38% से घटकर 15% हुआ बारिश का घाटा, लेकिन खरीफ़ बुआई अब भी बड़ी चुनौती: रिपोर्ट
Gaon Connection | Jul 11, 2026, 16:40 IST
देश में मानसून की तेज़ बारिश से वर्षा का घाटा एक सप्ताह में 38 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गया है। हालांकि, कैपिटल 360 की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ़ फसलों की बुआई अब भी पिछले साल के मुकाबले 20.8 प्रतिशत पीछे है। तिलहन, कपास, दलहन, मोटे अनाज और धान की बुआई में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और बुआई की रफ़्तार ही कृषि उत्पादन की दिशा तय करेगी।
मानसून सुधरा, लेकिन खेती की मुश्किलें बरकरार
देश में मानसून ने पिछले एक सप्ताह के दौरान तेज़ी से रफ़्तार पकड़ी है। लगातार हुई अच्छी बारिश से बारिश का घाटा काफ़ी कम हुआ है और कई इलाक़ों में किसानों को राहत मिली है। इसके बावजूद खरीफ़ फसलों की बुआई अब भी पिछले साल के मुक़ाबले काफ़ी पीछे चल रही है। ऐसे में अच्छी बारिश के बावजूद खेती पर अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
फाइनेंशियल फर्म कैपिटल 360 की रिपोर्ट के अनुसार, बारिश की स्थिति में सुधार ज़रूर हुआ है, लेकिन आने वाले हफ़्तों में खरीफ़ बुआई की गति और अलग-अलग राज्यों में बारिश का वितरण कृषि क्षेत्र के लिए सबसे अहम कारक रहेगा। यही तय करेगा कि इस सीज़न में खेती और फसल उत्पादन पर मानसून का कितना सकारात्मक असर पड़ता है।
कैपिटल 360 की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जुलाई तक देश में सामान्य से कम बारिश का घाटा घटकर 15 प्रतिशत रह गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह 38 प्रतिशत था। इस दौरान हुई तेज़ बारिश ने हालात में बड़ा सुधार किया। 8 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश में 83.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 57.5 मिमी बारिश होती है। यानी साप्ताहिक वर्षा सामान्य से 45 प्रतिशत अधिक रही। रिपोर्ट के अनुसार, अच्छी बारिश का असर अब ज़्यादा इलाक़ों में दिखाई देने लगा है। देश के 36 मौसम उपखंडों में से 25 में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं, देश के लगभग 49 प्रतिशत ज़िलों में भी सामान्य या उससे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जलाशयों में पानी का स्तर भी बेहतर हुआ है। गुरुवार तक देश के प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का 32.4 प्रतिशत पानी मौजूद था। हालाँकि यह स्तर पिछले साल की समान अवधि से 36 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले 10 वर्षों के औसत से 7.5 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, अच्छी बारिश के बावजूद खरीफ़ फसलों की बुआई अभी भी पिछले साल की तुलना में काफ़ी पीछे है। रविवार तक कुल खरीफ़ बुआई सालाना आधार पर 20.8 प्रतिशत कम रही। सबसे अधिक गिरावट तिलहन की बुआई में दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुक़ाबले 39.3 प्रतिशत कम है। इसके बाद कपास की बुआई 22.9 प्रतिशत, दलहन 21.8 प्रतिशत, मोटे अनाज 16.4 प्रतिशत और धान की बुआई 13.1 प्रतिशत पीछे रही।
गन्ना एकमात्र प्रमुख फसल रही, जिसकी बुआई में 1.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। कैपिटल 360 का कहना है कि मानसून की स्थिति में तेज़ सुधार ज़रूर हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में खरीफ़ बुआई की रफ़्तार और अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का संतुलित वितरण कृषि क्षेत्र की दिशा तय करेगा। यही दोनों कारक इस सीज़न में खेती और उत्पादन पर सबसे ज़्यादा असर डालेंगे।
फाइनेंशियल फर्म कैपिटल 360 की रिपोर्ट के अनुसार, बारिश की स्थिति में सुधार ज़रूर हुआ है, लेकिन आने वाले हफ़्तों में खरीफ़ बुआई की गति और अलग-अलग राज्यों में बारिश का वितरण कृषि क्षेत्र के लिए सबसे अहम कारक रहेगा। यही तय करेगा कि इस सीज़न में खेती और फसल उत्पादन पर मानसून का कितना सकारात्मक असर पड़ता है।
बारिश का घाटा 38% से घटकर 15% हुआ, कई इलाक़ों में सुधरी स्थिति
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जलाशयों में पानी का स्तर भी बेहतर हुआ है। गुरुवार तक देश के प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का 32.4 प्रतिशत पानी मौजूद था। हालाँकि यह स्तर पिछले साल की समान अवधि से 36 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले 10 वर्षों के औसत से 7.5 प्रतिशत अधिक है।
अच्छी बारिश के बावजूद खरीफ़ बुआई की रफ़्तार धीमी, तिलहन और कपास सबसे ज़्यादा पीछे
गन्ना एकमात्र प्रमुख फसल रही, जिसकी बुआई में 1.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। कैपिटल 360 का कहना है कि मानसून की स्थिति में तेज़ सुधार ज़रूर हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में खरीफ़ बुआई की रफ़्तार और अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का संतुलित वितरण कृषि क्षेत्र की दिशा तय करेगा। यही दोनों कारक इस सीज़न में खेती और उत्पादन पर सबसे ज़्यादा असर डालेंगे।