दार्जिलिंग चाय उद्योग को राहत, इस साल बढ़ सकता है प्रीमियम ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय का उत्पादन

Gaon Connection | May 06, 2026, 15:57 IST
Share
दार्जिलिंग चाय उद्योग को दो साल के सूखे के बाद राहत मिली है। इस साल अच्छी बारिश और अनुकूल मौसम के कारण प्रीमियम फर्स्ट फ्लश चाय का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल की तुलना में उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
फर्स्ट फ्लश चाय की बाजार में बड़ी मांग
फर्स्ट फ्लश चाय की बाजार में बड़ी मांग
पिछले दो वर्षों से सूखे और खराब मौसम की मार झेल रहे दार्जिलिंग चाय उद्योग के लिए इस बार राहत भरी खबर है। बेहतर बारिश और अनुकूल मौसम की वजह से इस साल प्रीमियम ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार फर्स्ट फ्लश फसल में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

दो साल बाद सुधरे हालात

'Business Line' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में लंबे सूखे के कारण दार्जिलिंग की महंगी और उच्च गुणवत्ता वाली फर्स्ट फ्लश चाय को भारी नुकसान हुआ था। इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (आईटीईए) के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कहा कि इस बार मौसम पहले की तुलना में काफी बेहतर रहा जिससे चाय की फसल में सुधार देखने को मिला है।

30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है उत्पादन

कुर्सियांग घाटी स्थित गिड्डापहाड़ टी एस्टेट के मालिक हिमांग्शु कुमार शॉ के अनुसार, इस बार लगभग सभी चाय बागानों में अच्छी बारिश हुई है। इसका असर उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है और लगभग हर बागान में फसल बढ़ी है। उद्योग को उम्मीद है कि इस साल फर्स्ट फ्लश चाय का कुल उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत ज्यादा रहेगा।

दार्जिलिंग की सबसे महंगी चाय मानी जाती है फर्स्ट फ्लश

दार्जिलिंग की फर्स्ट फ्लश चाय को दुनिया की सबसे महंगी चायों में गिना जाता है। यह सालाना कुल उत्पादन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होती है, लेकिन अपनी गुणवत्ता और ऊंची कीमत के कारण दार्जिलिंग चाय उत्पादकों की कुल वार्षिक आय में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक रहती है। फर्स्ट फ्लश की पत्तियों की तुड़ाई आमतौर पर मार्च के मध्य से शुरू होकर अप्रैल के आखिर तक चलती है।

पिछले साल गिर गया था उत्पादन

दार्जिलिंग चाय का उत्पादन लगातार गिर रहा है। 2024 में उत्पादन घटकर 5.60 मिलियन किलोग्राम रह गया था, जबकि पिछले साल यह और घटकर 5.30 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच गया, जो हाल के वर्षों का सबसे कम स्तर माना जा रहा है। दार्जिलिंग चाय का हर साल करीब 3 से 3.25 मिलियन किलोग्राम निर्यात होता है। यूरोप और जापान इसके सबसे बड़े विदेशी बाजार हैं। दार्जिलिंग चाय भारत का पहला ऐसा उत्पाद है, जिसे भौगोलिक संकेतक (GI टैग) मिला था।
Tags:
  • Darjeeling tea
  • first flush tea
  • Darjeeling tea industry
  • premium tea India
  • tea production increase
  • Darjeeling tea gardens
  • GI tag tea
  • Indian tea export
  • Darjeeling weather
  • tea industry India