पहले नौकरी नहीं मिली, अब दूसरों को दे रहे रोज़गार

पहले नौकरी नहीं मिली, अब दूसरों को दे रहे रोज़गारबतख पालन बन रहा कमाई का जरिया

मोहम्मद तारिक, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

करंजाकला (जौनपुर)। मौजूदा वक्त में हर युवा सरकारी नौकरी करके आराम से अपनी जिंदगी बसर करने की सोचता है। कुछ ऐसी ही सोच जौनपुर जिले के खुटहन ब्लॉक के टिकरीकला गाँव के अरविंद कुमार की भी थी, लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने खुद को इस काबिल बना लिया कि आज वह दूसरों को नौकरी दे रहे हैं।

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एमएड, बीएड और टेट उत्तीर्ण करने के बाद भी जब उनका टीचर बनने का सपना पूरा नहीं हुआ तो उन्होंने बत्तख पालन शुरू कर दिया। वह न सिर्फ बतख पालन से हर महीने एक लाख रुपए कमा रहे हैं। बल्कि युवा बेरोजगरों को नौकरी भी दे रहे हैं।

खुटहन ब्लॉक के टिकरीकला गाँव के अरविंद कुमार गौतम (35 वर्ष)दूसरे युवाओं की तरह ही सरकारी नौकरी में दिलचस्पी रखते थे। इसके लिए उन्होंने खूब पढ़ाई की। नौकरी पाने के लिए एमएड-बीएड भी किया। साथ ही टीईटी भी उत्तीर्ण कर लिया। इन सबके बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली, इसके बाद ही उन्होंने नौकरी न करने और खुद का व्यापार शुरू करने की योजना बनाई। घर-परिवार के लोगों से राय-मशविरा किया और फिर बतख पालन करने की ठान ली।

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उन्होंने करीब 1100 बतख खरीदकर अपना कारोबार शुरू किया। इसमें उन्होंने 1000 मादा और 100 नर बतख को पाला। घर के पास ही 20 बाई 20 का एक कमरा बतख को रखने के लिए बनाया है। साथ ही इसकी देखरेख करने के लिए उन्होंने गाँव के ही दो युवाओं को भी काम दिया है, जिन्हें नौकरी की सख्त तलाश थी। इन युवाओं को उन्होंने पांच-पांच हजार रुपए की नौकरी दी और साथ ही दोनों वक्त का खाना भी दिया। दोनों लड़के बतख की देखभाल करते हैं और उन्हें चराते हैं।

अरविंद ने बताया, “हमने बतख पालन के लिए कोई सरकारी अनुदान नहीं लिया। बल्कि घर वालों की मदद से ही इसकी शुरुआत कर दी। 1000 बतख रोजाना 600 से 700 अंडे देती है। हर अंडे की कीमत आठ रुपए से लेकर दस रुपए तक होती है। इन अंडों को खरीदने के लिए चंदौली, जौनपुर, फैजाबाद और शाहगंज के व्यापारी हमारे पास आते हैं और बतख के अंडे खरीदते हैं।”

अब दूसरों को भी दे रहे रोजगार

उन्होंने आगे बताया, “व्यापारी बत्तख के अंडों से किसी तरह की दवा बनाने के लिए ले जाते हैं। इसके अलावा काफी लोग इसे खाने में भी पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ बतख का अंडा ही नहीं बिकता है। इसका बहुत लोग मांस भी पसंद करते हैं। इसके अलावा गर्मी के दिनों में एक बतख की कीमत 150 रुपए जबकि ठंड में 200 रुपए मिल जाते हैं।”

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बारिश में खाने में लगता है कम खर्च

अरविंद कुमार के अनुसार बतख को बारिश के वक्त में कम चारा खिलाना पड़ता है। बारिश में उन्हें बाहर चरने के लिए सुबह और शाम छोड़ दिया जाता है। वह अपना प्रर्याप्त भोजन कर लेती हैं। जबकि आम दिनों में इनका खाना मुर्गियों की अपेक्षा में ज्यादा देना पड़ता है। बेरोजगारो के लिए कम लागत लगाकर इसका व्यापार करना बहुत ही मुनाफे वाला है। वह दूसरे लोगों को भी इसका व्यापार करने की राय देते हैं।

क्या हैं बत्तख के अंडों के फायदे

  1. आंख की रौशनी को करता है तेज़: यदि आप दृष्टिरोग सम्बंधित समस्या से पीड़ित हैं या फिर आपकी भोजन शैली में विटामिन ए की खुराक कम रह जाती है, तो ऐसे में बत्तख के अंडों का सेवन आपके लिए वरदान समान हो सकता है।
  2. कैल्शियम की कमी को करता है पूरा: अमूमन अंडे कैल्शियम के बड़े अच्छे स्रोत होते हैं। ऐसे में बत्तख के अंडे का सेवन आपके शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करेगा। कैल्शियम की कमी के वजह से आपके हड्डियों में कमजोरी आ सकती है।
  3. प्रोटीन की आपूर्ति: शरीर में कोशिकाओं को फिर से बनाने से ले आपके चेहरे में ताजगी लाने तक है फायदेमंद। आज हमारे शरीर के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। ऐसे में यदि आपके खाने की आदतों में शरीर में प्रोटीन की ठीक-ठाक आपूर्ति नहीं हो रही है तो बत्तख का अंडा प्रोटीन का एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
  4. विटामिन ई की प्रचुरता: आपके शरीर के पाचन सिस्टम में यदि किसी तरह के विकार उत्पन्न हो गए हो या फिर एंटीऑक्सीडेंट की कमी से एजिंग इफ़ेक्ट दिखने लगा हो। ऐसे में बत्तख के अंडे का सेवन आपके शरीर में विटामिन-ई की आपूर्ति करेगा।

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