मानसून कमजोर, लेकिन खरीफ की बुवाई सुधरी; अल नीनो पर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
Gaon Connection | Aug 19, 2026, 11:00 IST
केंद्र सरकार के मुताबिक, अल नीनो का खरीफ फसलों पर फिलहाल बड़ा असर नहीं दिख रहा है। 14 अगस्त तक खरीफ बुवाई का क्षेत्र 1,016.57 लाख हेक्टेयर पहुंच गया और कमी 1 प्रतिशत से भी कम रह गई। हालांकि, 1 जून से 18 अगस्त तक देश में बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। ECMWF और स्काईमेट ने सितंबर तक बारिश की कमी बढ़ने की आशंका जताई है।
सरकार ने बताया अल नीनो का असर
कमज़ोर मानसून और अल नीनो के बढ़ते प्रभाव के बीच खरीफ फसलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल खरीफ उत्पादन पर अल नीनो का बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में फसलों की बढ़वार के लिए पर्याप्त बारिश हुई है और खरीफ की बुवाई में शुरुआती कमी भी लगातार कम हो रही है। कुछ इलाक़ों में पानी की कमी और स्थानीय स्तर पर पैदावार प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा कि बारिश की स्थिति में रोज़ बदलाव हो रहा है, इसलिए अभी लगातार निगरानी की ज़रूरत है। उनके मुताबिक, बारिश की कमी के बावजूद फसलों की पानी की ज़रूरत अधिकांश हिस्सों में पूरी हुई है। सरकार के आकलन में ऐसे संवेदनशील ज़िलों की संख्या भी 262 से घटकर करीब 100 रह गई है। हालांकि, कर्नाटक और तेलंगाना में पानी की कमी की स्थिति बनी हुई है। दूसरी तरफ, यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF ने अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के आगे कमजोर पड़ने की आशंका जताई है, जिससे आने वाले हफ्तों में बारिश और खरीफ उत्पादन पर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 14 अगस्त तक देश में सभी खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 1,016.57 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह क्षेत्र 1,037.52 लाख हेक्टेयर था। यानी पिछले साल की तुलना में बुवाई में अंतर घटकर 1 प्रतिशत से भी कम रह गया है। 7 अगस्त तक यह कमी करीब 1.8 प्रतिशत थी।
देश में खरीफ फसलों का सामान्य क्षेत्र 1,104.46 लाख हेक्टेयर माना गया है और अब तक सामान्य क्षेत्र का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा बोया जा चुका है। बुवाई का अंतर कम होने से सरकार को खरीफ उत्पादन को लेकर तत्काल बड़े नुकसान की आशंका कम दिखाई दे रही है। कृषि मंत्री ने हालांकि यह भी कहा कि कुछ इलाक़ों में स्थानीय स्तर पर उपज प्रभावित हो सकती है। खास तौर पर कर्नाटक और तेलंगाना में पानी की कमी पर सरकार की नज़र है।
देश में 1 जून से 18 अगस्त के बीच कुल मानसूनी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। जून में संशोधित आंकड़ों के मुताबिक बारिश में 35 प्रतिशत की कमी थी, जबकि जुलाई में 1 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। अगस्त में भी 1 से 18 अगस्त के बीच बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 741 ज़िलों में से 361 ज़िलों में सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, सरकार का आकलन है कि फसलों की स्थिति फिलहाल अधिकांश हिस्सों में ठीक है और बुवाई क्षेत्र में कमी लगातार कम हो रही है।
कृषि मंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि बीज विधेयक और कीटनाशी प्रबंधन विधेयक तैयार हैं और इन्हें संसद के अगले सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के लिए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ा रोडमैप तैयार करने की बात भी कही।
केंद्र के आकलन के बीच यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (ECMWF) ने मानसून को लेकर अधिक सतर्क तस्वीर पेश की है। उसके मुताबिक, अल नीनो का प्रभाव बढ़ने से अगस्त के अंत तक मौजूदा बारिश वाला दौर कमजोर पड़ सकता है और सितंबर में भी बारिश की कमी बढ़ने की संभावना है। यूरोपीय एजेंसी के अनुमान में उत्तर-पश्चिम भारत से सितंबर के मध्य के आसपास मानसून की वापसी शुरू होने की बात कही गई है।
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने भी दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपना अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 85 प्रतिशत कर दिया है। 17 अगस्त को एजेंसी ने सूखे की 70 प्रतिशत संभावना जताई थी और कहा था कि सितंबर तक देश में बारिश की कमी बढ़ सकती है। इस तरह फिलहाल सरकार खरीफ फसलों पर अल नीनो के बड़े असर की आशंका नहीं मान रही है, लेकिन बारिश के आंकड़े और मौसम एजेंसियों के अनुमान आने वाले हफ्तों को महत्वपूर्ण बना रहे हैं। खरीफ उत्पादन की वास्तविक तस्वीर बुवाई के साथ-साथ अगस्त और सितंबर में होने वाली बारिश पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा कि बारिश की स्थिति में रोज़ बदलाव हो रहा है, इसलिए अभी लगातार निगरानी की ज़रूरत है। उनके मुताबिक, बारिश की कमी के बावजूद फसलों की पानी की ज़रूरत अधिकांश हिस्सों में पूरी हुई है। सरकार के आकलन में ऐसे संवेदनशील ज़िलों की संख्या भी 262 से घटकर करीब 100 रह गई है। हालांकि, कर्नाटक और तेलंगाना में पानी की कमी की स्थिति बनी हुई है। दूसरी तरफ, यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF ने अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के आगे कमजोर पड़ने की आशंका जताई है, जिससे आने वाले हफ्तों में बारिश और खरीफ उत्पादन पर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
खरीफ की बुवाई में कमी 1% से भी कम रह गई
देश में खरीफ फसलों का सामान्य क्षेत्र 1,104.46 लाख हेक्टेयर माना गया है और अब तक सामान्य क्षेत्र का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा बोया जा चुका है। बुवाई का अंतर कम होने से सरकार को खरीफ उत्पादन को लेकर तत्काल बड़े नुकसान की आशंका कम दिखाई दे रही है। कृषि मंत्री ने हालांकि यह भी कहा कि कुछ इलाक़ों में स्थानीय स्तर पर उपज प्रभावित हो सकती है। खास तौर पर कर्नाटक और तेलंगाना में पानी की कमी पर सरकार की नज़र है।
13% बारिश की कमी, 361 ज़िलों में सामान्य से कम वर्षा
कृषि मंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि बीज विधेयक और कीटनाशी प्रबंधन विधेयक तैयार हैं और इन्हें संसद के अगले सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के लिए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ा रोडमैप तैयार करने की बात भी कही।
अल नीनो से सितंबर तक बढ़ सकती है बारिश की कमी
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने भी दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपना अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 85 प्रतिशत कर दिया है। 17 अगस्त को एजेंसी ने सूखे की 70 प्रतिशत संभावना जताई थी और कहा था कि सितंबर तक देश में बारिश की कमी बढ़ सकती है। इस तरह फिलहाल सरकार खरीफ फसलों पर अल नीनो के बड़े असर की आशंका नहीं मान रही है, लेकिन बारिश के आंकड़े और मौसम एजेंसियों के अनुमान आने वाले हफ्तों को महत्वपूर्ण बना रहे हैं। खरीफ उत्पादन की वास्तविक तस्वीर बुवाई के साथ-साथ अगस्त और सितंबर में होने वाली बारिश पर काफी हद तक निर्भर करेगी।