हरियाणा, पंजाब से आए किसान बदल रहे बुंदेलखंड की सूरत, सूखी जमीन पर लहलहा रही धान की फसल

हमीरपुर। बुंदेलखंड का नाम सुनते ही आपके जेहन में यहाँ की गरीबी, किसानों की तंगहाली और सूखे की तस्वीर बन जाती होगी। यहाँ से प्रतिदिन किसानों के मरने की खबर आती है। लेकिन अब इसी सूखे क्षेत्र में धान की सैकड़ों एकड़ में फसलें आपको लहलहाती दिख जाएंगी। और ये बदलाव किया है हरियाणा और पंजाब से आये किसानों ने।

बुंदेलखंड का प्रवेश द्वार यानी जिला हमीरपुर। इस समय यहां के खेतों में जहाँ तक आपकी नजर जाएगी, धान ही धान की फसल दिखेगी। गेहूं, तिल और उड़द के लिए पहचाना जाने वाला बुंदेलखंड का ये जिला अब धान की बंपर पैदावार के लिए पहचाना जाने लगा है।

हमीरपुर के ब्लॉक भरुआ सुमेरपुर, गाँव टेढ़ा के किसान शिवपूजन सिंह (28) अपनी फसल दिखाते हुए कहते हैं "मैंने पिछले साल धान लगाया था। बहुत अच्छा मुनाफा हुआ। आमदनी दोगुना से ज्यादा बढ़ गयी है। पहले तिल, अरहर और उड़द लगता था। उससे खर्च भी नहीं निकल पाता था। इस साल 70 एकड़ में धान लगाया है, कुछ अधिया का है तो कुछ अपना।"


एक समय ऐसा भी था यहाँ की युवा पीढ़ी अच्छी खेती न होने के कारण पलायन कर रही थी। एक तो पानी की कमी थी और मुनाफा भी उतना नहीं हो पाता था। लेकिन धान आने के बाद युवाओं का रुख एक बार खेती की और लौट रहा है।

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बीएससी आईटी करने के बाद बीटीसी की पढ़ाई करने वाले 21 वर्षीय हिमांशु यादव ने 60 एकड़ में धान लगाया है। वे कहते हैं " मैं पढ़ाई के लिए बाहर चला गया था। खेत में कुछ पैदावार नहीं होती थी। लेकिन पिछले साल धान में अच्छा मुनाफा हुआ। इसलिए आगे की पढ़ाई अब मैं यहीं से कर रहा हूं। इधर धान की खेती तो होती ही नहीं थी। लोगों का ऐसा मानना था कि यहाँ पानी की बहुत कमी है। लेकिन जब पंजाब से आये किसानों ने यहाँ के लोगों को जानकारी दी तब आंख खुली। मैंने पिछले साल बस अपने खेत में लगाया था, बहुत फायदा हुआ, इसलिए इस बार 20 एकड़ खेत बंटाई जबकि 30 एकड़ खुद के खेत में धान रोपा है।"

जिले में धान की खेती करने वाला हर किसान लाला राम किशोर सिंह का नाम जरूर लेता है। भरुआ सुमेरपुर के पश्चिमी छोर पर स्थित लाला राम किशोर सिंह के घर जब हम पहुंचे तो बड़ी संख्या में किसान वहां पहले से ही मौजूद थे। वे सभी धान के खेत में काई बढ़ाने की जानकरी लेने के लिए इकट्ठा हुए थे।

लाला राम किशोर सिंह

लाला राम किशोर सिंह ने 300 एकड़ में धान लगाया है। इसमें आधा से ज्यादा बंटाई की जमीन है। राम किशोर सिंह (49) कहते हैं "लगभग पांच साल पहले मुझे पता चला कि हमारे जिले के कुरारा ब्लॉक के एक किसान ने धान की खेती की है और उसे खूब मुनाफा भी हुआ। बेटी की शादी करनी थी। ज्यादा पैसों की जरूरत थी। इसी कारण मैं भी कुरारा पहुंचा तो पता चला कि गेंहूं काटने आये हरियाणा और पंजाब के लोगों ने बताया था कि यहाँ की जमीन बहुत अच्छी है। यहाँ धान की 1121 किस्म की पैदावार बहुत अच्छी होगी, जिसकी बहुत अच्छी कीमत मिलती है। हमारे यहां के बाद अब महोबा और अन्य जिलों में भी धान की ओर किसानों रुझान बढ़ रहा है।"

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लाला राम किशोर आगे बताते हैं "मैं पता लेकर खुद पंजाब गया और वहां से धान का बीज ले आया। 5 साल पहले जब पहली बार धान लगाया तो किसानों ने मेरा बहुत मजाक उड़ाया। बोले कि खीर खाने के लिए धान लगा रहे हो। और आज मजाक उड़ाने वाले वही किसान धान की खेती कर रहे हैं और उनकी आय भी दो गुनी बढ़ गयी है। यहाँ मेरी जानकारी में तो कभी धान की पैदावार नहीं होती थी। लेकिन समस्या बस यही है कि इस धान के खरीदार यहाँ नहीं मिलते, इसलिए हम इसे हरियाणा और पंजाब ही भेजते हैं।"

लाला राम किशोर सिंह के तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है जबकि छोटी बेटी एमबीए और बेटा बीफार्मा की पढ़ाई कर रहा है। पंजाब से आये किसान सुखबिंदर ने सिंह कुरौरा तहसील में लगभग 50 एकड़ खेत ठेके पर लिया है उसमें धान की खेती कर रहे हैं। सुखबिंदर बताते हैं " मैं तीन साल से यहां धान की खेती कर रहा हूं। यहां मैं पहले गेहूं की मड़ाई के लिए आता था। फिर देखा कि यहां की जमीन धान के बहुत अच्छी है। फिर हमने धान की खेती शुरू की। हम अन्य किसानों की फसल भी खरीदकर पंजाब भेज देते हैं। अब ज्यादातर किसान धान की ही खेती कर कर रहे हैं।"

हरियाणा के किसान दलबीर सिंह

हमीरपुर में मुख्यतः चना, गेहूं, तिल और अरहर की खेती होती है। लेकिन अब ये चलन तेजी से बदल रहा है। पंजाब और हरियाणा से आये किसानों ने यहाँ की किसानों की नयी राह दिखायी है। हरियाणा के पानीपत से आये किसान दलबीर सिंह बताते हैं ''पहले हम यहाँ हार्वेस्टर लेकर आते थे। फिर देखा कि यहाँ की जमीन धान की खेती के लिए काफी अच्छी है। अब यहाँ हर साल धान की खेती करने आते हैं. मेरे साथ मेरे परिवार के पांच और लोग हैं। हमें देखकर अब और किसान भी धान की खेती कर रहे हैं। सिंचाई के बोर के उपयोग करते हैं।''

हमीरपुर के जिला कृषि अधिकारी डॉ सरस तिवारी बताते हैं ''इस साल धान का रकबा पांच सौ से सात सौ एकड़ के बीच का है जो पहली बार हुआ है। हालाँकि इसके बढ़ावा के लिए हमारे विभाग से कुछ नहीं किया जा रहा क्योंकि यहाँ पानी की कमी है। इस कारण दलहनी फसलों की पैदावार ज्यादा होती है।''

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