तोते खा गए अनार की फसल तो बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा किसान, 10 साल चला मुकदमा, अब सरकार को देना होगा इतना मुआवजा

Gaon Connection | Apr 27, 2026, 16:43 IST
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बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्णय तोतों को वन्यजीव के रूप में मान्यता देता है। अगर तोते किसी किसान की खेती में नुकसान पहुंचाते हैं, तो राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा। नागपुर खंडपीठ ने एक किसान को अनार के बाग में हुए नुकसान के लिए मुआवजे का आदेश दिया।
अनार की फसल को नुकसान पहुंचाते तोते
अनार की फसल को नुकसान पहुंचाते तोते
किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले तोतों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि तोते भी ‘वन्य जीव’ की श्रेणी में आते हैं और यदि उनकी वजह से किसानों की फसल को नुकसान होता है, तो राज्य सरकार को उसकी भरपाई करनी होगी। यह फैसला न सिर्फ किसानों के हित में अहम है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और कानून के दायरे को लेकर भी एक नई स्पष्टता देता है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश, तोते भी वन्य जीव घोषित

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ की न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एक किसान को उसके अनार के पेड़ों को तोतों द्वारा पहुंचाए गए नुकसान के लिए मुआवजा दे। अदालत ने कहा कि वन्यजीव अधिनियम के तहत तोते ‘वन्य जीव’ हैं और चूंकि ये राज्य की संपत्ति माने जाते हैं, इसलिए इनके कारण हुए नुकसान की भरपाई करना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे ऐसे कदम उठा सकते हैं जो वन्यजीवों के लिए हानिकारक हो सकते हैं, जिससे अधिनियम का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

किसान की याचिका और नुकसान का मामला

यह आदेश वर्धा जिले के हिंगी गांव के किसान महादेव डेकाटे की याचिका पर दिया गया, जिन्होंने बताया था कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभयारण्य से आए जंगली तोतों ने उनके अनार के बाग को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने लगभग 20 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया था। वन और कृषि विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद पाया कि करीब 50 प्रतिशत फल पक्षियों द्वारा नष्ट कर दिए गए थे। हालांकि अधिकारियों ने यह कहते हुए मुआवजा देने से इनकार कर दिया कि सरकारी आदेशों में तोतों जैसे पक्षियों से हुए नुकसान के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

सरकार का तर्क खारिज, कानून को दी प्राथमिकता

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि मुआवजा केवल जंगली हाथी और बाइसन द्वारा नुकसान की स्थिति में ही दिया जा सकता है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे आदेशों का उद्देश्य किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करना है। अदालत ने कहा कि केवल कुछ प्रजातियों के नुकसान को मान्य और अन्य को नजरअंदाज करना तर्कसंगत नहीं है। साथ ही यह समानता के सिद्धांत और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव अधिनियम एक विधायी कानून है और यह किसी भी सरकारी आदेश से ऊपर है।

मुआवजे का आदेश और व्यापक प्रभाव

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि 200 पेड़ों के नुकसान के लिए प्रति पेड़ 200 रुपये मुआवजा दिया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि 1972 के अधिनियम के तहत वन्य जीव राज्य की संपत्ति हैं और तोते भी इसमें शामिल हैं। ऐसे में नागरिकों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे वन्य जीवों से हुए नुकसान को सहन करें। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि मुआवजा नहीं दिया गया, तो लोग अपनी फसल बचाने के लिए ऐसे कदम उठा सकते हैं जो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस फैसले से न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में नीति और कानून दोनों के स्तर पर स्पष्ट दिशा भी तय होगी।
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