CM योगी का बड़ा फैसला, यूपी में अब बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी MSP पर गेहूं बेच सकेंगे किसान

Gaon Connection | Apr 20, 2026, 12:29 IST
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब किसान बिना किसान पहचान पत्र के भी सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। हालांकि, एक जून 2026 से किसान पहचान पत्र अनिवार्य होगा। सरकार किसानों को समय रहते आईडी बनवाने की सलाह दे रही है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीद को लेकर अहम फैसला लिया है। अब किसान बिना किसान पहचान पत्र (फार्मर रजिस्ट्री) के भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे। ऐसे समय में जब राज्य में किसान रजिस्ट्री को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया तेज हो रही है, यह निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, खासकर उन किसानों के लिए जिनकी आईडी अभी तक नहीं बन पाई है।

बिना किसान पहचान पत्र भी होगी खरीद

कृषि विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से यह व्यवस्था लागू करने को कहा गया है। अब किसान पहले की तरह आसानी से सरकारी खरीद केंद्रों पर अपना गेहूं बेच सकेंगे और उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।




एक जून से पहचान पत्र अनिवार्य

हालांकि राज्य सरकार एक जून 2026 से किसान पहचान पत्र को अनिवार्य करने जा रही है। इसके लिए किसानों को 31 मई तक अपनी रजिस्ट्री बनवाने का समय दिया गया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

क्या है किसान पहचान पत्र और क्यों जरूरी

किसान पहचान पत्र एक डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान की जमीन, फसल और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ सीधे सही किसानों तक पहुंचे, पारदर्शिता बढ़े और फर्जीवाड़े पर रोक लगे।

योजनाएं और खरीद प्रक्रिया इससे जुड़ेंगी

सरकार की योजना है कि एक जून के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद, खाद-बीज की उपलब्धता और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ इसी पहचान पत्र के माध्यम से दिया जाएगा। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी।

तेजी से चल रहा पंजीकरण अभियान

प्रदेश में किसान पहचान पत्र बनाने का काम तेजी से चल रहा है। गांव-गांव में शिविर लगाकर और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए किसानों को इससे जोड़ा जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र किसान इससे वंचित न रहे।

किसानों के लिए क्या मतलब

इस फैसले से फिलहाल किसानों को राहत मिली है, क्योंकि वे बिना पहचान पत्र के भी गेहूं बेच सकेंगे। लेकिन आने वाले समय में योजनाओं का लाभ लेने और फसल बेचने के लिए किसान पहचान पत्र जरूरी होगा, इसलिए किसानों को समय रहते इसे बनवाना जरूरी है।
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