आलू, मटर, चना और सरसों में नहीं लगेंगे रोग, अगर किसान रखें इन बातों का ध्यान

आलू, हरी मटर, टमाटर की खेती से ज्यादा मुनाफा कैसे कमाएं, किन बातों को शुरुआत में ध्यान रखें ताकि रोग न लगें और फसलों का उत्पादन ज्यादा हो..

आलू, मटर, चना और सरसों में नहीं लगेंगे रोग, अगर किसान रखें इन बातों का ध्यान

सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। किसी भी सीजन की खेती में सबसे ज्यादा खर्च और समस्या फसल सुरक्षा की आती है। रोग, कीट और खतपरवार के चलते न सिर्फ उत्पादन गिरता है जबकि फसल बचाने में काफी पैसे भी खर्च होते हैं।

खरीफ के सीजन के बाद किसान रबी की फसल बोएंगे। आलू, चना, मटर और उड़द समेत कई फसलों को बोने के दौरान अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो फसल सुरक्षा पर लगने वाला खर्च न सिर्फ काफी कम किया जा सकता है बल्कि उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सीतापुर जिले के कटिया कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. डीएस श्रीवास्तव किसानों को कुछ सुझाव दे रहे हैं।

डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक किसान भाई फसल की तैयारी करते समय ही यदि एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन को ध्यान में रखकर फसल का चयन करें तो निश्चित ही उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो सकती है। इस समय रबी फसलों की तैयारी के साथ-साथ खरीफ फसलों में भी कीट एवं रोगों से बचाव की आवश्यकता है, वर्तमान समय में किसानो के लिए मुख्य सलाह-


फूल गोभी एवं पत्ता गोभी की खेती

प्रजाति- कला सड़न रोग अवरोधी फूल गोभी की प्रजाति पूसा मुक्ता, और काला पैर बीमारी अवरोधी प्रजाति पूसा ड्रम हेड का चयन करें।

- काला सड़न अवरोधी पत्ता गोभी की प्रजाति पूसा शुभ्रा, पूसा स्नो बाल के-1 , पूसा स्नो बाल के टी - 25 का चयन करें।

बीज एवं भूमि उपचार

बीज उपचार ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास 5 मिली० ली०/ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करें।

नर्सरी उपचार हेतु ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास को गोबर की खाद या केंचुआ की खाद में मिलाकर करें।

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवारों से बचाव हेतु मल्चिंग का प्रयोग करें।

फसल पूर्व कीट नियंत्रण

बुवाई से पूर्व खेत के आस पास गेंदा, गाजर, सरसों, लोबिया, अल्फ़ा अल्फ़ा, सौंफ, सेम इत्यादि पौध रोपित करें।

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आलू की खेती करते समय इन बातों का रखें ध्यान

प्रजाति- विषाणु रोग एवं झुलसा रोग अवरोधी प्रजाति कुफरी बादशाह एवं केवल झुलसा अवरोधी प्रजाति चिप्सोना 1, 2, या 3 का चयन करें।

बीज एवं भूमि उपचार

-बीज उपचार ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास 5 मिली० ली०/ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करें।

-भूमि उपचार हेतु 5 किलो ग्राम ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास को 250 क्विंटल गोबर की खाद या 100 क्विंटल केंचुआ की खाद में मिलाकर प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।

फसल पूर्व कीट नियंत्रण

-बुवाई से पूर्व खेत के आस पास लोबिया, गाजर, सौंफ, सेम अल्फ़ा अल्फ़ा, सरसों इत्यादि की बुवाई करें।

-रक्षक फसल जैसे ज्वार, बाजरा या मक्का की घनी चार कतार खेत के किनारे किनारे मुख्य फसल की बुवाई के एक माह पूर्व करें।

-बुवाई से पूर्व खेत में नीम की खली 80 किलोग्राम प्रति एकड़ प्रयोग करें।

खरपतवार प्रबंधन

-फसल जमाव पूर्व खरपतवारनाशी आक्सीफ्लोरफेन 23.5 प्रतिशत ईसी की 170-340 मिली लीटर मात्रा को 200- 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ बुवाई के 3 दिन के अंदर प्रयोग करें।

पोषक तत्व प्रबंधन

- मृदा स्वास्थ्य कार्ड की संस्तुति के आधार पर उर्वरको का प्रयोग करें।

-माइकोराइज़ा एवं प्लांट ग्रोथ प्रमोटिंग राइजो बैक्टीरिया का प्रयोग करें।


सरसों की खेती की जानकारियां

प्रजाति

-सफ़ेद किट्ट, झुलसा एवं चूर्डिल आसिता बीमारी से बचाव के लिए अवरोधी प्रजाति येलो सरसो-11, इंडियन सरसों-91, तोरिया-16, ब्लैक सरसों-1 का चयन करें।

