उत्तर भारत में बारिश के साथ पड़े ओले, इस समय किसान करें खेती के ये जरूरी काम

Divendra SinghDivendra Singh   19 Jan 2019 8:03 AM GMT

उत्तर भारत में बारिश के साथ पड़े ओले, इस समय किसान करें खेती के ये जरूरी काम

लखनऊ। ज्यादातर किसानों ने इस समय गेहूं की बुवाई कर ली है, सरसों और दलहनी फसलों में फूल भी आ गए हैं। इस समय किसान कुछ उपाय अपनाकर अपनी फसल का उत्पादन बढ़ा सकता है।

गेहूं किसान करें ये काम

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में इस सप्ताह हल्की बारिश होने की संभावना है। इसलिए उसी हिसाब से सिंचाई करें। गेहूं की फसल में कल्ले निकलने की अवस्था में पर्याप्त नमी की दशा में नाइट्रोजन की शेष मात्रा की टॉप ड्रेसिंग करें। गेहूंसा और जंगली जई जैसे पतले पत्ते वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की 33 ग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा बुवाई के 20-25 दिन के बाद 300 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

केंद्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी देशभर में रबी फसलों की बुवाई के आंकड़ों के अनुसार, इस बार गेहूं की बुवाई 294.7 लाख हेक्टेयर हुई है। जबकि दलहन की बुवाई 147.91 लाख हेक्टेयर हुई है। मोटे अनाज का रकबा 44.98 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। साथ ही सरसों की बुवाई 68.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में हुई है।

संकरी और चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवारों के एक साथ नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत और मेट सल्फोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 20 प्रतिशत डब्लू.जी. 20 ग्राम पहली सिंचाई के बाद 300 ली. प्रति हेक्टेयर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। गेरूई रोग के उपचार के लिए प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत की 500 मिली. प्रति हेक्टेयर लगभग 750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

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दलहनी फसलों की खेती

चना व मटर में फली छेदक और सेमीलूपर कीटों की रोकथाम के लिए मृत 250 सूंड़ियों का रस 200 से 300 ली. पानी में मिलाकर 0.5 प्रतिशत गुड़ के साथ प्रति एक सूंडी प्रति 10 पौध दिखाई पड़ने पर छिड़काव करना चाहिए। या फिर फूल आने पर यदि प्रकोप दिखाई दे तो बेसिलस थूरिनजिएन्सिस (बी.टी.) की कास्टकी प्रजाति 1.0 किग्रा. अथवा मैलाथियान 50 प्रतिशत ई.सी. की 2.0 ली. मात्रा का बुरकाव अथवा 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।


खेत में यदि कटुआ कीट दिखाई दे रहे हों तो स्थान-स्थान पर बर्ड पर्चर लगाएं और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई स्थानों पर घास-फूस रखें। सुबह के समय फूस पर छिपे हुए कटुआ कीटों को इकट्ठा कर समाप्त करें। मटर की फसल में पत्तियों, फलियों और तनों पर सफेद चूर्ण की तरह बुकनी रोग (पाउडरी मिल्डयू) दिखाई देने पर इसकी रोकथाम के लिए घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत दो किग्रा. अथवा ट्राईडेमार्फ 80 प्रतिशत ई.सी. 500 मिली. प्रति हेक्टेयर लगभग 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

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मटर में अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा और तुलासिता रोग के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 डब्लू.पी. की दो किग्रा. अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की दो किग्रा. या कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू.पी. की तीन किग्रा. मात्रा प्रति हेक्टेयर लगभग 500-600 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें।

अरहर में पत्ती लपेटक कीट की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. 800 मिली. प्रति हेक्टेयर की दर से घोल तैयार कर छिड़काव करें। अरहर की फली मक्खी के नियंत्रण के लिए फूल आने के बाद मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. अथवा डाइमेथोएट 30 ई.सी. एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रभावित फसल पर छिड़काव करें।



सरसों की खेती

अल्टरनेरिया, पत्ती धब्बा, सफेद गेरूई और तुलासिता रोग के नियन्त्रण के लिए मैंकोजेब 75 डब्लू.पी. 2.5 किग्रा. अथवा जिनेब 75 प्र्रतिशत डब्लू.पी. की 2.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर लगभग 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

आरा मक्खी, पत्ती सुरंगक और बालदार सूड़ी के नियन्त्रण के लिए मैलाथियान 5 प्रतिशत डब्लू.पी. 20-25 किग्रा. प्रति हेक्टेयर बुरकाव अथवा मैलाथियान 50 प्रतिशत ई.सी. 1.50 लीटर की दर से लगभग 600 से 750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

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