कपास किसानों के लिए बड़ा तोहफा, केंद्र ने ₹5,659 करोड़ के ‘कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन’ को दी मंजूरी, 5 साल में बदलेगी तस्वीर

Gaon Connection | May 06, 2026, 13:06 IST
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सरकार ने कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 5 साल के 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' को मंजूरी दी गई है। इस मिशन पर ₹5,659.22 करोड़ खर्च होंगे। इसका लक्ष्य 2031 तक उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय मजबूत करना है। यह मिशन 14 राज्यों के 140 जिलों में लागू होगा।
कपास खेती को मिलेगा बूस्ट
कपास खेती को मिलेगा बूस्ट
देश में घटते कपास उत्पादन, किसानों की कम होती रुचि और गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 साल के ‘कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन’ को मंजूरी दे दी है जिस पर ₹5,659.22 करोड़ खर्च किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इस मिशन से कपास उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय मजबूत होगी और भारत कपास क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

2031 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार के मुताबिक यह मिशन 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2025 के बजट में इसका ऐलान किया था। मिशन का लक्ष्य 2031 तक कपास उत्पादन को बढ़ाकर 498 लाख गांठ तक पहुंचाना है। साथ ही उत्पादकता को 440 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलो प्रति हेक्टेयर किया जाएगा। इससे करीब 32 लाख किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

कस्तूरी कॉटन भारत’ को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने कहा है कि ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ के तहत ट्रेसबिलिटी और सर्टिफिकेशन को मजबूत किया जाएगा ताकि भारतीय कपास को वैश्विक बाजार में प्रीमियम पहचान मिल सके। कपास में कचरे की मात्रा 2% से कम रखने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही फ्लैक्स, रेमी, सिसल, मिल्कवीड, बांस और केले जैसे प्राकृतिक रेशों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

लगातार घट रहा है कपास उत्पादन

देश में कपास उत्पादन पिछले कुछ वर्षों से दबाव में है। 2025-26 में कपास उत्पादन घटकर 290.91 लाख गांठ रह गया, जबकि 2024-25 में यह 297.24 लाख गांठ था। कपास की खेती का रकबा भी 2022-23 के 129.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 114.8 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। मक्का और धान में ज्यादा मुनाफा मिलने तथा पिंक बॉलवर्म कीट के खतरे के कारण किसान कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं।

14 राज्यों के 140 जिलों में होगी शुरुआत

यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय मिलकर लागू करेंगे। इसमें Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) के 10 संस्थान, Council of Scientific and Industrial Research (सीएसआईआर) का एक संस्थान और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के 10 रिसर्च सेंटर शामिल होंगे। शुरुआत में 14 राज्यों के 140 जिलों को चुना गया है और 2000 जिनिंग एवं प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों को मिशन से जोड़ा जाएगा।

नई तकनीक और बेहतर बीज पर जोर

सरकार के ‘5एफ विजन’- फार्म, फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और फॉरेन के तहत इस मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। मिशन में अधिक उत्पादन देने वाले, जलवायु अनुकूल और कीट प्रतिरोधी बीज विकसित किए जाएंगे। हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (एचडीपीएस), क्लोजर स्पेसिंग, इंटीग्रेटेड कॉटन मैनेजमेंट और एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।

कपास की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस

मिशन के तहत जिनिंग और प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण पर भी काम होगा। आधुनिक कपास परीक्षण लैब बनाई जाएंगी ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय कपास निर्यात को भी मजबूती मिलेगी।

डिजिटल मंडियां और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा

सरकार किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए मंडियों के डिजिटलीकरण पर भी काम करेगी। ई-प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को सीधे बाजार तक पहुंच मिलेगी। इसके अलावा कपास अपशिष्ट की रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय प्रभाव कम करने की भी योजना है।
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