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'जैविक खेती से बेहतर हो सकती है किसानों की आमदनी'

उत्त‍राखंड में ऑर्गेनिक स्टेट बनने की पूरी संभावना है। जैविक खेती को मार्केट उपलब्ध‍ कराने के लिए सरकार काम कर रही है। हमारे किसानों की पैदावार खराब न हो इसके लिए फूड प्रोसेसिंग पर हमारा खास ध्यान है।- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

Ranvijay SinghRanvijay Singh   8 Oct 2018 1:37 PM GMT

लखनऊ। जैविक खेती को लेकर सरकार लगातार किसानों को जागरूक करने में लगी है। कृषि एवं किसान कल्यााण मंत्री राधामोहन सिंह ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि ''जैविक खेती से किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों की फसल का उन्हें सही भाव मिले।'' इसी सोच के तहत सरकार जैविक उत्पादों के लिए बाजार तैयार करने में सहायता भी कर रही है। किसानों की माने तो जैविक खेती आम खेती से बेहतर है और इसमें मुनाफा ज्यादा है।

उत्तर प्रदेश में फैजाबाद के गांव मसूमगंज के किसान राजेंद्र वर्मा बताते हैं, ''जैविक खेती करने से पहले किसानों को संकल्प लेना होगा कि वो खुद भी जैविक उत्पाद ही खाएंगे। तभी जाकर वो इसे उगा सकते हैं। जहां तक आय दोगुनी होने की बता है तो आया दोगुनी तो नहीं हो रही हां इससे किसानों की आया बेहतर हो सकती है।'' राजेंद्र पहले रासायनिक खेती ही करते थे, लेकिन तभी उन्हें किसानों के गुरू कहे जाने वाले पद्मश्री सुभाष पालेकर की किताब मिली। इसे पढ़ने के बाद राजेंद्र का झुकाव जैविक खेती की ओर बढ़ा।

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जैविक खेती हर हाल में रासायनिक से बेहतर- किसान

राजेंद्र बताते हैं, ''रासायनिक खेती के मार्केट में किसानों की फसलें नीलाम होती हैं। इसे किसानों की निलामी भी कह सकते हैं। रासायनिक खेती में हमें हक ही नहीं कि अपने उत्पाद का दाम लगा सकें। अगर किसानों को इस निलामी से बचना है तो जैविक खेती की ओर बढ़ना होगा। किसान अपनी 10 प्रतिशत जमीन से जैविक खेती की शुरुआत करे। इससे उनका रुझान भी बढ़ेगा और इस बात का डर भी नहीं रहेगा कि कम पैदावार में क्या होगा।'' राजेंद्र दावे के साथ कहते हैं, ''जैविक खेती हर हाल में रासायनिक खेती से बेहतर है। इससे मृदा को भी नुकसान नहीं और स्वास्‍थ्‍य के लिए भी सही है।''

पहले साल कम होगी फसल, लेकिन बाद में हो जाएगी सही

वहीं, उन्नाव के किसान विजय कुमार मिश्रा बताते हैं, ''रासायनिक खेती से जैविक खेती में आने पर पहले साल तो फसल कम होती है। इसको सही होने में तीन साल लग जाते हैं। तीन साल बाद फसल सही हो पाती है। जहां तक बात आय दोगुनी होने की है तो ऐसा नहीं है। हां, अगर आपके उत्पाद बिक जाते हैं तो आय बेहतर जरूर हो जाएगी। पहले सब जैविक ही था और बाद में रासायनिक खेती होने लगी। लेकिन अब लोग इस ओर लौट रहे हैं।''

विजय कुमार कहते हैं, ''हमने अपने स्वार्थ की वजह से मित्र जीवाणुओं को मार दिया। जैविक खेती में इन्हीं जीवाणुओं को फिर से तैयार किया जाता है। जैविक खेती से तैयार फसलों में कीट भी 80 प्रतिशत तक कम ही लगते हैं। साथ ही मृदा के तत्व भी बराबर रहते हैं।

लखनऊ में कुछ दिनों पहले किसान मंडी में जैविक बाजार की शुरुआत की गई है। किसान बाजार में मंडी सहायक नरेश यादव बताते हैं, ''किसान बाजार में जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी अक्सर लगती है। यहां किसानों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों को बेचने की सुविधा मिलती है। इस तरह किसान अपने उत्पाद का दाम खुद तय कर पाता है। बिचौलिए न होने के कारण उसे फायदा भी पूरा मिलता है। जैविक उत्पादों के ग्राहकों के लिए भी ये अच्छा है कि उन्हें एक छत के नीचे बेहतर चीजें मिल जाती हैं।''

देश में करीब 23.2 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती

मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा था, "परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीआई), पूर्वोत्तर क्षेत्र जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन, (एमओवीसीडीएनईआर) और राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत पूरे देश में करीब 23.2 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती हो रही है।"

भारतीय कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों के क्षेत्रों में जैविक कृषि के तहत 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य है। अब तक 45863 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक योग्य क्षेत्र में परिवर्तित किया जा चुका है और 2406 फार्मर इंटरेस्ट ग्रुप (एफआईजी) का गठन कर लिया गया है, 2500 एफआईजी लक्ष्य के मुकाबले 44064 किसानों को योजना से जोड़ा जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड में एक कार्यक्रम में जैविक खेती को लेकर बात करते हुए कहा था, ''उत्त‍राखंड में ऑर्गेनिक स्टेट बनने की पूरी संभावना है। जैविक खेती को मार्केट उपलब्ध‍ कराने के लिए सरकार काम कर रही है। हमारे किसानों की पैदावार खराब न हो इसके लिए फूड प्रोसेसिंग पर हमारा खास ध्यान है।''

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