बंगाल चुनाव रिजल्ट 2026: रुझानों में 200 के पार पहुंची BJP, घुसपैठ से महिला सुरक्षा तक ये मुद्दे रहे हावी
Gaon Connection | May 04, 2026, 18:17 IST
पश्चिम बंगाल में मतगणना जारी है। रुझानों के अनुसार बीजेपी बड़ी बढ़त बनाए हुए है। घुसपैठ, एसआईआर, नारी सुरक्षा, राज्य का विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चुनाव में हावी रहे। बीजेपी ने इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। केंद्रीय योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने का वादा किया गया। गौतस्करी भी एक अहम मुद्दा रहा।
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भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक शाम 5:44 बजे तक की मतगणना में पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर तस्वीर काफी हद तक साफ होती दिख रही है। रुझानों के अनुसार बीजेपी 202 सीटों पर आगे चल रही है जबकि तृणमूल कांग्रेस 85 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। आइये जानते हैं कि इस चुनाव में कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा हावी रहे?
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों पर घुसपैठिया, एसआईआर, नारी सुरक्षा, बंगाल का विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों का व्यापक असर देखने को मिला। इन मुद्दों को बीजेपी ने टीएमसी के खिलाफ जोर-शोर से उठाया।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने और घुसपैठ रोकने का मुद्दा चुनाव में काफी गरम रहा। बीजेपी लगातार यह मुद्दा उठाती रही कि सीमा पर राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा रही है जिससे फेंसिंग का काम पूरा नहीं हो सका। इस मुद्दे को बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ा गया।
एसआईआर का मुद्दा भी कई सीटों पर प्रभावी रहा। इसके चलते करीब 34 लाख लोग वोट नहीं डाल पाए। इनमें से अधिकतर प्रभाव टीएमसी की सीटों पर पड़ा। बंगाल में रह रहे अवैध लोगों की जांच के लिए एसआईआर की गई थी।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना से लेकर संदेशखाली तक के मुद्दों को बीजेपी ने प्रमुखता से उठाया। राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड बनाने की बात भी कही गई।
केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक टकराव के कारण कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं हो सकीं। इसका असर आम लोगों तक लाभ न पहुंचने के रूप में देखा गया। बीजेपी ने वादा किया कि सत्ता में आने के बाद सभी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
राज्य में कानून-व्यवस्था भी बड़ा मुद्दा रहा। आम लोगों ने कहा कि टीएमसी का एक सिंडिकेट काम करता है जिससे वे परेशान हैं। बीजेपी ने कानून-व्यवस्था पर श्वेतपत्र लाने का वादा किया। गौतस्करी का मुद्दा भी चुनाव में प्रमुख रहा।
टीएमसी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप भी चुनावी बहस का हिस्सा बने। आरोप था कि यह संगठित तरीके से काम करता है। बीजेपी ने अपने 15 साल के कार्यकाल पर श्वेतपत्र जारी करने की बात कही।
घुसपैठ रोकने, महिलाओं को समान अधिकार देने और मुस्लिम महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए कॉमन सिविल कोड का मुद्दा भी चर्चा में रहा। इसे कानूनी एकरूपता से जोड़ा गया।
उत्तर बंगाल के लोगों का कहना रहा कि यहां विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बीजेपी ने उत्तर बंगाल में आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान स्थापित करने का वादा किया।
भारत में पैदा होने वाली कुल चाय का लगभग 30 प्रतिशत पश्चिम बंगाल में होता है। इसके बावजूद चाय बागानों और वहां काम करने वाले मजदूरों की स्थिति खराब बताई गई। दोनों पार्टियों ने चाय बागानों के पुनर्जीवन और महिला मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने का वादा किया।
किसानों को कृषि योजनाओं का पूरा लाभ न मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। राज्य में 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने और मछली उत्पादन बढ़ाने का वादा बीजेपी ने किया। साथ ही जूट उद्योग के ठप होने का कारण जूट उत्पादन में कमी बताया गया और इसे बढ़ाने के वादे भी किए गए।