गांव कनेक्शन)

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों सहित विभिन्न श्रमिक संघों के 20 लाख से अधिक सदस्यों ने हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों के लिए आयोजित 2 मई की मतगणना का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

दिनांक 30 अप्रैल को राज्य चुनाव बोर्ड के चुनाव आयुक्त को संबोधित एक पत्र में लखनऊ स्थित संघ – 'कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी और पेंशनर्स अधिकार मंच' ने कहा है कि चुनाव आयोग एसोसिएशन के सदस्यों की सुरक्षा करने में विफल रहा है। संघ का कहना है कि उनके जिन सदस्यों को चुनावी ड्यूटी में लगाया गया था, उनमें से कई संक्रमित हो गए, जबकि सैकड़ों लोगों की मृत्यु भी हो गई।

राज्य में चार चरण में होने वाले पंचायत चुनावों की शुरुआत 15 अप्रैल को हुई थी। अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न हुआ। मतों की गिनती और परिणामों की घोषणा 2 मई यानी कल होनी है।

संघ ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने चुनाव पूर्व (12 अप्रैल 2021) ही राज्य सरकार से कहा था कि कर्मचारियों व शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चुनाव स्थगित कर दिया जाए, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और टीकाकरण के बिना ही कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर भेज दिया गया। नतीजतन कई सदस्य संक्रमित हो गए और हजारों श्रमिकों और शिक्षकों की असामयिक मृत्यु हो गई।

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संघ का आरोप है कि कर्मचारियों के संक्रमित होने के बावजूद उन्हें चुनाव प्रशिक्षण और मतगणना के लिए भेजा जा रहा है, जो कि "मानव अधिकारों" का खुला उल्लंघन है। मतगणना के बहिष्कार के अलावा पीड़ित कर्मचारियों और शिक्षकों के परिवारों को 50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता मुहैया कराने की भी मांग की गई है।

कोविड की वजह से 706 शिक्षकों की मौत

29 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए एक अन्य पत्र में उत्तरप्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ जो कि एक राज्य स्तरीय शिक्षक संघ है, के अध्यक्ष दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि इस महीने प्रशिक्षण और पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण की वजह से कम से कम 706 शिक्षकों/कर्मचारियों की मौत हुई है।


शर्मा ने गांव कनेक्शन को आगे बताया, "राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिक्षक संघ सहित कर्मचारी संघ के बीस लाख सदस्यों ने 2 मई को मतगणना का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।"

जिन संघों ने दो मई की मतगणना को टालने की मांग की है, उनमें उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, मंत्री कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ और उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ शामिल हैं।

सरकार ने आरोपों को किया खारिज

एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवेदी ने शिक्षकों की मौत के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "शिक्षकों की मृत्यु के बारे में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कोई विशेष ऑडिट नहीं किया गया है। यह कहना गलत है कि चुनावी ड्यूटी में लगे सभी लोगों की मौत कोरोना की वजह से हुई है। यह कैसे पता चलेगा कि जब शिक्षक चुनावी ड्यूटी में आए तब वे संक्रमित नहीं थे। और ऐसा भी हो सकता है कि शिक्षक, चुनावी ड्यूटी से लौटने के बाद, कुछ अन्य कारणों से संक्रमित हो गए हों। हमें इसके बारे में कैसे पता हो सकता है।"


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मंत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा: "अकेले सरकारी शिक्षक ही चुनावी ड्यूटी नहीं कर रहे थे। इसमें अन्य विभागों के भी लोग शामिल थे। शिक्षकों के संक्रमित होने के संबंध में हमारे पास कोई डेटा नहीं है, और मुझे नहीं पता कि शिक्षक संघ के नेता ने इन 700 शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची कैसे तैयार की है।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी यूपी पंचायत चुनाव में अपनी जान गंवाने वालों के लिए 50-50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है।

अनुवाद- शुभम ठाकुर

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