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यूपी से पहली बार जल मार्ग से दुबई निर्यात की गईं सब्जियां, ऐसे मिला किसानों को फायदा

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने वाराणसी से शुरू किया निर्यात

Kushal MishraKushal Mishra   24 Dec 2019 11:21 AM GMT

यूपी से पहली बार जल मार्ग से दुबई निर्यात की गईं सब्जियां, ऐसे मिला किसानों को फायदाफोटो साभार : एजेर न्यूज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश से पहली बार किसानों की सब्जियां पानी के जहाज से विदेश भेजी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 20 दिसंबर को जल मार्ग के जरिए फल और सब्जियों की 14 मीट्रिक टन की पहली खेप दुबई भेजी गई। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भेजी गई सब्जियों से छोटे किसानों को काफी फायदा हुआ है।

पहली खेप में अपनी सब्जी दुबई भेजने वाले गाजीपुर की शिवांश किसान उत्पादक कंपनी (एफपीओ) के प्रमुख राम कुमार राय ने बताया कि उनके एफपीओ के जरिए 120 टन मिर्च और टमाटर दुबई भेजा है। जो मिर्च हम स्थानीय मंडी में 10-12 रुपए किलो में बेचते थे उसका हमें 20 रुपए का दाम मिला है। इस खेप में ऐसे ही एफपीओ शामिल हैं।

इसी साल अगस्त में अपने संसदीय क्षेत्र और फल और सब्जियों के उत्पादक रहे वाराणसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्यात हब बनाने की घोषणा की। उनके इस सपने को किसानों के लिए काम करने वाली सरकारी संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने नये साल शुरू होने से पहले ही पूरा करने का प्रयास किया। फल और सब्जियों के उत्पादन की संभावना को देखते हुए अब एपीडा गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर और संत रविदास नगर में भी कृषि निर्यात हब बनाने जा रहा है।

वाराणसी में जल मार्ग से निर्यात की जा रही फलों और सब्जियों की पहली खेप को रवाना करते एपीडा के चेयरमैन पबन कुमार बोरठाकुर।

एपीडा में सहायक महाप्रबंधक और उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के नोडल ऑफिसर सीबी सिंह 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताते हैं, "यह हमारी पहली कोशिश है कि किसान और निर्यातकों के बीच बिचौलियों को हटाया जाए और किसानों को इसका सीधा लाभ पहुंचे। किसान जहां पहले सिर्फ मिर्च व्यापारियों को 07 से 08 रुपए में बेचते थे और मंडी में 10-12 रुपए किलो में बेचते थे, उन्हें सीधे निर्यात का फायदा मिला और किसानों ने 18 से 20 रुपए में निर्यातकों को अपनी मिर्च बेची है।"

हमारी पहली कोशिश है कि किसान और निर्यातकों के बीच बिचौलियों को हटाया जाए और किसानों को इसका सीधा लाभ पहुंचे।

सीबी सिंह, नोडल अधिकारी, एपीडा, यूपी

"यह अभी प्रयोगिक तौर पर पहली खेप भेजी गई है जो आज मुंबई पहुंच गई है और अब 25 दिसंबर की सुबह दुबई के लिए रवाना हो जाएगी। हमें सफलता मिल रही है और हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में किसानों के लिए और अच्छा कर सकेंगे," सीबी सिंह आगे कहते हैं।

ऐसे शुरू हुई किसानों के लिए पहल

निर्यात को लेकर सबसे जरूरी पहल थी किसानों और निर्यातकों के बीच संवाद हो, ताकि किसान निर्यात की मांग और गुणवत्ता के अनुसार मानकों का पालन कर सकें। इसके लिए एपीडा की ओर से सबसे पहले वाराणसी में क्रेता-विक्रेता बैठक यानी निर्यातकों और किसानों के बीच बैठक बुलाई गई।

इस बैठक में जहां मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और उत्तर प्रदेश के निर्यातक शामिल हुए, वहीं फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी यानी एफपीओ के सदस्य और 100 प्रगतिशील किसान भी शामिल हुए। बैठक में निर्यातकों ने किसानों को सब्जियों और फलों की गुणवत्ता के साथ-साथ सही संरचना को समझाने का प्रयास किया। वहीं किसानों ने बिचौलियों की समस्या के साथ फलों और सब्जियों की कीमतों को लेकर अपनी मंशाओं को दूर किया।

