विश्व के विकासशील देशों के कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों को वाराणसी में दिया जा रहा प्रशिक्षण

विश्व के विकासशील देशों के कृषि वैज्ञानिकों,  अधिकारियों को वाराणसी में दिया जा रहा प्रशिक्षणभारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी

भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया है, जिसमें 11 अफ्रीका और 21 एशिया देशों के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम 8 फरवरी से 23 फरवरी तक चलेगा।

इनमें अफगानिस्तान से 5, म्यामार से 3 केन्या, युगाण्डा, धान, मालवी से 2-2 प्रतिभागी, मंगोलिया, बोत्सवना, लाइबेरिया एवं कांगो से 1-1 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम संयुक्त राज्य अमेरिका एवं भारत द्वारा कृषि क्षेत्र में हुए त्रिपक्षीय समझौते पर आधारित है, जिसमें विश्व के विकासशील देशों जैसे अफ्रीका आदि के वैज्ञानिकों एवं कृषि से सम्बन्धित अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. पंजाब सिंह ने इस मौके पर जैविक खेती का पोषण एवं खाद्यान्न सुरक्षा में महत्व को बताया। उन्होंने जैविक खेती के माध्यम से पर्यावरण सुरक्षा, भूमि उर्वरता एवं टिकाऊ खेती के घटक के रूप में अपनाने के लिए इस प्रशिक्षण के महत्प पर प्रकाश डाला।

''जैविक विधि से पैदा की गई सब्ज़ियों के प्रयोग से लोगों में होने वाली बीमारियों एवं कुपोषण से बचा जा सकता है।'' इस मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने कहा, ''संस्थान द्वारा विकसित जैविक प्रक्षेत्र में सब्ज़ियों के उत्पादन में 10-15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है।'' इस मौके पर निदेशक ने संस्थान द्वारा किये जा रहे शोध कार्यों एवं उपलब्धियों को बारे में बताया।

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