नुकसान से बचाएगा आम तुड़ाई से लेकर पैकिंग का ये तरीका

कई बार सही तरीके से आम न तोड़ने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए तुड़ाई से लेकर पैकिंग तक सही ध्यान रखना चाहिए।

नुकसान से बचाएगा आम तुड़ाई से लेकर पैकिंग का ये तरीका

लखनऊ। इस समय आम किसानों ने आम तुड़ाई शुरू कर दी है, आम की सही तरीके से तुड़ाई, उसके बाद आम की पैकिंग से लेकर बाजार में भेजने तक तरीका अगर सही नहीं होता तो किसानों को आम के खराब हो जाने से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आम तोड़ते वक्त हम लोग बहुत ध्यान देते हैं, फिर भी कई बार मंडी ले जाने तक आम खराब हो जाते हैं।" केन्द्रीय उपोष्ण एवं बागवानी संस्थान के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चन्द्रा आम तोड़ने से लेकर, पैंकिग और बाजार भेजने तक का सही तरीका बता रहे हैं। डॉ. सुभाष चन्द्र किसानों को सलाह देते हुए कहते हैं, "कई बार सही तरीके से आम न तोड़ने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।"


देश में 1575.8 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में 10020.2 हजार मिट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। आम के प्रमुख उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडू, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, गुजरात हैं।

ये भी पढ़ें : ये आम हैं बहुत ख़ास, जानें किस राज्य में किस आम के स्वाद का है राज

आम तोड़ने का सही तरीका

छोटे पेड़ों से आम को हाथ से ही तोड़ना चाहिए और बड़े पेड़ों से हार्वेस्टर की सहायता से तोड़ना चाहिए। अधिकतर किसान पेड़ ऊंचाई पर लगे आम को डंडे से पीटकर तोड़ देते हैं, ये तरीका गलत होता है, क्योंकि इससे आम को चोट लग जाती है। पेड़ों के नीचे जाल बांधना चाहिए ताकि हार्वेस्टर या फिर हाथ से आम छूट भी जाएं तो जाल में गिर जाएंगे। इससे आमों को चोट नहीं लगती है। अगर आमों को चोट लग जाती है, तो ये सड़कर खराब हो जाते हैं।

आम की पैकिंग का सही तरीका

आम को तोड़ने के बाद छोटे-बड़े आमों को अलग-अलग छांटकर ग्रेडिंग के हिसाब से रखना चाहिए। बड़े आमों को एक कैरेट में और बड़े आमों को दूसरे कैरेट में रखना चाहिए। कार्बाइड से पके आम सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। आजकल बाजार में जो पीले आमों की बिक्री जोरो पर है, उनमें से ज्यादातर कार्बाइड से पके होते हैं। अगर कार्बाइड के बजाए हम इथेल का प्रयोग करें तो ये स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होते हैं।

ये भी पढ़ें : मौसम और नकली दवाओं ने तोड़ी आम की अच्छी फसल की उम्मीद

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एस के शुक्ला बताते हैं, "आम जैसे फलों को विदेश भेजते समय पूरी तरह से ध्यान रखना चाहिए, उनके साथ किसी भी तरह के कीट या मक्खियां न जा सकें। भारतीय आम बोर्ड ने जो आम को बाहर भेजने के जो नियम बनाएं हैं निर्यातकों को उस पर ध्यान देना चाहिए क्योकि आम का एक बड़ा बाजार विदेशों में भी है।"

रसायन से पके आम पहुंचा सकते हैं नुकसान

फलों को जल्द पकाने की प्रक्रिया स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। शरीर में जाने वाले रसायन दिमाग तक आक्सीजन की आपूर्ति और नर्वस सिस्टम को बहुत तेजी से प्रभावित करता है। जो आम लंबे समय तक बाजार में मौजूद रहता है, वह पूरी तरह से कार्बाइड से पकाया जाता है। 30 किलो आम को पकाने के लिए 200 ग्राम कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जाता है। कार्बाइड अखबार में लपेटा जाता है और आम से भरे डिब्बे में रख दिया जाता है। गर्मी और एसिटिलीन गैस की वजह से आम तेजी से पकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में फल का क्लारोफिल कम हो जाता है। साथ ही उसमें पाया जाने वाला पानी भी सूख जाता है, जिसकी वजह से फलों में पाई जाने वाली एंटीआक्सिडेट कम हो जाती है। कार्बाइड पर प्रतिबंध हमारे देश में खाद्य अपमिश्रण के अधिनियम के तहत फलों को कैल्शियम कारबाइड से पकाने पर प्रतिबंध है।

ये भी पढ़ें : इस विधि को अपनाने से आम के पुराने पेड़ों से भी होगा आम का अधिक उत्पादन



Share it
Top