तेज हवाओं के साथ बारिश ने बर्बाद कर दी खेत में तैयार फसल

उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बुधवार (21 अप्रैल) रात आए आंधी-तूफान से तैयार फसलों को काफी नुकसान हुआ। किसानों के लिए यह आफत और भी निराशाजनक है जब राज्य में शनिवार व रविवार को लॉकडाउन लगता है और उन्हें डर है कि पिछले साल की तरह पूरी तरह लॉकडाउन लग सकता है।

Mohit ShuklaMohit Shukla   23 April 2021 1:12 PM GMT

तेज हवाओं के साथ बारिश ने बर्बाद कर दी खेत में तैयार फसल

खेत में गेहूं की फसल तैयार फसल बारिश से बर्बाद हो गई। सभी फोटो: मोहित शुक्ला

सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। माथे पर चिंता की लकीरें लिए किसान अकील अहमद अपने आम में खड़े होकर उसे निहार रहे हैं। वो इसलिए क्योंकि यूपी के कुछ इलाकों में 21 अप्रैल को रात में आए तूफान में उन्होंने भी अपनी आम की फसल का एक बड़ा हिस्सा गंवा दिया। सीतापुर की मिश्रिख तहसील में स्थित उनका गाँव औरंगाबाद भी तेज हवाओं के साथ हुई से प्रभावित हुआ। 60 वर्षीय अकील अहमद ने गाँव कनेक्शन को बताया, "हम इस बार आम की अच्छी फसल की काफी उम्मीद थी, लेकिन अब सिर्फ 30 प्रतिशत फल ही सही सलामत बची हैं।"

अहमद आम के 100 एकड़ (40 हेक्टेयर) के बगीचे के मालिक हैं। उन्हें यह अपने पिता से विरासत में मिला था, जिन्होंने आजादी से पहले जमीन खरीदी थी। यह क्षेत्र अपने आमों के लिए प्रसिद्ध है और अहमद उनमें से कई किस्मों की खेती करते हैं। उन्हें न सिर्फ देश के अन्य हिस्सों में भेजते हैं, बल्कि विदेशों में भी एक बड़ा हिस्सा निर्यात करते हैं, खासकर खाड़ी देशों को।

अहमद ने बताया, "मैं तूफान को लेकर परेशान हूं और मैं इससे निपट सकता हूं, लेकिन जब कभी भी दूसरी बार लॉकडाउन लगेगा, मैं उसे लेकर चिंतित हूं। पिछले साल लॉकडाउन से ठीक पहले वह अपनी आम की फसल को 2,800 रुपये क्विंटल बेचने में कामयाब रहे थे।" उन्होंने कहा, जब लॉकडाउन का शिकंजा कसा तो उन्हें 1000 रुपये प्रति क्विंटल पर आम बेचने के लिए मजबूर किया गया। इस साल के शुरुआत में जहां कीड़े और बीमारी की वजह से नुकसान हुआ तो अब तूफान से नुकसान हो गया है।

भारत में इस समय कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। दो दिन से रोजाना मामले 3 लाख से ऊपर आ रहे हैं। कई राज्य कर्फ्यू और लॉकडाउन लगा रहे हैं। इससे किसानों और प्रवासी कामगारों दोनों की चिंता बढ़ गई है।

तेज हवाओं से आम गिर गए।

अहमद ने कहा, "मैंने बगीचों में करीब बीस लाख खर्च करके कीटनाशक का छिड़काव कराया है। अगर दूसरे लॉकडाउन की घोषणा की जाती है तो क्या होगा, जबकि उनकी लगाई गई पूंजी पहले ही खतरे में है, जबकि वह अपने आम विदेश भेजने में असमर्थ है।" कुछ ऐसी ही निराशा के भाव अकील अहमद गांव औरंगाबाद से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर में मौजूद सीतापुर जिले के बेहटा गाँव में मौजूद रामगोपाल शर्मा के चेहरे पर दिख रहे थे ।

रामगोपाल शर्मा ने बताया, "अभी कल (21 अप्रैल) मैं अपने गेहूं के लिए एक कंबाइन हार्वेस्टर लाया, लेकिन इससे पहले तूफान ने उनके खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह गिरा दिया। उन्होंने दबी आवाज में कहा, "कंबाइन मेरे खेत में खड़ी है, लेकिन अब कोई फसल खड़ी नहीं बची है। गेहूं के दाने फूटे और बिखरे पड़े थे।"

शर्मा पिछले साल लॉकडाउन के बाद से आराम नहीं कर पाए हैं। थोड़ा और पैसा कमाने की कोशिश में उन्होंने पिछले साल केले की खेती की थी। उन्होंने कहा, "मैंने उस प्रोजेक्ट में 22 लाख रुपये खर्च कर दिए थे, लेकिन बाढ़ ने इसे बर्बाद कर दिया और मैं 59 हजार रुपये ही बचा पाया।" उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने 25 बीघा गेहूं पर 80,000 रुपये खर्च किए थे, जिसमें से 10 बीघे की फसल गिर गई है। इसके लिए लोन भी ले रखा है।


फसल तबाही का ऐसा ही नजारा सीतापुर से करीब 150 किलोमीटर दूर उन्नाव जिले में भी दिखाई दिया। यहां बे-बेमौसम बारिश के साथ आए तेज तूफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। उन्नाव जिले के सदर तहसील क्षेत्र के बेहटा नथई सिंह गाँव के धरमू सिंह (46 वर्ष) के एक बीघा खेत में गेहूं कटा पड़ा था। धरमू बताते, "खेत में कुल 103 बंडल निकले थे। रात में आई आँधी से लगभग 25 बंडल उड़ गए हैं, जबकि 8-10 बंडल खुल गए। आंधी-तूफान ने बहुत नुकसान पहुँचाया है। जी तोड़ मेहनत कर के तैयार फसल इस तरह आँधी में उड़ जाएगी, देखकर कलेजा फट जाता है।"

धरमू सिंह के गांव से करीब 20 किलोमीटर की दूरी स्थित जगत खेड़ा गाँव में तूफान में होरी लाल लोधी (62) की परवल की फसल खराब हो गई। लोधी ने कहा, "मचान (बेल को सहारा देने के लिए मचान) बनाने के लिए बहुत ध्यान रखना पड़ता है औ जब मैंने सोचा कि इस बार मुझे अच्छी उपज मिलेगी,तो सब उजड़ गया।" लोधी ने बताया कि सप्ताह में एक बार कटाई की जाती है, अपनी 10 बिस्वा (आधा बीघा) भूमि से परवल की हर पौध से 20-30 किलो के बीच परवल मिलती था, लेकिन इस बार...। लोधी सिर झुकाते हुए चुप हो गए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 अप्रैल (बुधवार) को देर रात आई आंधी-तूफान का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारियों को आंधी-तूफान और बारिश से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने इस आपदा में दिवंगत हुए लोगों के परिजनों को 04-04 लाख रुपए की राहत राशि तत्काल देने जाने के निर्देश भी दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी नुकसान का आकलन करते हुए प्रभावितों को तुरंत मुआवजा दें। उन्होंने कहा है कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायगी।

इनपुट – उत्तर प्रदेश के उन्नाव से सुमित यादव

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