कृषि के लिए तेलंगाना सरकार का बड़ा फैसला, बिना पर्ची नहीं मिलेगा कीटनाशक

कृषि के लिए तेलंगाना सरकार का बड़ा फैसला, बिना पर्ची नहीं मिलेगा कीटनाशकये किसान अपने मुंह से फूंककर कीटनाशक का पाइप साफ कर रहा है जो गलत है। फोटो- विनय गुप्ता।

तेलंगाना में पिछले साल अगस्त में के एक साथ लगभग 25 काले हिरणों की मौत हो गयी थी। जब जांच की गयी तो पता चला कि उनकी मौत कीटनाशकों की वजह से हुई है। ये हिरण जिस खेत में घास चर रहे थे, उस खेत में कीटनाशक का छिड़काव हुआ था। महाराष्ट्र में कीटनाशक का छिड़काव करते समय में किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ऐसे में तेलंगाना सरकार ने कीटनाशकों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। उसके अनुसार अब किसानों को आसानी से कीटनाशक नहीं दिए जाएंगे। तेलंगाना सरकार पहले भी किसानों के हित के लिए कई बड़े फैसले किए हैं।

तेलंगाना कृषि विभाग ने कीटनाशकों की बिक्री पर कड़ा रुख अपनाया है। कृषि विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि किसानों को मेडिकल स्टोर से कीटनाशक तभी दिए जाएंगे जब कृषि अधिकारी उसे लिखकर देगा। किसान भी अब मनमाने रूप से कीटनाशकों की खरीद नहीं कर पाएंगे।

ये भी पढ़ें- बिना डिग्री और डिप्लोमा वाले कीटनाशक विक्रेताओं को ट्रेनिंग दे रही सरकार

इस बारे में उप कृषि निदेशक मोहन रेड्डी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया "तेलंगाना में उर्वरक और कीटनाशकों के 8513 डीलर्स हैं। जबकि 7878 निजी दुकानें और 635 दुकानें कोऑपरेटिव द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी विक्रेताओं को कहा गया है कि बिना वेरीफाइड स्लिप के आप सीधे किसानों को किसी भी तरह की कीटनाशक नहीं बेचेंगे।"

वहीं इस बारे में कृषि आयुक्त, तेलंगाना, कहते हैं "सभी कृषि विस्तार अधिकारियों को कहा गया है कि वे किसानों को पर्ची पर लिखकर देंगे कि कब और कितना कीटनाशक खरीदना है। विक्रेताओं को इसके लिए सख्त रूप से आदेश दिए गए गए हैं। सभी कृषि विस्तार अधिकारियों को इसके लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।

ये भी पढ़ें- कोरॉजन कीटनाशक के प्रयोग से गन्ना किसानों को होगा नुकसान: गन्ना एवं चीनी आयुक्त

सरकार आंकड़ों की मानें तो प्रदेश की कुल 40 लाख हेक्टेयर खेतिहर जमीन में से लगभग 37 लाख हेक्टेयर खेतों में जैविक और अजैविक रसायन और खाद का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि खेती की जमीन पर लगभग 5000 मीट्रिक टन कीटनाशकों का उपयोग किया जा रहा है। जिन 37 लाख हेक्टेयर खेतों में कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है, उसमें से 31 लाख हेक्टेयर खेतों में रासायनिक खाद और बाकी में जैविक खाद का प्रयोग हो रहा है।

ये भी पढ़ें- यूरिया और कीटनाशक जमीन को बना रहे बंजर , देश की 32 फीसदी भूमि होती जा रही है बेजान

"जबकि सबसे ज्यादा खपत अनाज (2,000 मीट्रिक टन), सब्जी और फलों (1,000 मीट्रिक टन) के लिए है, वे बहुत पीछे नहीं है। किसान कपास के रूप में वाणिज्यिक फसलों के लिए वर्ष में 700 मीट्रिक टन उर्वरक कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। 2017-18 में, खरीफ और रबी मौसम दोनों में कीटनाशकों का 4,943 मीट्रिक टन का सेवन किया गया था, उप निदेशक ने कहा।

Share it
Top