45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में उगा दिए कश्मीरी सेब! यूपी के किसान का कमाल, जानिए कैसे मिली सफलता

Gaon Connection | Jun 15, 2026, 14:43 IST
Share

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के पाही हरदो गाँव के मनजीत सिंह नामक किसान ने 45-46 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले क्षेत्र में कश्मीरी सेब की सफल खेती कर नई मिसाल पेश की है। एक एकड़ में लगाए गए सेब के बाग़ में वैज्ञानिक तरीकों, नेट कवर और नियमित देखभाल के ज़रिए उत्पादन लिया जा रहा है। आइये जानते हैं कि इतने गर्म इलाके में सेब की खेती कैसे संभव हुई और इससे दूसरे किसानों को क्या सीख मिलती है। यह कहानी हर उस किसान के लिए प्रेरणा है जो अपने खेत में कुछ नया करना चाहता है।

उन्नाव के किसान ने गर्मी में उगाए सेब
उन्नाव के किसान ने गर्मी में उगाए सेब
उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के पाही हरदो गाँव के किसान मनजीत सिंह ने वह कर दिखाया है जिसे कुछ साल पहले तक असंभव माना जाता था। जहाँ गर्मियों में तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है वहाँ उन्होंने कश्मीरी सेब की खेती कर सबको हैरान कर दिया है। सही तकनीक, लगातार मेहनत और नए प्रयोगों के दम पर मनजीत सिंह ने यह साबित किया है कि खेती में सोच बदलकर नई संभावनाएँ पैदा की जा सकती हैं।

आइये जानते हैं कि इतने गर्म इलाके में सेब की खेती कैसे संभव हुई और इससे दूसरे किसान क्या सीख ले सकते हैं। मनजीत सिंह की यह कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कुछ नया करने का सपना देखते हैं।

हरीमन-99 ने बदली तस्वीर

मनजीत सिंह ने अपने बाग़ में हरीमन-99 किस्म के सेब लगाए हैं। उनके अनुसार यह कश्मीरी सेब की ही एक किस्म है, जो 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी सफलतापूर्वक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। यही वजह है कि मैदानी और गर्म क्षेत्र होने के बावजूद उन्नाव में इसकी खेती संभव हो सकी। उन्होंने बताया कि यह खेती आसान नहीं रही। मौसम और विभिन्न प्रकार की बीमारियों ने कई बार चुनौतियाँ खड़ी कीं, लेकिन लगातार निगरानी और प्रबंधन की मदद से बाग़ को विकसित किया गया।

जहाँ पड़ती है भीषण गर्मी, वहाँ लहलहाया सेब का बाग़
जहाँ पड़ती है भीषण गर्मी, वहाँ लहलहाया सेब का बाग़

फ्रूट फ्लाई से हुआ नुकसान, नेट से मिला समाधान

किसान के मुताबिक पिछले वर्ष फ्रूट फ्लाई की समस्या ने बाग़ को प्रभावित किया था, जिससे फलों को नुकसान पहुँचा। इसके बाद इस वर्ष फल लगने के बाद पूरे पेड़ों को नेट से ढक दिया गया। इस प्रयोग का सकारात्मक परिणाम मिला और फ्रूट फ्लाई से फलों को नुकसान नहीं पहुँचा। हालांकि इस बार अधिक गर्मी के कारण कुछ फलों में नीचे से सड़न की समस्या देखने को मिली।

गर्मी से बचाव के लिए अपनाया नया तरीका

मनजीत सिंह का मानना है कि अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए मिट्टी प्रबंधन अहम भूमिका निभा सकता है। उनका अनुभव है कि पेड़ों के नीचे घास की परत बनाकर नमी बनाए रखने से तापमान का असर कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि अगले सीज़न में पेड़ों के नीचे घास की मोटी परत तैयार की जाएगी, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे और गर्मी का प्रभाव कुछ हद तक कम हो सके।

एक एकड़ में लगाए 750 पौधे

मनजीत सिंह ने करीब एक एकड़ क्षेत्र में सेब का बाग़ लगाया है। शुरुआत में यहाँ लगभग 750 पौधे लगाए गए थे। हालांकि फंगस, कीटों और अन्य कारणों से कुछ पौधे खराब हो गए, लेकिन वर्तमान में 650 से अधिक पेड़ अच्छी स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि पौधरोपण से पहले एक मीटर लंबा, एक मीटर चौड़ा और एक मीटर गहरा गड्ढा तैयार किया गया। इसमें गोबर की सड़ी खाद, नीम की खली, फफूँदनाशक और अन्य आवश्यक सामग्री मिलाकर पौधे लगाए गए।

तीन साल बाद शुरू हुई फ्रूटिंग

किसान के अनुसार पौधे लगाने के लगभग तीन साल बाद फ्रूटिंग शुरू हुई। बाग़ की नियमित देखभाल, सिंचाई, रोग प्रबंधन और समय-समय पर छँटाई से पेड़ों का विकास बेहतर हुआ। हर वर्ष नवंबर-दिसंबर में पेड़ों की प्रूनिंग की जाती है ताकि पेड़ों की ऊँचाई नियंत्रित रहे और शाखाएँ अत्यधिक घनी न होने पाएँ।

100 रुपये किलो से अधिक में बिके सेब

मनजीत सिंह ने बताया कि उनके बाग़ के सेब 100 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक चुके हैं। हालांकि फलों में अभी पूरी तरह लाल रंग नहीं आ पाया है, इसलिए उन्हें ग्रीन एप्पल के रूप में बेचना पड़ा। उनका कहना है कि स्वाद के मामले में यह सेब कश्मीरी सेब जैसा ही है। यदि मौसम से जुड़ी कुछ समस्याएँ नहीं आतीं, तो फलों में अपेक्षित रंग भी बेहतर तरीके से विकसित हो सकता था।

इंटरक्रॉपिंग भी संभव, लेकिन सावधानी ज़रूरी

बाग़ में पेड़ों के बीच पर्याप्त दूरी रखी गई है। ऐसे में इंटरक्रॉपिंग की संभावना भी मौजूद है। हालांकि किसान का मानना है कि ऐसी फसलें चुननी चाहिए, जिनसे रोग और कीटों का असर सेब के पेड़ों पर न पड़े। उनके अनुसार यदि दूसरी फसलों से आने वाली बीमारियाँ बाग़ को प्रभावित करेंगी, तो इंटरक्रॉपिंग का लाभ कम हो जाएगा।
Tags:
  • Apple Orchard
  • Apple Farming Success Story
  • Uttar Pradesh Farmer
  • Apple Production
  • Modern Agriculture
  • Farming Innovation
  • Horticulture Farming
  • Fruit Grower
  • Agriculture News
  • Farmer Success Story