खरीफ 2026 के लिए एक्शन मोड में सरकार, बीज से लेकर बीमा तक बना प्लान, 9.76 करोड़ किसानों की बनी फार्मर आईडी
Gaon Connection | May 29, 2026, 16:09 IST
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए देश में जरूरत से 11% अधिक बीज उपलब्ध हैं। 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार किया गया है। अब तक 9.76 करोड़ किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है। सरकार कृषि ऋण, फसल बीमा, प्राकृतिक खेती और 'खेत बचाओ अभियान' पर विशेष फोकस कर रही है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को लेकर अपनी तैयारियों का खाका पेश किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ 2026 के लिए देश में जरूरत से अधिक गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध हैं और किसानों को समय पर बीज, खाद, ऋण तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है।
दो दिवसीय सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में खरीफ फसलों की तैयारी, कृषि ऋण, फसल बीमा, प्राकृतिक खेती और कृषि तकनीकों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए देश को लगभग 173 लाख क्विंटल बीज की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में 192 लाख क्विंटल गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध हैं। यानी जरूरत की तुलना में करीब 11 प्रतिशत अधिक बीज का भंडार मौजूद है। राज्यों को उनकी मांग के अनुसार बीज आवंटित कर दिए गए हैं ताकि बुवाई से पहले किसानों तक बीज पहुंच सके।
मंत्री ने कहा कि मौसम की अनिश्चितताओं और संभावित देरी से मानसून को देखते हुए सरकार ने 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार किया है। यदि कहीं बारिश में देरी होती है, बुवाई प्रभावित होती है या दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ती है तो किसानों को इस भंडार से बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि अब तक 9 करोड़ 76 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। उनके अनुसार इससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार दस्तावेज जमा नहीं करने पड़ेंगे। साथ ही खाद वितरण और अन्य कृषि सेवाओं को भी अधिक पारदर्शी और लक्षित बनाया जा सकेगा।
सम्मेलन में कृषि ऋण की उपलब्धता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। चौहान ने कहा कि देश में औसत कृषि ऋण राशि करीब 1.33 लाख रुपये है, लेकिन विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में इसमें बड़ा अंतर देखने को मिलता है। पूर्वी भारत में किसानों को अपेक्षाकृत कम ऋण मिल रहा है। ऐसे राज्यों में बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाकर ऋण उपलब्धता बढ़ाने पर काम किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो अपनी जमीन के बजाय पट्टे या बटाई पर खेती करते हैं। कुछ राज्यों ने ऐसे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए अलग व्यवस्था विकसित की है। इन मॉडलों का अध्ययन कर राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाएगा।
सरकार प्राकृतिक खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। कृषि मंत्री के अनुसार करीब 20 लाख किसानों ने 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने राज्यों के कृषि मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग अपनाने की अपील की।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 1 जून से 30 जून तक देशभर में 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान गांव-गांव जाकर किसानों को खेती से जुड़ी नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। अभियान के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि यंत्रों से जुड़ी सुविधाएं भी किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
मौसम विभाग द्वारा सामान्य से कम बारिश की संभावना जताए जाने के सवाल पर कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। विभिन्न जिलों के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी मौसमीय चुनौती का प्रभाव खेती पर कम से कम पड़े।