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लॉकडाउन के चलते पाली के पान किसानों को लग गया लाखों का चूना

यहां के पाँच सौ किसान पान की खेती करते हैं, इन परिवारों के करीब तीन हजार लोगों की रोजी रोटी पान की खेती से चलती है। लॉकडाउन के दौरान पान की खेती करने वाले किसानों का नुकसान किसी की नजर में नहीं आया।

अरविंद शुक्ला/अरविंद सिंह परमार

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)। लॉकडाउन के दौरान सब्जी और फल की खेती करने वाले किसानों के साथ ही ऐसी कई फसलों को काफी नुकसान पहुंचा, जिन पर लोगों की नजर ही नहीं गई। पान की खेती करने वाले किसान उन्हीं लोगों में से एक हैं, जिन्हें लॉकडाउन में लाखों रुपए का नुकसान हुआ।

बुंदेलखंड में महोबा और पाली का पान पूरे देश में प्रसिद्ध है। ललितपुर जिले के पाली में 500 से ज्यादा बरेजा लगे हैं, किसानों के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान उन्हें रोजाना करीब 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ। लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान से अभी तक बुंदेलखंड के पान किसान उबर नहीं पाए।

"लॉकडाउन के दौरान कम से कम पांच सौ रुपए दिन का लॉस (नुकसान) तो है ही, पूरा परिवार भी इसी काम में लगा रहता है। पांच-छह सौ रुपए दिन के मिलते थे, अब दिन के सौ रुपए मिल जाए, इससे ज्यादा कुछ नहीं है, "इस बार पान में हुए नुकसान को बताते हुए भरत चौरसिया लॉकडाउन को ही जिम्मेदार मानते हैं।

लॉकडाउन के दौरान पाली के दर्जनों पान किसानों से 'गाँव कनेक्शन टीम' ने बातचीत की, इस दौरान पान से हुए नुकसान को समझने की कोशिश की।


पान के पुराने खराब (दागी) पत्तों को दिखाते हुए ललितपुर जिले के पाली कस्बे में रहने वाले भरत चौरसिया कहते हैं, "देखो इस साल तो पहले ठंड की तबाही से पान की फसल बर्बाद हुयी थी, जो कुछ घर का पैसा लगाया था वो लॉकडाउन में फंस गया, लॉकडाउन से पान खत्म हो गया।"

लॉकडाउन से पहले ठंड (सर्दी) पान की खेती पर अपना कहर बरसा चुकी है, रही सही कसर देश व्यापी लॉकडाउन ने पूरी कर दी। अपने पान बरेजे के अंदर निराई गुड़ाई करते युवा किसान भरत चौरसिया पान के नुकसान से काफी चिंतित दिखे।

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पान के नये पत्तों को दिखाते हुऐ भरत चौरसिया कहते हैं, "माल बिक नहीं रहा तो क्या करें, हम पान दस हजार रुपए प्रतिदिन बेचते थे अब दो रुपया दिन भी नहीं बिक रहा, लॉकडाउन से परेशानी हो गई, पुराना पान फंसा हैं। ना ये पुराना बिक रहा ना ही नया। महंगे बिकने वाले ये पान ढाई-सौ से तीन-सौ रुपए सैकड़ा बिकते थे, ये भी हैं जो खराब होने लगा पूरा का पूरा पान। इन दिनों जो पान नहीं बिके वो पान खराब हो गए।"

पान की खेती में जुड़े किसानों के पास एक सवा एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं हैं, करीब 25 प्रतिशत किसानों के पास खुद की जमीन हैं बाकी 75 प्रतिशत भूमिहीन हैं। ये किसान जमीन ठेका (एग्रीमेंट) पर लेकर पान की खेती करते हैं।


भरत चौरसिया कहते हैं, "एक एकड़ दस-पन्द्रह डिस्मिल से ज्यादा किसी के पास जमीन नहीं है, जो भी है सब पान की खेती ही है। पान बिकेगा तो परिवार चलेगा, पान नहीं बिकेगा तो परिवार नहीं चलेगा।"

मार्च से लेकर मई तक के ये महीना अहम होता हैं इन महीनों में शादी-समारोह से लेकर कई छोटे-बड़े कार्यक्रम होने की वजह से पान के पत्तों की मांग बढ़ती है, पान किसानों का मुनाफा भी अच्छा खासा होता है। लॉकडाउन से बाजार से लेकर ये सब बंद रहा, इस बार नुकसान मौसम के उतार-चढ़ाव से नहीं बल्कि लॉकडाउन ने पान किसानों की कमर को तोड़ कर रख दिया।

एक पान बरेजा को तैयार करने में काफी मेहनत लगती है, उसमें एक मचान बनती है। चारों तरफ बल्ली और ऊपर चोहे के सरिया से सर्पोट देकर ढक दिया जाता है। एक बरेजा के अंदर पान किसान छोटी-छोटी 40-50 लाइन (क्यारियां) बनाकर एक बरेजा तैयार होने तक डेढ़ से दो लाख रुपए की लागत आती है। निराई-गुड़ाई के साथ रोजाना पान की तोड़ाई होती है, जो पुराना पान होता है वो ढाई से तीन रुपए में बिकता है, जबकि नया पत्ता एक रुपए के आस-पास बिकता है।

