इंटीग्रेटेड फार्मिंग : खेत के एक एक इंच का इस्तेमाल कर ये किसान साल में कमाता है लाखों रुपए

इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग मतलब खेती के साथ पशुपालन समेत कई ऐसे काम जो न सिर्फ खेती में सहायक होंगे बल्कि आमदनी को कई गुना बढ़ा देंगे।

लखनऊ। कहा जा रहा है कि खेती घाटे का सौदा है। इसमें लागत और मेहनत ज्यादा लेकिन मुनाफा कम हो रहा है। लेकिन कुछ किसान इसी खेती से मुनाफा कमा रहे है, वो भी लाखों में। आमदनी दोगुनी करने की कवायदों के बीच कई किसानों ने खेती की वो तकनीकें अपनाई हैं जिससे वो एक साल में लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।

पारंपरिक खेती को छोड़कर मुनाफे वाली खेती करने वाले ऐसे ही एक किसान हैं उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के अमन लकारा। अमन इंटीग्रेटेड फॉर्मिग सिस्टम के तहत खेती करते हैं। अमन के मुताबिक एकीकृत कृषि प्रणाली कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस खेत के एक एक इंच का बेहतर इस्तेमाल है।

इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग मतलब खेती के साथ पशुपालन समेत कई ऐसे काम जो न सिर्फ खेती में सहायक होंगे बल्कि आमदनी को कई गुना बढ़ा देंगे। जैसे अमन अपनी जमीन पर खेती के साथ डेयरी चलाते हैं, मुर्गी-बतख और सूकर पालते हैं। अमन की जमीन और सलाना कमाई बताने से पहले अमून का तरीका समझते हैं। देखिए वीडियो

जानिए कैसे हर यूनिट से लाखों रुपए कमाता है ये आम सा किसान

बरेली से करीब 25 किलोमीटर दूर क्यारा ब्लॅाक के अभयपुर गाँव में रहने वाले अमन लाकरा के पास 55 बीघा ज़मीन है। इसमें उन्होंने अलग-अलग यूनिट बनाई हुई है। हर यूनिट से अमन लाखों कमा रहे है।

अमन बताते हैं, "शुरू में सबसे तालाब बनवाया, जिसमें हम रोहू, कतला, मृगल, कॉमन क्रॉप के साथ कई मछलियों को पाला हुआ है। मुर्गी और बत्तख का जो वेस्ट होता है वो इन मछलियों का आहार है। इन यूनिट से सलाना 40 कुंतल उत्पादन होता है जिससे चार लाख रूपए तक की कमाई होती है।"

इंटिग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम प्रणाली से कोई भी किसान सालभर मुनाफा कमा सकता है। इस प्रणाली में एक घटक से बचे हुए उत्पादों और अवशेषों को दूसरे घटक के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। अगर आप मुर्गीपालन करते है तो पोल्ट्री की बीट को मछलियों को खिला सकते है। इससे मछली की अधिक मात्रा में तादात होगी, जिससे मुनाफा होगा और दूसरा उस तालाब के पानी को सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जा सकेगा। अगर इसके साथ पशुपालन भी किया जाए गाय-भैँस के दूध को बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

अपनी यूनिट के बारे में अमन लाकरा बताते हैं, "मछली के साथ मेरे पास 125 मुर्गियां हैं जिनसे प्रतिदिन 80 से 90 अंडे मिल जाते है। इन अंड़ो को बाजार में लगभग 6 रूपए में बेच देते है। इस इकाई से सालभर में एक लाख रूपए की कमाई होती हैं जबकि आहार टीकाकरण मिलकर सालाना की लागत 15 रूपए आती है।"

यह भी पढ़ें- गाय के पेट जैसी ये ' काऊ मशीन ' सिर्फ सात दिन में बनाएगी जैविक खाद , जानिए खूबियां

किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटिग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम प्रणाली काफी लाभकारी है। सीतापुर जिले के कटिया में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॅा आनंद सिंह बताते हैं, "किसानों की आय को दोगुना करने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को भारत सरकार बढ़ावा दे रही है। इस प्रणाली को अपनाने से अगर किसी एक यूनिट से नुकसान होता है तो अन्य दूसरे यूनिट उसको पूरा कर देते है।"

डॉ सिंह आगे बताते हैं, "लगभग दो से तीन लागत से एक एकड़ में मछली, बत्तख, मुर्गी, बकरी, टर्की, खरगोश पालन की छोटी छोटी यूनिट बनाकर शुरूआत कर सकते है।शुरू के पहले ही साल में मुनाफा होने लगेगा। कई किसान इस प्रणाली को अपना भी रहे है।"

देश भर में छोटे एवं सीमांत आकार के खेतों की संख्या बढऩे से एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता और अधिक बढ़ रही है। इस प्रणाली को अपनाकर छोटे एवं सीमांत किसान अधिक उपज वाली फसलों के साथ ही मशरूम, फल, सब्जियां, अंडे, दूध, मांस और शहद जैसे लाभदायक उत्पाद भी पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा वे जैव-ईंधन भी पैदा कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दरअसल एकीकृत खेती का मूल यह है कि एक किसान की जमीन का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए।

इस प्रणाली को अपनाकर छोटे एवं सीमांत किसान अधिक उपज वाली फसलों के साथ ही मशरूम, फल, सब्जियां, अंडे, दूध, मांस और शहद जैसे लाभदायक उत्पाद भी पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा वे जैव-ईंधन भी पैदा कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

बरेली जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ बी पी सिंह ने बताया, "किसानों की आय बढ़ाने के लिए समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण देते है। अमन लाकरा ने भी हमारे केवीके से प्रशिक्षण और इस प्रणाली को शुरू किया। एकीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल को फार्म पर भी तैयार किया है ताकि किसानों को पूरी प्रक्रिया समझ आ सके।"

अमन ने इन सबकी देखभाल के लिए चार मजदूरों को लगा रखा है। इसके साथ वो खुद इन सभी को आहार देने और अन्य काम करते है। अमन की यूनिट में मछली और मुर्गियों के साथ डेयरी, बत्तख और बकरियों की भी यूनिट बनी हुई है।

मुर्गियों को दाना खिलाते अमन लकारा।

"डेयरी यूनिट में तीन दुधारू भैंसे हैं, जिनसे लगभग 25 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध को शहर के विभिन्न इलाकों में 50 रूपए लीटर के हिसाब से बेचते है।" अमन ने बताया, "अभी हमारे पास 60 बत्तख है, इनके अंडे और मांस से सलाना 60 हजार रूपए की कमाई होती है। इनको पालने का मुख्य उददेश्य जो मछली तालाब ऑक्सीजन को बनाए रखना है।"

ये भी पढ़ें- बुंदेलखंड से एक किसान की प्रेरणादायक कहानी, इंट्रीग्रेडेट फॉमिंग और लाखों की कमाई

इसके अलावा अमन के बकरी यूनिट में आठ बकरी पली हुई है, जिसमें छह बकरियां मादा और दो नर बकरी है। इनके आहार के लिए अमन ने अंजीर जामुन गुलर पेड़ लगा रखे है। अमन सरसों की खेती भी करते है, जिसका उत्पादन बढ़ाने के लिए अमन ने मौन पालन भी कर रखा है। अमन बताते हैं,

हमारे पास लगभग 15 डिब्बे है। मधुमक्खियां सरसों में परागण करके उनका उत्पादन 20से 25 प्रतिशत बढ़ा देती है। इनसे शहद भी प्राप्त होता है, जिसको बेचकर इन्हें सलाना एक लाख रूपए से ज्यादा की आमदनी होती है।"

ये भी पढ़ें- वीडियो : इस तकनीक से एक एकड़ में पैदा करें 188 से अधिक फ़सलें

ये भी पढ़ें- एलोवेरा की खेती का पूरा गणित समझिए, ज्यादा मुनाफे के लिए पत्तियां नहीं पल्प बेचें, देखें वीडियो

Share it
Top