अब ग्रीनहाउस और खेतों में भी उगेगा ₹40,000 किलो वाला गुच्छी मशरूम! SKUAST-K के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा कमाल
Gaon Connection | Apr 15, 2026, 13:17 IST
कश्मीर के वैज्ञानिकों ने गुच्छी मशरूम की अनोखी खेती की विधि खोजी है। अब यह मशरूम ग्रीनहाउस और विभिन्न खेतों में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी बाजार मूल्य अत्यधिक है और इसके औषधीय गुण अनेक बीमारियों के इलाज में मददगार साबित होंगे। इस उपलब्धि के कारण स्थानीय किसानों के लिए नए आय के मार्ग खुलेंगे।
दुनिया की सबसे महंगे मशरूम को अब खेतों में भी उगाया जा सकेगा
कश्मीर से कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। 'Business Line' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST-K) के वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ मानी जाने वाली गुच्छी (मोर्चेला) मशरूम की खेती की तकनीक सफलतापूर्वक विकसित कर ली है। दशकों से वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बनी इस मशरूम को अब नियंत्रित ग्रीनहाउस और खुले खेतों में उगाना संभव हो गया है।
गुच्छी मशरूम, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कानी गुच्छी’ या ‘कंगिच’ कहा जाता है, अपने अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इसकी कीमत बाजार में ₹15,000 से ₹40,000 प्रति किलोग्राम तक होती है, जिससे यह दुनिया के सबसे महंगे गैर-काष्ठ वन उत्पादों में शामिल है। अब तक यह केवल जंगलों में खास मौसम और परिस्थितियों में ही उगती थी, जिससे यह बेहद दुर्लभ और महंगी बनी हुई थी।
इस उपलब्धि के पीछे दो शोध टीमों की वर्षों की मेहनत है। डॉ. तारिक ए. सोफी और उनके पीएचडी छात्र कामरान मुनीर ने ग्रीनहाउस में इसकी खेती को सफल बनाया, जबकि डॉ. विकास गुप्ता ने खुले खेतों में इसकी खेती की तकनीक विकसित की। फिलहाल 10 में से 3 किस्मों में सफलता मिल चुकी है और बाकी पर काम जारी है।
यह सफलता गुच्छी मशरूम को जंगलों तक सीमित दुर्लभ उत्पाद से निकालकर एक व्यावसायिक फसल में बदलने की दिशा में बड़ा कदम है। स्कॉस्ट-कश्मीर के कुलपति प्रो. नज़ीर अहमद गनई ने इसे गेमचेंजर बताते हुए कहा कि इससे किसानों, ग्रामीण युवाओं और वन-निर्भर समुदायों के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे, साथ ही हिमालयी वनों पर दबाव भी कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के बड़े स्तर पर लागू होने से जम्मू-कश्मीर ‘खेती से उत्पादित गुच्छी’ का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है। इससे न केवल कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र को एक उच्च-मूल्य जैव-अर्थव्यवस्था हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
विश्वविद्यालय अब इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, पायलट प्रोजेक्ट और तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से सक्षम बनाया जाएगा, ताकि गुच्छी मशरूम की खेती को बड़े एग्री-बिजनेस के रूप में विकसित किया जा सके।
क्यों खास है गुच्छी मशरूम
गुच्छी मशरूम की खेती हुई आसान