लॉकडाउन में जब पान बाजार ही नहीं जा पाया, जो पुराने पत्ते थे वो इतने पुराने हो गये कि झड़ने लगे, टूट कर गिरने लगे फिर दागी (खराब) पड़ने लगें। इन पत्तों की कीमत दो से तीन रुपए थी, अब ये खराब हो गया इसकी कोई कीमत नहीं रह गई।


खेती किसानी का कोई आंकड़ा नहीं है कि कितना नुकसान होगा। खेती में किस्मत है कि मंडी अच्छी चल गई तो अच्छा फायदा होगा। अगर मंडी डाउन हो जाए तो कम मुनाफा होने की बात करते हुए भरत चौरसिया कहते हैं, "कम से कम पांच सौ रुपए दिन का लॉस (नुकसान) तो है ही, पूरा परिवार इसी काम में लगा रहता है। पांच-छह सौ रुपए दिन मिलता था, मिला जुलाकर सौ रुपए मजूरी (मजदूरी) में पेट भर जाए इससे ज्यादा कुछ नहीं होता इसमें।"

भरत चौरसिया की तरह पाली के आसपास के पाँच सौ किसान पान की खेती करते हैं, इन परिवारों के करीब तीन हजार लोगों की रोजी रोटी पान की खेती से चलती हैं, पाली सहित बुंदेलखंड के महोबा, मध्य-प्रदेश छतरपुर के पान किसानों की एक जैसी कहानी है। लॉकडाउन के दौरान पान की खेती करने वाले किसानों का नुकसान किसी की नजर में नहीं आया।

इसी गाँव के करीब छप्पन वर्षीय परशुराम चौरसिया के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। कई महिनों की मेहनत का फल मिलने वाला था, लेकिन लॉकडाउन ने सब खत्म कर दिया। परशुराम चौरसिया कहते हैं, "रोज में कम से कम हजार दो हजार के पान निकलते हैं, लेकिन अभी कुछ नहीं हैं देखिए पान कितने खराब हो रहे हैं, इसको तोड़ों तो कोई कीमत नहीं हैं, कीमत तो हैं जब कोई ले, तब तो कीमत है।"


अगर ये सही समय पर चला जाता तो ये पान का पत्ता दो से तीन रुपए की नोट थी, ये नहीं गया तो बेकार है। लॉकडाउन के चलते पान के महंगे बिकने वाले पुराने पत्ते खेत में ही खराब हो गए।

बरेजा में पान की खेती में मटके से पानी डालते वक्त परशुराम चौरसिया कहते हैं, "लॉकडाउन से मेहनत बेकार चली गई दिन में तीन चार बार कंधे पर पानी से भरा मटका रखकर पान की खेती में पानी लगाते हैं। अगर नहीं लगाया तो वो लू से मर जायेगा।"

पाली का देसी पान उत्तर प्रदेश में लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली, पीलीभीत, मेरठ, सहारनपुर के साथ मध्य-प्रदेश सहित देश में प्रसिद्ध है। लॉकडाउन से यातायात और बाजार बंद रहे देश व्यापी बंदी से पान किसान को बर्बाद कर दिया आर्थिक नुकसान सहने के बाद किसान हताश और निराश नजर आ रहे हैं।

पाँच सौ परिवार पान की खेती करते हैं, पाली ललितपुर का छोटा कस्बा हैं, यहां पान की हर दिन मंडी लगती है। ललितपुर के पाली में पान की मंडी में थोक का काम करने वाले व्यापारी प्रकाश चन्द्र चौरसिया कहते हैं, "एकाएक लॉकडाउन हो गया हम व्यापारियों के पास जो माल पड़ा था सब सड़ गया जब माल (पान) नहीं टूटेगा तो नुकसान किसान और व्यापारी दोनों को होगा। यही सीजन हैं, पुराने पान का आखरी टाइम चल रहा है, इसे गर्मियों तक खत्म करना पड़ता हैं, अगर नहीं हुआ तो अपने आप सड़ जाएगा इस बार लॉकडाउन से यहीं हुआ।"


लॉकडाउन खुलने के बाद पान किसानों ने राहत की सास ली अब पान की बिक्री धीरे-धीरे सहीं रास्ते पर आ रही है। लॉकडाउन दौरान हुए नुकसान से पान किसानों को उबर पाना अब साधारण बात नहीं है।

लॉकडाउन की वजह से पान की मंडी ठप होने से पान किसान और व्यापारी प्रभावित हुए कम से कम दो लाख का पान मंडी में डेली बिकता था।

यहां किसानों का हर रोज दो लाख रुपए का नुकसान उठाने का जिक्र करते हुए प्रकाश चन्द्र चौरसिया कहते हैं, "जानदार पान जाएगा उसे खुले में रखेंगे तो कम से कम एक सप्ताह चलेगा, जब हम पान का बण्डल बना देते हैं, अगर बण्डल दो दिन नहीं खुलेगा तो वो सड़ जाएगा किसी काम का नहीं बचता क्योकि पान कच्चा माल है।"

लॉकडाउन खुलने से पान किसानों को राहत की सांस मिली चौरसिया कहते हैं, "जैसे ही लॉकडाउन खुला हम जैसे व्यापारी पान की मंडी में किसानों से पान खरीद करने लगे। एक लम्बा समय लॉकडाउन समयाविधि में नुकसान का गुजारा इसकी भरपाई करने में कितना समय लगेगा कह नहीं सकते।"

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