खाद्य सुरक्षा, किसान आय वृद्धि: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में बताई आत्मनिर्भर भारत की राह
Gaon Connection | Apr 07, 2026, 18:56 IST
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने किसानों की आय की वृद्धि के लिए पैदावार में वृद्धि, लागत में कमी और उचित मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत को दालों और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की सराहना की।
शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी ज़रूरतें पूरी करने के साथ-साथ दुनिया की मदद भी करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती की पैदावार बढ़ानी होगी, लागत कम करनी होगी और फसल का सही दाम दिलाना होगा।
चौहान ने पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कहा कि भारत को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल में हम काफी आगे बढ़ चुके हैं और हमारे पास भरपूर भंडार है। अब हमें दालों और तिलहन में भी आत्मनिर्भर बनना है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में नए वैज्ञानिक तरीके अपनाने और प्राकृतिक खेती करने पर ज़ोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि खेती से देश की आधी आबादी का पेट भरता है, इसलिए किसानों की सेवा करना भगवान की सेवा जैसा है।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी ज़िक्र किया, जैसे बेमौसम बारिश और खराब मौसम से फसलों का नुकसान। उन्होंने कहा कि खेती में बदलाव, एकीकृत खेती के तरीके और हाइड्रोपोनिक्स जैसी नई तकनीकें अपनाने से छोटी ज़मीन पर भी खेती फायदेमंद हो सकती है।
चौहान ने कहा कि हमने एकीकृत खेती के ऐसे मॉडल तैयार किए हैं जिनमें सिर्फ अनाज उगाना ही नहीं, बल्कि कई तरह के काम शामिल हैं। इससे किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने मिट्टी की घटती उपजाऊ शक्ति पर चिंता जताई, जो रासायनिक खाद और कीटनाशकों के ज़्यादा इस्तेमाल से हो रही है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने राज्यों से केंद्र की योजनाओं को ठीक से लागू करने, हाल की बारिश से हुए फसल नुकसान का सही आकलन करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने 'फार्मर आईडी' का काम भी मिशन मोड पर करने को कहा।
नए बजट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी ज़रूरतों के हिसाब से योजनाओं में ज़्यादा पैसा लगाने की छूट दी गई है।
केंद्र सरकार देश भर में पांच क्षेत्रीय सम्मेलन कर रही है ताकि खेती से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात हो सके। जयपुर में पहला सम्मेलन मंगलवार को शुरू हुआ।
इस सम्मेलन में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री और अधिकारी, प्रगतिशील किसान और कृषि विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।
चौहान ने पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कहा कि भारत को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल में हम काफी आगे बढ़ चुके हैं और हमारे पास भरपूर भंडार है। अब हमें दालों और तिलहन में भी आत्मनिर्भर बनना है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में नए वैज्ञानिक तरीके अपनाने और प्राकृतिक खेती करने पर ज़ोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि खेती से देश की आधी आबादी का पेट भरता है, इसलिए किसानों की सेवा करना भगवान की सेवा जैसा है।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी ज़िक्र किया, जैसे बेमौसम बारिश और खराब मौसम से फसलों का नुकसान। उन्होंने कहा कि खेती में बदलाव, एकीकृत खेती के तरीके और हाइड्रोपोनिक्स जैसी नई तकनीकें अपनाने से छोटी ज़मीन पर भी खेती फायदेमंद हो सकती है।
चौहान ने कहा कि हमने एकीकृत खेती के ऐसे मॉडल तैयार किए हैं जिनमें सिर्फ अनाज उगाना ही नहीं, बल्कि कई तरह के काम शामिल हैं। इससे किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने मिट्टी की घटती उपजाऊ शक्ति पर चिंता जताई, जो रासायनिक खाद और कीटनाशकों के ज़्यादा इस्तेमाल से हो रही है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने राज्यों से केंद्र की योजनाओं को ठीक से लागू करने, हाल की बारिश से हुए फसल नुकसान का सही आकलन करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने 'फार्मर आईडी' का काम भी मिशन मोड पर करने को कहा।
नए बजट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी ज़रूरतों के हिसाब से योजनाओं में ज़्यादा पैसा लगाने की छूट दी गई है।
केंद्र सरकार देश भर में पांच क्षेत्रीय सम्मेलन कर रही है ताकि खेती से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात हो सके। जयपुर में पहला सम्मेलन मंगलवार को शुरू हुआ।
इस सम्मेलन में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री और अधिकारी, प्रगतिशील किसान और कृषि विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।