बीज एवं भूमि उपचार

-बीज शोधन ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास 5 मिली० लीटर/ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करें।

-बीज उपचार एजोटोबैक्टर कल्चर 240 ग्राम/ एकड़ बीज के हिसाब से करें।

-भूमि उपचार हेतु 5 किलो ग्राम ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास को 250 क्विंटल गोबर की खाद या 100 क्विंटल केंचुआ की खाद में मिलाकर प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।

फसल पूर्व कीट नियंत्रण

बुवाई से पूर्व खेत के आस पास लोबिया, रेडी, सौंफ, इत्यादि की बुवाई करें।

-रक्षक फसल जैसे ज्वार, बाजरा या मक्का की घनी चार कतार खेत के किनारे किनारे मुख्य फसल की बुवाई के एक माह पूर्व करें।

खरपतवार प्रबंधन

-फसल जमाव पूर्व खरपतवारनाशी आक्सीडीआर्जिल 6 प्रतिशत ईसी की 600 मिली ली० मात्रा को 200 ली पानी में मिलाकर प्रति एकड़ बुवाई के 3 दिन के अंदर प्रयोग करें।

पोषक तत्व प्रबंधन

-खेत की तैयारी के समय गोबर की सड़ी हुई खाद 40 क्विंटल/एकड़ या केंचुआ खाद 20 क्विंटल/एकड़ प्रयोग करें।

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मटर की खेती में ज्यादा उत्पादन कैसे लें

प्रजाति-मटर की बौनी चूर्डिल आसिता अवरोधी प्रजाति पंत पी-5, आज़ाद पी-4, पूसा पन्ना, डी आर आर-13, एच एफ पी-8909 का चयन कर सकते हैं।

बीज एवं भूमि उपचार

- बीज शोधन ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास 5 मिली० लीटर प्रति ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करें।

- बीज उपचार राइज़ोबियम कल्चर 10 ग्राम/किलोग्राम बीज के हिसाब से करें।

- भूमि उपचार हेतु 5 किलो ग्राम ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास को 250 कुं० गोबर की खाद या 100 कु० केंचुआ की खाद में मिलाकर प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।

फसल पूर्व कीट नियंत्रण

-बुवाई से पूर्व खेत के आस पास ग्वार, लोबिया, गाजर, सेम, अल्फ़ा अल्फ़ा, सरसो, कॉसमॉस, डंडीलियॉन, सौंफ, पार्सले, धनिया इत्यादि की बुवाई करें।

-रक्षक फसल जैसे ज्वार, बाजरा या मक्का की घनी चार कतार खेत के किनारे-किनारे मुख्य फसल की बुवाई के एक माह पूर्व करें।

मटर में टमाटर या गेंदा की अन्तः फसल अवश्य लें।

खरपतवार प्रबंधन

-बुवाई से पूर्व खेत की हल्की सिंचाई कर उगी हुई खरपतवार की निकाई करें, उसके बाद मुख्य फसल की बुवाई करें।

-मल्चिंग का प्रयोग करें।

पोषक तत्व प्रबंधन

-खेत की तैयारी के समय गोबर की सड़ी हुई खाद 40 कुन्तल/एकड़ या केचुआ खाद 20 कुंतल/एकड़ प्रयोग करें।


टमाटर की खेती करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

टमाटर की प्रजातियां

-टमाटर की सूत्रकृमि अवरोधी प्रजाति पूसा-120, पूसा हाइब्रिड -2,पूसा हाइब्रिड-4 का चयन कर सकते हैं।

-विषाणु रोग रोधी प्रजाति कशी विशेष, काशी अमृत का चयन कर सकते हैं।

- जीवाणु उकठा अवरोधी प्रजाति अर्का अनन्या, अर्का आभा का चयन कर सकते हैं।

बीज एवं भूमि उपचार

- नर्सरी उपचार ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास से करें।

-भूमि उपचार हेतु 5 किलो ग्राम ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास को 250 कुं० गोबर की खाद या 100 कु० केंचुआ की खाद में मिलाकर प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।

डॉ. डीएस श्रीवास्तव, आईसीआर के पूरे देश में संचालित होने वाले कृषि विज्ञान केंद्र में पादप रक्षा वैज्ञानिक हैं। और इस वक्त यूपी के सीतापुर जिले के कटिया में तैनात हैं।

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