साथ ही बैठक के बाद निर्यातकों ने किसानों के खेत का दौरा किया और उन्हें निर्यात किए जाने लायक कई फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

निर्यातकों ने दिखाई दिलचस्पी

वाराणसी को कृषि निर्यात हब बनाने के तैयारियों को लेकर एक कार्यक्रम में संबोधित करते एपीडा के अधिकारी।

कृषि निर्यात हब बनाने के प्रयास में निर्यातकों ने एपीडा की इस परियोजना में दिलचस्पी दिखाई और निर्यातकों और किसानों की बैठक के बाद मुंबई के ताजा सब्जी और फल उत्पादक संघ (वीएएफए) ने गाजीपुर की एक और वाराणसी की तीन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी यानी एफपीओ से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के लिए समझौता किया।

एफपीओ से निर्यात के लिए ली गईं सब्जियों को प्रसंस्कृत और पैक करने के लिए वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के पेरिशेबल कारगो सेंटर की सुविधा ली गई है। वहीं एपीडा ने निर्यात हब की गतिविधियों को और तेज करने के लिए वाराणसी में जल्द ही परियोजना कार्यालय बनाने की योजना को हरी झंडी दी।

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दूसरी ओर वाराणसी क्षेत्र के आयुक्त दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई जिससे निर्यातकों और किसानों के हितों का ध्यान रखा जा सके। इस कमेटी का मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कृषि के उत्पादों के निर्यात के लिए सप्लाई श्रृंखला की निगरानी करना है।

किसानों के लिए इन सार्थक प्रयासों के जरिए 20 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में पहली बार दुबई के लिए फलों और सब्जियों की पहली खेप को दुबई के लिए रवाना किया गया।

किसानों को एफपीओ से मिला फायदा

इस पहली खेप में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद तहसील कीशिवांश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी से किसानों की मिर्च निर्यात की गई। इसी एफपीओ के प्रमुख राम कुमार राय 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताते हैं, "हमारे एफपीओ से एक हजार से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं और हमने पहली बार समुद्री मार्ग से 120 टन मिर्च, टमाटर और मिर्च को निर्यात किया है। इस निर्यात से निश्चित रूप से किसानों को सीधा फायदा पहुंचा है जो किसान 10-12 रुपए किलो में अपनी मिर्च मंडी में बेचते थे उन्हें सीधे निर्यात करने पर 18 से 20 रुपए मिले हैं।"

हमने इस खेप में 120 टन मिर्च-टमाटर विदेश भेजे हैं। हमें जिस मिर्च का यहां 10-12 किलो का दाम मिलता था उसका 18-20 रुपए का भाव मिला है। किसानों के लिए इसमें फायदा है।

राम कुमार राय, प्रमुख, शिवांश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, गाजीपुर

"हमने अपने एफपीओ के जरिए हमेशा किसानों को उन्नत बीज खेतों में उपयोग करने की सलाह दी है और समय-समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया है। यही वजह है कि हमारी मिर्च यूरोपीय मानकों पर भी खरी उतरी है। इससे हमारी कंपनी से जुड़े हर छोटे-बड़े किसान को फायदा मिल रहा है," राम कुमार आगे बताते हैं।

दुबई भेजी गई फलों और सब्जियों की पहली खेप।

वहीं मुंबई के रहने वाले और फलों और सब्जियों के युवा निर्यातक संदीप वैश्य बताते हैं, "यह एक अच्छी पहल की शुरुआत हुई है। जल्द ही यहां पैक हाउस भी बनेगा। इससे और देशों के लिए फल और सब्जियों का सीधे निर्यात किया जा सकेगा।"

किसानों को समय-समय पर मिलेगा प्रशिक्षण

अब एपीडा की ओर से गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर और संत रविदास नगर को कृषि निर्यात हब बनाने के लिए इन क्षेत्रों के किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाने की तैयारी है।

एपीडा के सहायक महाप्रबंधक सीबी सिंह बताते हैं, "यह अभी एक शुरुआत है, जल्द ही हम मंडी परिषद, बागवानी और कृषि विभाग के साथ भी मिलकर काम करेंगे। साथ ही हमारे एफपीओ के किसानों को गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में समय-समय पर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। यह सभी आयुक्त की निगरानी कमेटी की देखरेख में किए जाएंगे और आने वाले समय में और ज्यादा किसानों को लाभ मिल सकेगा।"

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