कॉपर सल्फेट 70% तक हुआ महंगा, फंगीसाइड खर्च बढ़ने से कॉफी और सुपारी किसानों की बढ़ी मुश्किलें
Gaon Connection | Apr 29, 2026, 12:33 IST
कॉफी और सुपारी किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। कॉपर सल्फेट की कीमत 70% तक बढ़ गई है, जिससे फंगीसाइड स्प्रे महंगा हो गया है। चुनाव के बाद प्रवासी मजदूरों के न लौटने से खेत के काम प्रभावित हुए हैं। इससे उत्पादन और आय दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।
कॉफी और सुपारी खेती पर महंगाई की मार,
खेती की लागत पर बढ़ते दबाव के बीच कॉफी और सुपारी (अरेका नट) किसानों के लिए एक नई चिंता सामने आई है। कॉपर सल्फेट की कीमतों में तेज उछाल ने फंगीसाइड स्प्रे की लागत बढ़ा दी है, जो मानसून से पहले बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही इनपुट महंगे होने और मजदूरों की कमी जैसी चुनौतियों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे में उत्पादन और आय दोनों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
'बिजनेसलाइन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कॉपर सल्फेट की कीमत पिछले साल ₹270 प्रति किलो से बढ़कर अब ₹450 प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है, यानी करीब 70% की बढ़ोतरी। यूपीएएसआई कॉफी कमेटी के चेयरमैन साहदेव बालकृष्ण के अनुसार, यह बॉर्डो मिक्सचर बनाने के लिए जरूरी है, जिसका इस्तेमाल खासतौर पर अरेबिका कॉफी में लीफ रस्ट और ब्लैक रॉट जैसी फंगल बीमारियों से बचाव के लिए किया जाता है।
कर्नाटक ग्रोअर्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष बी.एस. जयराम ने कहा कि कॉपर सल्फेट जैसे इनपुट महंगे होने से खेती की लागत बढ़ेगी। इसके साथ ही चुनाव के बाद असम गए प्रवासी मजदूर अब तक वापस नहीं लौटे हैं, जिससे स्प्रे, छंटाई और अन्य जरूरी खेत कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, कुछ मजदूर धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।
ऑल इंडिया अरेका नट ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश पुछप्पडी के अनुसार, इस साल कॉपर सल्फेट की कीमत ₹450 से ₹530 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पिछले साल ₹290 के आसपास थी। सुपारी बागानों में पहले से ही बीमारियों और ज्यादा तापमान के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, पिछले सीजन में लगभग 50% तक नुकसान हुआ। ऐसे में इनपुट महंगे होने से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
कैंपको के अध्यक्ष एस.आर. सतीशचंद्र ने बताया कि सहकारी संस्था अपने किसानों को ₹450 प्रति किलो की सब्सिडी दर पर कॉपर सल्फेट उपलब्ध करा रही है। किसान हर 100 किलो सुपारी बिक्री पर 2 किलो सब्सिडी पर खरीद सकते हैं, जबकि अन्य के लिए कीमत ₹490 प्रति किलो है। हालांकि स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन बढ़ती लागत के कारण छोटे किसानों के लिए खेती करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।